Rajasthan

माउंट आबू का बदलेगा इंफ्रास्ट्रक्चर, 225 करोड़ से बनेगी नई सड़क, सफर हो जाएगा आसान

जयपुर. राजस्थान के एकमात्र हिल स्टेशन माउंट आबू के इंफ्रास्ट्रक्चर को नई मजबूती देने की तैयारी है. गुलाबगंज से माउंट आबू तक 22 किलोमीटर लंबी नई सड़क परियोजना का अलाइनमेंट मंजूर हो गया है. करीब 225 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह मार्ग न केवल सिरोही से माउंट आबू की दूरी घटाएगा, बल्कि पर्यटन नगरी को वैकल्पिक सड़क कनेक्टिविटी भी उपलब्ध कराएगा. अभी सिरोही से माउंट आबू पहुंचने में करीब 100 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है, जो नई सड़क बनने के बाद घटकर लगभग 55 किलोमीटर रह जाएगा. करीब 45 किलोमीटर की दूरी कम होने से स्थानीय आवागमन, पर्यटन और व्यापार को फायदा मिलने की उम्मीद है. पांच दशक से प्रस्तावित इस इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट ने तकनीकी मंजूरी का महत्वपूर्ण पड़ाव पार कर लिया है. अब वन विभाग की एनओसी और पर्यावरण संबंधी स्वीकृतियों का इंतजार है.

तीन अलाइनमेंट का हुआ सर्वे

इस इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट की डीपीआर तैयार करने के लिए पहले भौगोलिक सर्वे कराया गया. इसके बाद कंसल्टेंसी फर्म ने तीन संभावित अलाइनमेंट तैयार कर सार्वजनिक निर्माण विभाग को सौंपे. राज्यस्तरीय तकनीकी कमेटी ने परीक्षण के बाद पहले से मौजूद ग्रेवल सड़क वाले अलाइनमेंट को सबसे उपयुक्त माना. अब इसी मार्ग के आधार पर आगे की प्रक्रिया बढ़ाई जाएगी. जयपुर की कंसल्टेंसी फर्म को स्वीकृत अलाइनमेंट के लिए वन विभाग के निर्धारित प्रारूप में आवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं. डीपीआर तैयार करने पर करीब एक करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं. परियोजना की प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति भी जारी हो चुकी है.

वन विभाग की मंजूरी के बिना आगे नहीं बढ़ेगा निर्माण

सड़क का प्रस्तावित मार्ग वन्य अभयारण्य क्षेत्र से होकर गुजरता है. इसलिए इस प्रोजेक्ट में सबसे बड़ी चुनौती वन एवं पर्यावरण संबंधी स्वीकृतियां हासिल करना है. राज्य वन विभाग से एनओसी मिलने के बाद प्रस्ताव केंद्र सरकार के वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को भेजा जाएगा. इसके बाद राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी), नई दिल्ली के समक्ष आवश्यक अनुमति की प्रक्रिया पूरी करनी होगी.

50 साल पुरानी मांग को मिला 225 करोड़ का बजट

बताया जा रहा है कि इस वैकल्पिक सड़क की मांग करीब पांच दशक से उठाई जा रही थी. क्षेत्रीय सांसद लुंबाराम चौधरी ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के साथ केंद्र सरकार के समक्ष इस सड़क की आवश्यकता रखी थी. इसके बाद केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने केंद्रीय सड़क निधि से 225 करोड़ रुपये आवंटित किए.

पर्यटन से लेकर वायुसेना स्टेशन तक बेहतर होगी कनेक्टिविटी

यह सड़क दिल्ली-कांडला फोरलेन से जुड़कर माउंट आबू को राष्ट्रीय राजमार्ग-162 से बेहतर संपर्क उपलब्ध कराएगी. मौजूदा आबूरोड-माउंट आबू मार्ग पर यातायात का दबाव रहता है. पहाड़ी चट्टानों और गहरी खाइयों के कारण इसका चौड़ीकरण भी आसान नहीं है. बारिश के दौरान चट्टानें गिरने और भूस्खलन से रास्ता बंद होने पर माउंट आबू का संपर्क प्रभावित होता है. ऐसे में नई सड़क बनने से माउंट आबू के सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर को वैकल्पिक आधार मिलेगा. पर्यटकों, स्थानीय निवासियों, व्यापारियों के साथ माउंट आबू स्थित वायुसेना स्टेशन के लिए भी आवागमन सुगम होने की उम्मीद है. अब इस महत्वाकांक्षी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट की अगली राह वन विभाग की एनओसी और जरूरी पर्यावरणीय मंजूरियों से होकर गुजरेगी.

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