Unique Temple: युद्ध के समय छिपाई गई मूर्ति, खेत में मिली तो बना मंदिर; बीकानेर के पंचमुखा हनुमान जी की अनोखी कहानी

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युद्ध के समय छिपाई मूर्ति, फिर बना मंदिर; पंचमुखा हनुमान जी की अनोखी कहानी
Last Updated:October 27, 2026, 15:30 IST
Story Of Bikaner Pracheen Panchmukhi Hanuman temple : बीकानेर के रानीबाजार स्थित प्राचीन पंचमुखा हनुमान जी मंदिर का इतिहास रातीघाटी युद्ध से जुड़ा है. मंदिर में पांच मुखों वाली दिव्य प्रतिमा है, जिसके दर्शन के लिए भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं. करीब 100 वर्ष पहले मीणा नाम के एक भक्त ने यहां निज मंदिर का निर्माण करवाया था. इसके बाद समय के साथ मंदिर में श्रद्धालुओं की आस्था बढ़ती गई. मंदिर की प्राचीनता और धार्मिक महत्व को देखते हुए इसके जीर्णोद्धार का कार्य करवाया गया.
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बीकानेर. राजस्थान के बीकानेर में धार्मिक आस्था और ऐतिहासिक मान्यताओं से जुड़ा एक प्राचीन मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है. रानीबाजार इंडस्ट्रियल एरिया स्थित प्राचीन पंचमुखा हनुमान जी मंदिर का इतिहास रातीघाटी युद्ध से जुड़ा बताया जाता है. मंदिर में विराजित हनुमान जी की पांच मुखों वाली दिव्य प्रतिमा श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण है. मंदिर का हाल ही में जीर्णोद्धार किया गया है. मंदिर परिसर में महादेव जी का मंदिर भी स्थित है.
पंचमुखा सेवा संस्थान के अध्यक्ष राहुल गहलोत ने बताया कि मान्यता के अनुसार, रातीघाटी युद्ध के समय परकोटे के बाहर स्थित मंदिरों की मूर्तियों को सुरक्षित रखने के लिए छिपाया गया था. इसी दौरान पंचमुखा हनुमान जी की प्रतिमा को भी जमीन में छिपा दिया गया था. उन्होंने बताया कि बाद में माली समाज के एक भोपा जी खेत में आराम कर रहे थे. इसी दौरान उन्हें दिव्य ऊर्जा का अनुभव हुआ. उन्हें महसूस हुआ कि जमीन के नीचे कुछ विशेष हो सकता है. इसके बाद जब खुदाई करवाई गई तो वहां से पंचमुखा हनुमान जी की प्रतिमा मिली. प्रतिमा मिलने के बाद यहां एक छोटा मंदिर बनाया गया, जहां श्रद्धालु पूजा-अर्चना करने लगे.
100 साल पहले बना निज मंदिरराहुल गहलोत के अनुसार, करीब 100 वर्ष पहले मीणा नाम के एक भक्त ने यहां निज मंदिर का निर्माण करवाया था. इसके बाद समय के साथ मंदिर में श्रद्धालुओं की आस्था बढ़ती गई. मंदिर की प्राचीनता और धार्मिक महत्व को देखते हुए इसके जीर्णोद्धार का कार्य करवाया गया. इस काम में युवाओं की टीम ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. इसके लिए पंचमुखा सेवा संस्थान नाम से युवाओं की एक टीम बनाई गई, जिसने मंदिर के विकास और धार्मिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने का कार्य किया. मंदिर में प्रवेश करते ही करीब 250 किलोग्राम वजन की गदा भी श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित करती है. यह गदा हनुमान जी के शौर्य, शक्ति और पराक्रम का प्रतीक मानी जाती है. मंदिर परिसर में महादेव जी का मंदिर भी है, जहां श्रद्धालु दर्शन करते हैं.
पांच मुखों में छिपा है विशेष धार्मिक महत्वपंचमुखा हनुमान जी के पांच मुखों का हिंदू धार्मिक परंपरा में विशेष महत्व बताया गया है. प्रचलित धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन पांच मुखों में हनुमान, नरसिंह, गरुड़, वराह और हयग्रीव के मुख शामिल हैं.
हनुमान मुख: शक्ति, भक्ति, साहस और समर्पण का प्रतीक माना जाता है.नरसिंह मुख: भय और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा तथा धर्म की विजय का प्रतीक है.गरुड़ मुख: सर्प बाधाओं और विष से रक्षा की मान्यता से जुड़ा है.वराह मुख: पृथ्वी की रक्षा, स्थिरता और संकटों से उबारने का प्रतीक माना जाता है.हयग्रीव मुख: ज्ञान, बुद्धि और विद्या से जुड़ा हुआ है.धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पंचमुखा हनुमान जी की उपासना से भक्तों को साहस, सुरक्षा, ज्ञान और संकटों से मुक्ति की प्रेरणा मिलती है.
About the Authorआनंद पाण्डेयContent Producer
आनंद पाण्डेय वर्तमान में हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अ…
Bikaner,Bikaner,Rajasthan
First Published :
October 27, 2026, 15:30 IST



