गाय को ज्यादा हरा चारा खिलाना पड़ सकता है भारी, आफरा से बचाने के लिए डॉक्टर की ये सलाह जरूर जानें

Last Updated:October 24, 2026, 13:37 IST
Bikaner News: बीकानेर में पशु चिकित्सक ने पशुपालकों को ज्यादा हरा चारा खिलाने से गायों में होने वाले आफरा के खतरे को लेकर सतर्क किया है. जानिए आफरा के लक्षण, मीठा सोडा देते समय बरती जाने वाली सावधानियां और गाय को इस गंभीर समस्या से बचाने के जरूरी उपाय.
बीकानेर. हरा चारा पशुओं के लिए उपयोगी होता है, लेकिन जरूरत से ज्यादा हरा चारा खाने से गायों में आफरा जैसी गंभीर समस्या हो सकती है. खासकर जब गायें एक साथ अधिक मात्रा में हरा चारा खा लेती हैं, तो उनके पेट में गैस बनने और पेट फूलने की समस्या सामने आ सकती है. समय रहते इस समस्या पर ध्यान नहीं दिया जाए, तो पशु की हालत गंभीर हो सकती है. ऐसे में पशुपालकों को गायों के खानपान और उनके व्यवहार पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है.
पॉलिक्लीनिक, गोगागेट के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. जरनेल बिश्नोई ने बताया कि हरा चारा उपलब्ध होने पर कई बार गायें जरूरत से ज्यादा चारा खा लेती हैं. इसके कारण उनके पेट में आफरा सहित कई तरह की समस्याएं पैदा हो सकती हैं. आम पशुपालकों के सामने भी गायों में आफरा की समस्या आती रहती है, इसलिए पशुओं के खानपान पर निगरानी रखना जरूरी है.
आफरा होने पर तुरंत लें पशु चिकित्सक की सलाहडॉ. बिश्नोई के अनुसार, गाय में आफरा के लक्षण दिखाई देने पर लापरवाही नहीं करनी चाहिए, इस समस्या में पशु का पेट फूल सकता है और उसकी स्थिति तेजी से बिगड़ सकती है. गंभीर स्थिति में पशु की जान पर भी खतरा हो सकता है, ऐसे में पशुपालकों को तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए, ताकि समय रहते उचित उपचार किया जा सके. उन्होंने बताया कि आफरा की समस्या में हींग और मीठे सोडे के इस्तेमाल को लेकर पशुपालकों के बीच कई तरह के घरेलू उपाय प्रचलित हैं. हालांकि, इनका इस्तेमाल पशु की स्थिति, वजन और समस्या की गंभीरता को ध्यान में रखकर ही करना चाहिए. बिना पशु चिकित्सक की सलाह के किसी भी घरेलू नुस्खे या पदार्थ की मात्रा तय करना उचित नहीं है.
मीठा सोडा देते समय बरतें विशेष सावधानीडॉ. बिश्नोई ने मीठा सोडा देने के दौरान विशेष सावधानी बरतने की बात कही, उन्होंने बताया कि यदि कोई पदार्थ गलत तरीके से पशु को दिया जाता है, तो वह श्वसन नली में जा सकता है. इससे पशु को गंभीर नुकसान पहुंचने के साथ उसकी जान भी जा सकती है, इसलिए पशु को जबरदस्ती पानी या कोई अन्य पदार्थ पिलाने से बचना चाहिए. आफरा से पीड़ित गाय को लेकर यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि उसकी स्थिति पर लगातार नजर रखी जाए. यदि गाय बेचैन है, उसका पेट तेजी से फूल रहा है या उसे सांस लेने में परेशानी हो रही है, तो तत्काल पशु चिकित्सक की मदद लेनी चाहिए. ऐसी स्थिति में घरेलू उपचार के भरोसे समय गंवाना खतरनाक हो सकता है.
हरा चारा खिलाने में रखें संतुलनपशुपालकों को गायों को हरा चारा खिलाते समय संतुलन बनाए रखना चाहिए, एक साथ बहुत अधिक चारा देने के बजाय पशु के खानपान पर नियमित निगरानी रखनी चाहिए. चारे में अचानक बदलाव करने से भी बचना चाहिए. गाय के व्यवहार, भूख और पेट की स्थिति में असामान्य बदलाव दिखाई देने पर सतर्क हो जाना चाहिए. डॉ. बिश्नोई की सलाह है कि पशुओं की सेहत को लेकर सावधानी बरतना जरूरी है. आफरा जैसी समस्या में शुरुआती लक्षणों को पहचानकर समय पर पशु चिकित्सक से उपचार लेने से गंभीर स्थिति से बचने में मदद मिल सकती है.
About the Authorमोनाली पाल
नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…
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Bikaner,Rajasthan
First Published :
October 24, 2026, 13:37 IST



