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रोज खाते हैं पैकेटबंद खाना और लेते हैं कम नींद, तो बढ़ सकता है ब्रेन स्ट्रोक का जोखिम

फरीदाबाद: दिल्ली-NCR में बढ़ता प्रदूषण सिर्फ सांस की बीमारियों का ही नहीं, बल्कि ब्रेन स्ट्रोक का खतरा भी बढ़ा सकता है. कम उम्र में भी स्ट्रोक के मामले सामने आ रहे हैं. ऐसे में खराब लाइफस्टाइल, कम नींद और पैकेटबंद खाना भी परेशानी बढ़ा सकते हैं. इन खतरों को समझने और बचाव के तरीके जानने के लिए लोकल18 ने अमृता हॉस्पिटल, फरीदाबाद के न्यूरोलॉजी विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. दीपक यादव से बातचीत की.

प्रदूषण से कैसे बढ़ता है स्ट्रोक का खतरा?

डॉ. दीपक यादव बताते हैं कि एम्स की एक हालिया स्टडी के अनुसार, PM2.5 जैसे बेहद छोटे प्रदूषणकारी कण स्ट्रोक का खतरा बढ़ा सकते हैं. ये कण बाल की मोटाई से लगभग 30 गुना छोटे होते हैं. इनके संपर्क में आने से रक्त वाहिकाओं के अंदर सूजन बढ़ सकती है, जिससे खून के थक्के बनने और स्ट्रोक होने की आशंका बढ़ जाती है. इसलिए प्रदूषण अधिक होने पर बाहर निकलते समय N95 मास्क पहनना और जरूरी सावधानियां बरतना चाहिए.

कम उम्र में क्यों बढ़ रहे हैं स्ट्रोक के मामले?

डॉक्टर दीपक बताते हैं कि आजकल युवाओं में स्ट्रोक के मामले बढ़ रहे हैं. साल 2020 से 2022 के बीच नेशनल हॉस्पिटल रजिस्ट्री के आंकड़ों में 34 हजार से अधिक मामलों में करीब 13 प्रतिशत मरीज युवा थे. शारीरिक गतिविधियों की कमी, हाई ब्लड प्रेशर, इंसुलिन रेजिस्टेंस, डायबिटीज और परिवार में बीमारी का इतिहास इसका खतरा बढ़ा सकते हैं.

पैकेटबंद खाना भी बन सकता है वजह

डॉ. दीपक बताते हैं कि अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड और स्ट्रोक के बीच संबंध पाया गया है. ऐसे खाद्य पदार्थों में अधिक नमक, चीनी और अस्वास्थ्यकर वसा हो सकती है. इनका ज्यादा सेवन मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज का खतरा बढ़ाता है, जिससे स्ट्रोक की आशंका भी बढ़ सकती है.

कम नींद और खर्राटों को न करें नजरअंदाज

डॉ. दीपक बताते हैं कि जरूरत से कम या बहुत ज्यादा सोना, दोनों ही स्ट्रोक के खतरे से जुड़े हो सकते हैं. ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया में सोते समय तेज खर्राटे आते हैं या सांस बार-बार रुकती है. इससे शरीर में ऑक्सीजन का स्तर प्रभावित हो सकता है. ऐसी परेशानी होने पर डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए.

इन लक्षणों को पहचानकर तुरंत पहुंचें अस्पताल

डॉ. दीपक बताते हैं कि अचानक बोलने में परेशानी, नजर कमजोर होना, मुंह टेढ़ा होना, हाथ-पैर में कमजोरी आना या जुबान लड़खड़ाना स्ट्रोक के संकेत हो सकते हैं. ऐसे लक्षण दिखने पर मरीज को तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाना चाहिए. समय पर इलाज मिलने से गंभीर नुकसान का खतरा कम किया जा सकता है.

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