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Agriculture | Red Mooli | Kis Chij Ki Kheti Me Jyada Paisa Hai | माउंट आबू के ठंडे मौसम में होती है लाल मूली की खेती

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माउंट आबू के ठंडे मौसम में होती है लाल मूली की खेती, पर्यटकों को भी खूब भाता

Last Updated:October 30, 2026, 18:43 IST

Mound Abu Red Radish In Winter Season: राजस्थान के माउंट आबू के ठंडे मौसम में होने वाली लाल गोल मूली किसानों के लिए कमाई का जरिया बन रही है. स्वाद और सेहत से भरपूर यह मूली बाजार में सौ से डेढ़ सौ रुपए किलो बिक रही है और पर्यटकों को खूब भाता है. इसका रंग इसमें मौजूद एक तत्व की ज्यादा मात्रा की वजह से होता है , जो एक नेचुरल कारण है. यह पथरी को खत्म करने, गैस की समस्या नहीं होने और पाचन तंत्र को ठीक करने में भी काफी कारगर मानी जाती है.

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सिरोही. राजस्थान के एकमात्र हिल स्टेशन माउंट आबू का ठंडा मौसम सिर्फ पर्यटन के लिए ही नहीं, बल्कि खेती को भी अलग बनाता है. जिले में केवल माउंट आबू में सर्दियों में लाल मूली की फसल तैयार होकर बाजार में बिकने के लिए आती है. पर्यटक इस मूली को काफी पसंद करते है. इसका उपयोग चाट बनाने में किया जाता है.

माउंट आबू के ठंडे मौसम में कई तरह की सब्जियां उगाई जाती हैं. अब पारंपरिक सब्जियों के साथ यहां लाल गोल मूली की खेती भी किसानों के लिए कमाई का एक अच्छा ऑप्शन बन रही है. सर्दियों में इसकी डिमांड ज्यादा होती है. अपने खास लाल रंग, छोटे गोल आकार और स्वाद के कारण यह मूली बाजार में लोगों को पसंद आती है. इसके दाम भी सामान्य सफेद मूली के मुकाबले लगभग दोगुनी तक मिल जाते है.

स्वाद के सतह सेहत के लिए भी फायदेमंद स्थानीय किसान और व्यापारी मोहनसिंह ने बताया कि माउंट आबू में ओरिया और आत्मा में कुछ किसान लाल मूली की खेती करते हैं. इसका रंग इसमें मौजूद एक तत्व की ज्यादा मात्रा की वजह से होता है , जो एक नेचुरल कारण है. यह पथरी को खत्म करने, गैस की समस्या नहीं होने और पाचन तंत्र को ठीक करने में भी काफी कारगर मानी जाती है. माउंट आबू में ये मूली 100 से 150 रुपए किलोग्राम तक बिक रही है. माउंट आबू घूमने आने वाले पर्यटक इस लाल मूली और इससे बनने वाले चाट को काफी पसंद करते हैं.

लाल मूली की खेती के लिए ठंडा मौसम जरूरीइसकी खेती के लिए ठंडा मौसम सबसे अच्छा माना जाता है. इसके कंद यानी मूली की जड़ का अच्छा विकास 10 से 15.5 डिग्री सेल्सियस तापमान में होता है. मैदानी इलाकों में इसकी बुवाई सितंबर से नवंबर और जनवरी से फरवरी के बीच की जा सकती है, जबकि माउंट आबू जैसे ठंडे पहाड़ी इलाकों में मौसम के अनुसार मार्च से अगस्त तक भी इसकी खेती की जाती है. इसकी खेती के लिए ज्यादा पानी की जरूरत नहीं होती, लेकिन मिट्टी में लगातार हल्की नमी बनाए रखना जरूरी है. पानी की कमी से मूली फट सकती है, जबकि खेत में पानी जमा होने से जड़ें खराब होने का खतरा रहता है. इसकी खासियत यह है कि बुवाई के करीब 35 से 45 दिनों में फसल तैयार हो जाती है.

About the Authorआनंद पाण्डेयContent Producer

आनंद पाण्डेय वर्तमान में हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अ…

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Sirohi,Sirohi,Rajasthan

First Published :

October 30, 2026, 18:43 IST

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