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पत्नी ने दोस्त के लिए रखा करवा चौथ का व्रत, हाथों पर लगाई उसके नाम की मेहंदी, कोर्ट ने दिया पति को तलाक

Last Updated:October 27, 2026, 10:30 IST

Jaipur: जयपुर फैमिली कोर्ट-2 ने एक वैवाहिक विवाद में 13 साल पुरानी शादी खत्म करने का आदेश दिया है. एक रिपोर्ट के मुताबिक, पत्नी ने दूसरे पुरुष के लिए करवाचौथ का व्रत रखा और उसके नाम की मेहंदी लगाई थी. पति ने वैवाहिक जिम्मेदारियां नहीं निभाने और मानसिक प्रताड़ना के आरोप लगाए. कोर्ट ने मामले की परिस्थितियों और पेश किए गए तथ्यों के आधार पर पत्नी के व्यवहार को मानसिक क्रूरता मानते हुए पति के पक्ष में फैसला सुनाया.

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पत्नी ने दोस्त के लिए रखा करवा चौथ का व्रत, कोर्ट ने दिया पति को तलाकZoomपत्नी ने दोस्त के लिए रखा करवा चौथ का व्रत, कोर्ट ने माना व्यभिचार और 13 साल पुरानी शादी की खत्म

जयपुर. राजस्थान की राजधानी जयपुर में पारिवारिक विवाद से जुड़े एक मामले में फैमिली कोर्ट-2 ने पति के पक्ष में फैसला सुनाते हुए 13 साल पुरानी शादी खत्म करने का आदेश दिया है. मामले में पत्नी के व्यवहार और वैवाहिक जिम्मेदारियों से जुड़े तथ्यों को आधार बनाकर कोर्ट ने इसे मानसिक क्रूरता माना. कोर्ट के अनुसार, पत्नी का दूसरे पुरुष के प्रति वैवाहिक संबंधों जैसा व्यवहार करना, पति से दूरी बनाए रखना और परिवार के प्रति जिम्मेदारियों का निर्वहन नहीं करना वैवाहिक संबंधों पर गंभीर असर डालने वाले तथ्य थे.

दैनिक भास्कर में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, मामले में पत्नी ने दूसरे पुरुष के साथ गोवा में फेरे लेने जैसे व्यवहार को स्वीकार किया था. रिपोर्ट के अनुसार, पत्नी ने उस पुरुष के लिए करवाचौथ का व्रत रखा और उसके नाम की मेहंदी भी अपने हाथों पर लगाई थी. कोर्ट ने इन घटनाओं को वैवाहिक संबंधों की मर्यादा और पति-पत्नी के बीच भरोसे से जोड़कर देखा. अदालत का मानना था कि इस तरह का व्यवहार सामान्य दोस्ती की सीमा से आगे जाता है और इससे पति को मानसिक पीड़ा पहुंच सकती है.

13 साल पुरानी शादी खत्म करने का आदेशमामले में पति की ओर से वैवाहिक जीवन में मानसिक शांति, विश्वास और आपसी संबंधों में आई गंभीर गिरावट का मुद्दा उठाया गया था. अदालत के सामने रखे गए तथ्यों के मुताबिक, पति-पत्नी के बीच लंबे समय से वैवाहिक सहजीवन प्रभावित था. पति ने आरोप लगाया कि पत्नी ने उसके साथ वैवाहिक जिम्मेदारियां निभाने के बजाय ऐसा व्यवहार किया, जिससे रिश्ते में भरोसा और सम्मान खत्म हो गया. अदालत ने मामले की परिस्थितियों और प्रस्तुत तथ्यों पर विचार करने के बाद विवाह विच्छेद का आदेश दिया. इस तरह करीब 13 साल से कायम वैवाहिक संबंध कानूनी रूप से समाप्त हो गए. मामले में शादी मई 2013 में हुई थी.

करवाचौथ का व्रत और मेहंदी लगाने का मामलाकोर्ट के आदेश में पत्नी के आचरण से जुड़े कई पहलुओं का उल्लेख किया गया. रिपोर्ट के मुताबिक, पत्नी ने दूसरे पुरुष के साथ गोवा में फेरे लिए और उसके लिए करवाचौथ का व्रत भी रखा. इतना ही नहीं, उसने उस पुरुष के नाम की मेहंदी भी लगाई. पति का पक्ष था कि इस तरह के व्यवहार ने उसके वैवाहिक जीवन को प्रभावित किया और उसे मानसिक रूप से परेशान किया. कोर्ट ने इन परिस्थितियों को केवल व्यक्तिगत पसंद या सामान्य मित्रता का मामला नहीं माना. अदालत के सामने यह सवाल था कि क्या पत्नी का व्यवहार वैवाहिक रिश्ते की सीमाओं से आगे बढ़कर पति को मानसिक पीड़ा पहुंचाने वाला था. प्रस्तुत तथ्यों और मामले की परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने इसे मानसिक क्रूरता के रूप में स्वीकार किया.

पति से दूरी और पारिवारिक जिम्मेदारियों का भी जिक्रमामले में पति की ओर से यह भी आरोप लगाया गया कि पत्नी ने उसे लंबे समय तक वैवाहिक सहजीवन से वंचित रखा. इसके अलावा नाबालिग बेटे की उचित देखभाल नहीं करने और पति के माता-पिता के साथ अनुचित व्यवहार करने जैसे आरोप भी सामने आए. अदालत के समक्ष रखे गए पक्ष के अनुसार, इन घटनाओं का असर पति के मानसिक स्वास्थ्य और पारिवारिक जीवन पर पड़ा. पति ने दलील दी कि लगातार तनाव और रिश्ते में विश्वास की कमी के कारण वैवाहिक जीवन सामान्य रूप से चलाना मुश्किल हो गया था.कोर्ट ने पूरे घटनाक्रम को एक साथ देखते हुए माना कि वैवाहिक संबंधों में लंबे समय से चली आ रही समस्याएं और पत्नी का कथित आचरण पति के लिए मानसिक पीड़ा का कारण बने. इन्हीं परिस्थितियों के आधार पर अदालत ने विवाह समाप्त करने का फैसला सुनाया.

क्या होती है मानसिक क्रूरता?वैवाहिक विवादों में मानसिक क्रूरता का अर्थ केवल शारीरिक हिंसा तक सीमित नहीं है. किसी जीवनसाथी का लगातार ऐसा व्यवहार, जिससे दूसरे को गंभीर मानसिक पीड़ा पहुंचे और वैवाहिक जीवन असहनीय हो जाए, परिस्थितियों के आधार पर मानसिक क्रूरता के दायरे में आ सकता है. हालांकि, किसी एक घटना को हर मामले में मानसिक क्रूरता नहीं माना जा सकता. अदालत संबंधित तथ्यों, दोनों पक्षों की दलीलों और पूरे वैवाहिक संबंध की परिस्थितियों का आकलन करती है. इस मामले में भी कोर्ट ने कथित घटनाओं और वैवाहिक जिम्मेदारियों से जुड़े पहलुओं को ध्यान में रखकर निर्णय दिया.यह फैसला एक बार फिर बताता है कि वैवाहिक विवादों में केवल किसी एक घटना के बजाय पूरे घटनाक्रम और उसके प्रभाव को महत्वपूर्ण माना जाता है. जयपुर फैमिली कोर्ट-2 ने उपलब्ध तथ्यों के आधार पर पति के पक्ष में फैसला सुनाते हुए 13 साल पुरानी शादी समाप्त करने का आदेश दिया.

About the Authorvicky Rathore

Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…

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Jaipur,Jaipur,Rajasthan

First Published :

October 27, 2026, 10:30 IST

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