सरकार ने सिंगल यूज मेडिकल डिवाइस के दोबारा इस्तेमाल पर लगाया रोक, एक बार इस्तेमाल हुआ, तो फेंकना ही होगा

Last Updated:October 27, 2026, 18:05 IST
Single Use Medical Devices Ban: अस्पताल में भर्ती के दौरान मरीजों में इस्तेमाल होने वाली कई ऐसी चीजों का दोबारा स्टेरलाइज कर दिया जाता है जो सिंगल यूज वाली है. अब सरकार ने इस पर सख्त कार्रवाई करने का फैसला किया है. सरकार ने अस्पतालों में एक बार इस्तेमाल होने वाले मेडिकल डिवाइस और डिस्पोजेबल सर्जिकल आइटम को स्टरलाइज कर दोबारा इस्तेमाल किए जाने पर गंभीर चिंता जताई है और इसे बैन लगाने की बात कही है.सिंगल यूज मेडिकल डिवाइसेज अब दोबारा इस्तेमाल नहीं होगा. Photo : AI
Single Use Medical devices Ban: अस्पतालों में इलाज के दौरान मरीजों के लिए कई डिवाइसेज का यूज किया जाता है. जैसे मरीजों ग्लूकोज आदि नसों में चढ़ाने के लिए कैथेटर का इस्तेमाल किया जाता है, जीभ को उठाने के लिए स्कैल्प का इस्तेमाल किया जाता है, सर्जरी के दौरान तो ऐसे सैकड़ों डिवाइसेज होते हैं जिनका इस्तेमाल किया जाता है. कभी-कभी इनमें से कुछ डिवाइसेज को गर्म पानी और कई सारे केमिकल के साथ ट्रीट करने के बाद दोबारा इस्तेमाल कर दिया जाता है. सरकार ने इस पर गंभीर चिंता जताई है. इससे अस्पतालों में अन्य लोगों में दूसरे तरह के इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है और यह मरीजों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है. इसलिए सरकार ने सिंगल यूज मेडिकल डिवाइसेज और सर्जिकल आइटम्स पर रोक लगाने का फैसला किया है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने देशभर के सभी सरकारी और निजी अस्पतालों में सिंगल यूज मेडिकल डिवाइस के दोबारा इस्तेमाल पर सख्त प्रतिबंध लगाने का ऐलान किया है.
सख्त कार्रवाई की जाएगी
स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय के महानिदेशक डॉ. लवनीश जी. कृष्णा ने 16 अक्टूबर 2026 को जारी किए अपने निर्देश में कहा है कि अस्पतालों में एक बार इस्तेमाल होने वाले मेडिकल डिवाइस और डिस्पोजेबल सर्जिकल आइटम को स्टरलाइज कर दोबारा इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है. खासकर हार्ट, कैंसर, किडनी, कार्डियोथोरेसिक एंड वैस्कुलर सर्जरी, ब्रेन की सर्जरी आदि में इन चीजों का इस्तेमाल बिल्कुल न किया जाए. निर्देश में कहा गया है कि सिंगल यूज डिवाइस का दोबारा इस्तेमाल मरीजों की सुरक्षा, इंफेक्शन की रोकथाम और स्वास्थ्य सेवाओं पर होने वाले खर्च के लिहाज से गंभीर मामला है. इनके दोबारा इस्तेमाल से क्रॉस इन्फेक्शन, उपकरणों में खराबी, उनकी कार्यक्षमता में कमी और सर्जरी से जुड़ी अन्य जटिलताओं का खतरा बहुत बढ़ जाता है. ऐसे में निर्देशों के उल्लंघन करने पर ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, मेडिकल डिवाइसेज रूल्स 2017, क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट्स एक्ट 2010 और अन्य लागू नियमों के तहत सख्त कार्रवाई हो सकती है.
सभी राज्यों को दिया गया निर्देश
इसका पालन करने के लिए महानिदेशालय ने सभी राज्यों को नोटिस जारी किया है. नोटिस में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य अधिकारियों, ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया और संबंधित ड्रग कंट्रोलरों को सख्त निगरानी और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिया गया है. नोटिस में अस्पतालों में औचक निरीक्षण और निगरानी के जरिए नियमों का पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है. यहां तक के सिंगल यूज मेडिकल डिवाइस और डिस्पोजेबल सर्जिकल आइटम के मूल निर्माता से भी कहा गया है कि इस नियम के हिसाब से ही डिवाइसेज बनाएं.
सख्ती से मरीजों की सुरक्षा बढ़ेगी
अक्सर देखा जाता है कि अस्पताल पैसा बचाने के चक्कर में इन सिंगल यूज डिस्पोजेबल डिवाइसेज को रीप्रोसेस कर लेते हैं और उनका दोबारा इस्तेमाल करते हैं. इससे न केवल क्रॉस-इन्फेक्शन का खतरा कई गुना बढ़ जाता है बल्कि यह मरीजों के मौलिक अधिकारों और जीवन की सुरक्षा का सीधा उल्लंघन भी है. अगर मामला हार्ट, न्यूरोसर्जरी, ऑन्कोलॉजी और नेफ्रोलॉजी जैसी जटिल गंभीर बीमारियों का हो तो वहां यह खतरा घातक भी सिद्ध हो सकता है. इस नए आदेश के बाद अब मैन्युफैक्चरर्स से लेकर अस्पतालों और जमीनी स्तर के स्वास्थ्य अधिकारियों की जवाबदेही तय कर दी गई है. औचक निरीक्षण और ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट जैसे कड़े कानूनों के तहत होने वाली दंडात्मक कार्रवाई से मरीजों के साथ खिलवाड़ नहीं हो सकेगा. एक्सपर्ट का मानना है कि इस नीति के प्रभावी क्रियान्वयन से देश के सरकारी और निजी दोनों ही क्षेत्रों में मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट सुधरेगा. इतना ही नहीं इससे बेसिक सुरक्षा मानकों का पालन भी सख्ती से होगा और आम जनता का आधुनिक मेडिकल सिस्टम पर भरोसा बढ़ेगा.
About the AuthorLakshmi Narayan
With 20 years of extensive experience in Hindi journalism, Lakshmi Narayan is a distinguished media professional and digital team leader at Network18, managing edit…
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October 27, 2026, 18:05 IST



