चाचा की मौत ने भतीजे को बना दिया घायलों का मसीहा, 17 साल में 16 हजार जिंदिगियां बचा चुके हैं अशोक

झुंझुनूं: सड़क हादसे में घायल व्यक्ति के लिए समय पर मिला उपचार जिंदगी और मौत के बीच का अंतर बन सकता है. लेकिन कई बार मदद के अभाव में घायल सड़क पर ही तड़पता रहता है. झुंझुनूं जिले के सूरजगढ़ में एक व्यक्ति ने इसी दर्द को अपना संकल्प बना लिया. अपने चाचा को हादसे के बाद समय पर इलाज नहीं मिलने से खोने वाले अशोक जांगिड़ ने ठान लिया कि अब किसी दूसरे परिवार को ऐसी पीड़ा से नहीं गुजरने देंगे. इसी संकल्प से शुरू हुई सेवा आज सैकड़ों परिवारों के लिए उम्मीद की किरण बन चुकी है.
सूरजगढ़ की जीवन ज्योति रक्षा समिति पिछले 17 वर्षों से सड़क दुर्घटनाओं में घायल लोगों को अस्पताल पहुंचाने का काम कर रही है. समिति की मानें तो इस अवधि में 8 हजार 942 दुर्घटनाओं में घायल हुए करीब 17 हजार 540 लोगों को अस्पताल पहुंचाया गया. इनमें से 16 हजार से ज्यादा लोगों की जान बच सकी. आज समिति से तीन दर्जन से अधिक लोग जुड़े हुए हैं, जो बिना किसी शुल्क के घायलों को अस्पताल पहुंचाने में जुटे हैं.
दो एंबुलेंस से दिन-रात सेवा करने के साथ मरीजों से नहीं लेते पैसे
समिति का उद्देश्य साफ है कि किसी भी घायल की मौत उपचार के अभाव में न हो. इसी लक्ष्य के साथ समिति के सदस्य दिन-रात जरूरतमंदों की मदद के लिए तैयार रहते हैं. घायलों को अस्पताल पहुंचाने के लिए समिति के पास दो एंबुलेंस हैं. इनका संचालन भी समिति के सदस्य ही करते हैं. इस सेवा के बदले घायलों या उनके परिजनों से कोई पैसा नहीं लिया जाता. एंबुलेंस के संचालन और अन्य जरूरी खर्चों के लिए समिति के सदस्य हर महीने 200-200 रुपए सदस्यता शुल्क के रूप में जमा करते हैं. जरूरत पड़ने पर भामाशाहों का सहयोग भी लिया जाता है. शुरुआत में समिति सूरजगढ़ क्षेत्र में सड़क हादसों के घायलों को अस्पताल पहुंचाती थी. अब सूरजगढ़ से दूसरे अस्पताल में रेफर किए जाने वाले घायलों को झुंझुनूं तक निःशुल्क पहुंचाने की जिम्मेदारी भी समिति निभा रही है. इससे जरूरतमंद परिवारों को आपात स्थिति में बड़ी राहत मिल रही है.
11 साल में 416 लोगों को नहीं बचा पाने का मलाल
समिति के डायरेक्टर अशोक जांगिड़ बताते हैं कि बीते 11 वर्षों में उन्होंने हजारों घायलों को अस्पताल पहुंचाया. समय पर उपचार मिलने से कई लोगों की जान बच सकी. हालांकि, इस दौरान करीब 416 लोगों की जान नहीं बचाई जा सकी। इसका उन्हें आज भी दुख है. अशोक बताते हैं कि हर घायल को बचाने की पूरी कोशिश की जाती है, लेकिन कई बार चोटें इतनी गंभीर होती है कि तमाम प्रयासों के बावजूद जान नहीं बच पाती. इसके बावजूद समिति के सदस्यों ने हार नहीं मानी है. उनका प्रयास आज भी यही है कि सड़क पर घायल पड़े किसी व्यक्ति को समय पर मदद मिल सके और उपचार के अभाव में उसकी जान न जाए.
चाचा को डेढ़ घंटे तक नहीं मिली मदद, तभी लिया संकल्प
अशोक जांगिड़ के इस सेवा कार्य के पीछे एक दर्दनाक घटना है. करीब 17 साल पहले उनके चाचा ओमप्रकाश जांगिड़ लोहारू के पास सड़क दुर्घटना में घायल हो गए थे. अशोक ने बताया कि उनके चाचा करीब डेढ़ घंटे तक सड़क पर तड़पते रहे, लेकिन उन्हें समय पर अस्पताल पहुंचाने के लिए कोई आगे नहीं आया और आखिरकार उनकी मौत हो गई. इस घटना ने अशोक को अंदर तक झकझोर दिया. अपने चाचा को खोने का दर्द उनके जीवन का ऐसा मोड़ बना, जिसने उन्हें दूसरों की जिंदगी बचाने के लिए प्रेरित किया. उन्होंने उसी दिन संकल्प लिया कि वे अपनी ओर से पूरी कोशिश करेंगे कि किसी अन्य घायल को समय पर उपचार के अभाव में अपनी जान न गंवानी पड़े. शुरुआत में अशोक ने अपनी गाड़ी से ही दुर्घटना में घायल लोगों को अस्पताल पहुंचाना शुरू किया. धीरे-धीरे लोगों ने उनके काम और समर्पण को देखा तो दूसरे लोग भी मदद के लिए आगे आने लगे. किसी ने समय दिया, किसी ने आर्थिक सहयोग किया तो किसी ने संसाधन उपलब्ध करवाए. इस तरह व्यक्तिगत प्रयास धीरे-धीरे सामूहिक अभियान बन गया और जीवन ज्योति रक्षा समिति का गठन हुआ.
भामाशाहों ने बढ़ाया मदद का हाथ तो एंबुलेंस से बढ़ा दायरा
समिति के काम को आगे बढ़ाने में भामाशाहों का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा. समिति को पहली एंबुलेंस भामाशाह दरिया सिंह तेतरवाल ने उपलब्ध करवाई थी. करीब छह साल तक संचालन के बाद यह एंबुलेंस खराब हो गई तो उन्होंने दूसरी गाड़ी भी उपलब्ध करवाई. इसके बाद समिति ने भामाशाहों से सहयोग जुटाकर एक बोलेरो खरीदी और उसे एंबुलेंस के रूप में तैयार करवाया. इससे घायलों को अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिली.
आज जीवन ज्योति रक्षा समिति के सदस्य किसी पहचान या आर्थिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि इंसानियत के नाते इस काम में जुटे हैं. उनके लिए सड़क पर घायल पड़ा व्यक्ति किसी का अपना है, जिसे समय पर मदद की जरूरत है. अशोक जांगिड़ का संकल्प आज भी वही है, जो चाचा को खोने के बाद लिया था. घायल को समय पर उपचार मिल सके, इसके लिए हर संभव प्रयास करना. सूरजगढ़ में जीवन ज्योति रक्षा समिति इसी सोच के साथ जरूरतमंदों की मदद में जुटी है.



