आउट ऑफ कंट्रोल बीपी वालों के लिए खुशखबरी, कान में फिट हो जाएगी एक मशीन और कंट्रोल हो जाएगा बीपी

Last Updated:October 27, 2026, 12:14 IST
Device Control BP: भारत में 22 करोड़ लोगों को हाई ब्लड प्रेशर है. इनमें से अधिकांश को रोज बीपी की दवाई खानी पड़ती है. अगर न खाएं तो तुरंत में बीपी अनकंट्रोल्ड होने लगता है. ऐसे में वैज्ञानिकों ने एक छोटी सी मशीन बनाई है जिसे कान में लगा लेने के बाद बीपी आउट ऑफ कंट्रोल नहीं होगा. इस मशीन को लेकर फिलहाल क्लीनिकल ट्रायल चल रहा है. शुरुआती संकेत अच्छे मिले हैं.बीपी को कम करेगी यह छोटी सी मशीन. Photo:AI
Small Device Control BP: भारत में इतने लोगों को हाई ब्लड प्रेशर की बीमारी है जिनकी गिनती भी नहीं की जा सकती क्योंकि ये कभी खुद बीपी चैक नहीं करते न ही किसी अस्पताल जाते हैं. ऐसे में अधिकांश आबादी ऐसी है जिन्हें बीपी तो है लेकिन उन्हें पता नहीं है. इसके बावजूद लिखित रूप से भारत में 22 करोड़ वयस्कों को हाई बीपी की बीमारी है. इसका मतलब हुआ कि भारत में हर चार में से एक वयस्क को हाइपरटेंशन है. इनमें से लाखों लोगों का बीपी तभी कंट्रोल में रहता है जब वह रोजाना दवा खाते हैं. किसी दिन गलती से मिस हो जाती है तो आफत आ जाती है. इस बात को समझते हुए वैज्ञानिकों ने एक छोटा सा डिवाइस तैयार किया है. यह डिवाइस कान के पास लगा दिया जाता जिससे बीपी कंट्रोल रह सकता है. क्लीनिकल ट्रायल का शुरुआत परिणाम उत्साहजनक आया है.
कैसे काम करता है यह डिवाइस
इस डिवाइस को क्वीन मैरी यूनिवर्सिटी लंदन के शोधकर्ताओं ने बनाया है. यह एक छोटा सा डिवाइस है. यह डिवाइस ट्रांसक्यूटनस ऑटोमिक न्यूरोमॉड्यूलेशन तकनीक पर काम करता है. यह डिवाइस हल्की इलेक्ट्रिकल पल्स पैदा करता है. जब इसे कान में लगाया जाता तो डिवाइस कान के उस हिस्से की नसों में बहुत हल्की और सुरक्षित विद्युत तरंगें भेजता है.कान के इस हिस्से में हमारे शरीर के ऑटोनॉमिक नर्वस सिस्टम से जुड़ी महत्वपूर्ण नसें होती हैं. यह नर्वस सिस्टम शरीर के उन कामों को संभालता है जो हमारे शरीर में अपने आप होते हैं. जैसे दिल की धड़कन और ब्लड प्रेशर का अनवरत चलना. जब ये हल्की विद्युत तरंगें कान की नसों के जरिए दिमाग और तंत्रिका तंत्र तक पहुंचती हैं, तो यह शरीर के बीपी कंट्रोल सिस्टम को रीसेट या उद्यीपीत करने में मदद करती हैं. इससे नसें शांत हो जाती हैं और ब्लड वैसल्स की दीवार में खून का प्रेशर धीरे-धीरे कम होने लगता है.
डिवाइस को कैसे लगाया जाता है
जैसे हम ईयरफोन पहनते हैं, ठीक वैसे ही यह छोटा सा क्लिप कान के बाहरी हिस्से ट्रैगस पर चुटकी की तरह लग जाता है. इसे हाथ से पकड़ा जा सकता है. इसमें दो छोटे क्लिप लगे होते हैं. इन क्लिप्स को कान के बाहरी हिस्से के उस छोटे से उभरे हुए हिस्से पर लगाया जाता है जिसे ट्रैगस कहते हैं. सरल शब्दों में कहें तो आपके कान के छिद्र के ठीक बाहर जो छोटा सा मांसल या कार्टिलेज वाला टुकड़ा होता है, जिसे हम अक्सर कान बंद करते समय दबाते हैं, वही ट्रैगस है. यह क्लिप बिल्कुल किसी कपड़े सुखाने वाले छोटे क्लिप या इयरफोन की तरह आसानी से कान के ट्रैगस पर चिपक जाता है. इसे मरीज बिना किसी डॉक्टर की मदद के खुद घर पर ही लगा सकते हैं.
63 मरीजों पर ट्रायल
क्वीन मैरी यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने इस डिवाइस का ट्रायल 63 मरीजों पर किया. इन लोगों का ब्लड प्रेशर बहुत हाई था और ये लोग रोज दवा खाते थे. इन मरीजों को दो समूहों में बांट दिया गया. एक समूह को एक्टिव इलेक्ट्रिकल स्टीमुलेशन दी गई जबकि दूसरे समूह को नकली डिवाइस दिए गए. दोनों समूहों की तुलना करने से शोधकर्ताओं को यह जांचने में मदद मिली कि क्या इस डिवाइस को पहनने के बाद वाकई बीपी में कोई अंतर आया है. पहले दो सप्ताह के दौरान प्रतिभागियों को इस डिवाइस को रोजाना आधा घंटा पहनने के लिए कहा गया. ऐसा अगले 10 सप्ताह तक करने के लिए कहा गया. अध्ययन के दौरान यह डिवाइस बेहद सुरक्षित पाया गया. यानी इससे किसी तरह का झटका या कोई दर्द महसूस नहीं हुआ. मरीज इसे बिना किसी परेशानी के आसानी से लगा पाए. अध्ययन में पाया गया कि जिन मरीजों का बीपी आउट ऑफ कंट्रोल रहता था, उनमें बहुत सुधार आया. क्वीन मैरी यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन में क्लिनिकल रीडर और चीफ इन्वेस्टिगेटर डॉ. अजय गुप्ता ने कहा कि यह एक रोमांचक डिवाइस है. इसे मरीजों ने बेहद आसानी से स्वीकार किया. यह तकनीक अंततः लाखों लोगों के लिए एक सस्ती और सुलभ समाधान प्रदान कर सकती है.
About the AuthorLakshmi Narayan
With 20 years of extensive experience in Hindi journalism, Lakshmi Narayan is a distinguished media professional and digital team leader at Network18, managing edit…
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October 27, 2026, 12:14 IST



