सोलंकी वंश की कुलदेवी, जिनके नाम से कारोबार शुरू करना शुभ मानते हैं लोग, जानें इस मंदिर से जुड़ी है अनोखी आस्था

Last Updated:October 27, 2026, 08:04 IST
Jalore Kshemakari Mata Temple: राजस्थान के जालोर जिले के भीनमाल में स्थित क्षीमकरी (खीमज) माता मंदिर आस्था का प्रमुख केंद्र है. 1800 साल पुरानी पौराणिक मान्यताओं के अनुसार ऋषि गौतम के यज्ञ से प्रकट होकर देवी ने उत्तमौजा दैत्य का संहार किया था. सोलंकी वंश की कुलदेवी के रूप में पूजी जाने वाली माता के प्रति भक्तों की ऐसी अगाध श्रद्धा है कि वे अपने व्यापार और प्रतिष्ठानों का नाम माता के नाम पर रखकर समृद्धि प्राप्त करते हैं.
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जालोर: जालोर जिले के ऐतिहासिक भीनमाल क्षेत्र में ऊंची पहाड़ी पर स्थित क्षीमकरी माता मंदिर आस्था, भक्ति और धार्मिक मान्यताओं का एक प्रमुख केंद्र माना जाता है. पहाड़ी की चोटी पर स्थित यह प्राचीन मंदिर न केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है, बल्कि इससे जुड़ी पौराणिक कथाएं भी बेहद रोचक और अलौकिक हैं. सदियों से यह पावन धाम लाखों श्रद्धालुओं की अगाध श्रद्धा का आधार रहा है.
मंदिर से जुड़ी लोक कथा के अनुसार, प्राचीन काल में इस क्षेत्र में उत्तमौजा नाम का एक अत्यंत क्रूर दैत्य आतंक मचाता था. उसके अत्याचारों से त्रस्त होकर क्षेत्रवासियों ने परम तपस्वी ऋषि गौतम की शरण ली. ऋषि गौतम ने गायत्री और सावित्री मंत्रों की शक्ति से एक महायज्ञ की अग्नि प्रज्वलित की, जिससे प्रकट होकर देवी क्षीमकरी ने दैत्य का वध किया. क्षेत्र को सुरक्षा देने के लिए देवी ने एक विशाल पर्वत उस दैत्य के ऊपर रख दिया. भक्तों के आग्रह पर देवी उसी पर्वत पर सदा के लिए विराजमान हो गईं, जिसके बाद से यहाँ पूजा-अर्चना की परंपरा शुरू हुई.
सोलंकी वंश की कुलदेवी और खीमज माता के रूप में मान्यताक्षीमकरी माता को स्थानीय स्तर पर ‘खीमज माता’ के नाम से भी बड़े भाव से पूजा जाता है. माता को सोलंकी राजपूत वंश की कुलदेवी के रूप में भी जाना जाता है. यही वजह है कि राजस्थान, गुजरात और देश के विभिन्न राज्यों से सोलंकी वंश के वंशज और अन्य श्रद्धालु माता के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करने यहाँ पहुँचते हैं. नवरात्रि और अन्य धार्मिक अवसरों पर यहाँ मेला जैसा माहौल रहता है.
व्यापार में बरकत और माता के नाम का अटूट विश्वासमंदिर से जुड़ी सबसे अनूठी बात यह है कि यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं के लिए माता की भक्ति केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उनके दैनिक जीवन और व्यापार से भी गहराई से जुड़ी है. गुजरात के पाटन से आई एक श्रद्धालु महिला बताती हैं कि उनके रेस्टोरेंट का नाम माता के नाम पर ही है और कारोबार में मिलने वाली अपार सफलता और बरकत को वे माता की कृपा मानती हैं. लोगों का मानना है कि माता का नाम लेकर शुरू किए गए हर काम में सफलता और मन को अद्भुत संबल मिलता है.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…
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Jalor,Jalor,Rajasthan
First Published :
October 27, 2026, 08:04 IST



