Salary Saving Tips: सैलरी आते ही हो जाते हैं पैसे खत्म? अपनाएं ये 5 आसान तरीके, महीने के अंत तक रहेगी बचत

Last Updated:October 20, 2026, 13:07 IST
सुल्तानपुर: सैलरी आते ही कुछ दिन तक सब ठीक रहता है, लेकिन महीने के आखिर में बैंक अकाउंट खाली होने लगता है? घर के खर्च, ऑनलाइन शॉपिंग और छोटी-छोटी जरूरतों में पैसा तेजी से निकल जाता है. ऐसे में चार्टर्ड अकाउंटेंट मनमोहित सिंह ने बचत करने और सैलरी को बेहतर तरीके से मैनेज करने के कुछ आसान तरीके बताए हैं, जिन्हें अपनाकर आप अपने खर्चों पर नियंत्रण रख सकते हैं.
सुल्तानपुर: महीने की शुरुआत में सैलरी आते ही लोग खर्चों को लेकर कई तरह की योजनाएं बनाते हैं, लेकिन कुछ ही दिनों में बैंक अकाउंट और बटुए में पैसे कम होने लगते हैं. घर का खर्च, किराना, बिजली-पानी का बिल, ऑनलाइन शॉपिंग और रोजमर्रा की छोटी-छोटी जरूरतों पर पैसा कब खर्च हो जाता है, इसका पता भी नहीं चलता. कई बार अच्छी कमाई होने के बावजूद महीने के आखिर में आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ता है. अगर आपके साथ भी ऐसा होता है, तो खर्च करने की आदतों में कुछ बदलाव करके अपनी सैलरी को बेहतर तरीके से मैनेज कर सकते हैं.
चार्टर्ड अकाउंटेंट मनमोहित सिंह ने लोकल 18 को बताया कि ज्यादातर लोग सैलरी में से महीने के अंत में बचने वाले पैसों को सेव करने के बारे में सोचते हैं. हालांकि, इस तरीके से अक्सर बचत नहीं हो पाती. इसलिए सैलरी आते ही कम से कम 20 प्रतिशत रकम अलग रखने की आदत डालनी चाहिए. इस पैसे को इमरजेंसी फंड के रूप में रखा जा सकता है, जिससे अचानक कोई खर्च आने पर आर्थिक परेशानी न हो. इसके बाद बची हुई रकम से घर के जरूरी खर्चों की सूची बनाकर महीने का बजट तैयार करना चाहिए.
आज के समय में UPI से भुगतान करना काफी आसान हो गया है. चाय, स्नैक्स, ऑनलाइन ऑर्डर और छोटी-मोटी खरीदारी पर लोग अक्सर बिना सोचे पैसे खर्च कर देते हैं. इन खर्चों पर ध्यान नहीं देने के कारण महीने के अंत तक छोटी-छोटी रकम मिलकर बड़ा खर्च बन जाती हैं. इसलिए हर UPI ट्रांजेक्शन का हिसाब रखना जरूरी है. साथ ही, गैर-जरूरी खर्चों की पहचान करके महीने की शुरुआत में ही जरूरी और गैर-जरूरी चीजों के लिए अलग-अलग सीमा तय कर लेनी चाहिए.
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बचत के लिए केवल अपनी इच्छाशक्ति पर निर्भर रहने के बजाय पहले से योजना बनाना भी जरूरी है. सैलरी आने के अगले दिन RD या म्यूचुअल फंड SIP के लिए ऑटो-डेबिट की सुविधा शुरू की जा सकती है. इससे बचत के लिए तय की गई रकम अपने आप अलग हो जाएगी और उसे अनावश्यक खर्च करने की संभावना कम होगी. हालांकि, निवेश से पहले अपनी आर्थिक स्थिति और जोखिम उठाने की क्षमता का आकलन करना जरूरी है.
इसके अलावा, बटुए में जरूरत से ज्यादा कैश रखने या कई डेबिट कार्ड सक्रिय रखने से भी फिजूलखर्ची बढ़ सकती है. ऐसे में बटुए में केवल जरूरत के हिसाब से कैश रखना बेहतर है. ऑनलाइन शॉपिंग ऐप्स से सेव किए गए कार्ड की डिटेल्स हटाने से अचानक खरीदारी करने की आदत पर भी नियंत्रण पाया जा सकता है.
महीने की शुरुआत में बजट बनाकर हर खर्च को तय सीमा के भीतर रखने की कोशिश करें. इन छोटी-छोटी आदतों को अपनाकर न केवल बचत बढ़ाई जा सकती है, बल्कि महीने के आखिर में पैसों की कमी से भी बचा जा सकता है.
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October 20, 2026, 13:07 IST



