Jagdish Temple: उदयपुर के इस मंदिर में शरद पूर्णिमा पर हुआ खास आयोजन, 501 लीटर दूध से बना महाभोग

Last Updated:October 26, 2026, 12:23 IST
Jagdish Temple: उदयपुर के प्रसिद्ध जगदीश मंदिर में शरद पूर्णिमा पर ठाकुरजी का विशेष श्रृंगार किया. सफेद जरी के वस्त्रों में सजे भगवान को 501 लीटर दूध से तैयार खीर सहित कई व्यंजनों का भोग लगाया गया. संध्या आरती के बाद ठाकुरजी को चंद्रमा की धवल चांदनी में विराजित किया गया, जहां दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे.
उदयपुर. झीलों की नगरी में शरद पूर्णिमा का पर्व श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया, इस मौके पर शहर के मंदिरों में विशेष धार्मिक आयोजन हुए. मंदिरों में भगवान का आकर्षक श्रृंगार किया गया और खीर सहित कई तरह के व्यंजनों का भोग अर्पित किया गया. शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा की धवल चांदनी में ठाकुरजी को विराजित करने की परंपरा भी निभाई गई. सुबह से ही मंदिरों में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया था. भक्तों ने भगवान के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की.
शहर के प्रसिद्ध जगदीश मंदिर में भी शरद पूर्णिमा के अवसर पर विशेष आयोजन किया गया. मंदिर में ठाकुरजी का सफेद जरी के वस्त्रों और आकर्षक मुकुट से विशेष श्रृंगार किया. सफेद वस्त्रों में सजे ठाकुरजी के दर्शन करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे. इस दौरान मंदिर में भक्ति और उत्साह का माहौल देखने को मिला. भक्तों ने भगवान के दर्शन किए और धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया.
501 लीटर दूध से खीर तैयार की
मंदिर के पुजारी विनोद ने बताया कि शरद पूर्णिमा पर ठाकुरजी की विशेष सेवा की जाती है, इसी परंपरा के तहत मंदिर में महारास की सेवा का आयोजन हुआ. इसके बाद ठाकुरजी को खीर, चपड़ा, ककड़ी सहित विभिन्न व्यंजनों का भोग अर्पित किया गया. इस दिन भगवान के लिए विशेष भोग तैयार किया जाता है और पूरे विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की जाती है. मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं ने भी इस विशेष आयोजन में भाग लेकर भगवान के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की. शरद पूर्णिमा के अवसर पर जगदीश मंदिर में इस बार 501 लीटर दूध से खीर तैयार की गई. खीर बनाने के लिए विशेष तैयारियां की गई, संध्या आरती के बाद ठाकुरजी को चंद्रमा की धवल चांदनी में विराजित किया.
इस दौरान धार्मिक परंपराओं के अनुसार भगवान को खीर का भोग अर्पित किया. शरद पूर्णिमा पर खीर का विशेष महत्व माना जाता है और इसी वजह से मंदिरों में इस दिन खीर तैयार कर भगवान को अर्पित की जाती है. भगवान को भोग लगाने के बाद श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरित किया. भक्तों ने प्रसाद ग्रहण कर खुद को सौभाग्यशाली माना, मंदिर परिसर में दर्शन और प्रसाद लेने के लिए श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही. शरद पूर्णिमा के इस आयोजन ने एक बार फिर उदयपुर की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं की झलक दिखाई. आस्था, पूजा-अर्चना और सामूहिक प्रसाद वितरण के बीच शहर में शरद पूर्णिमा का पर्व भक्तिमय माहौल में संपन्न हुआ.
About the Authorमोनाली पाल
नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…
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Udaipur,Rajasthan
First Published :
October 26, 2026, 12:23 IST



