Rajasthan

काछबली की महिलाओं ने बदली गांव की तस्वीर; 10 साल पहले वोटिंग से कराई थी शराबबंदी, अब युवा पा रहे सरकारी नौकरियां

Last Updated:November 02, 2026, 08:50 IST

Kachbali Liquor Ban Model Rajsamand: राजसमंद की काछबली पंचायत में 10 साल पहले अवैध शराब के खिलाफ महिलाओं ने आंदोलन शुरू किया था. मार्च 2016 में हुए जनमत संग्रह में 95 फीसदी ग्रामीणों ने शराबबंदी के पक्ष में वोट देकर इतिहास रचा. इसके बाद काछबली राजस्थान की पहली नशामुक्त पंचायत बनी. काछबली से प्रेरित होकर मंडावर, थानेटा, बरार और हामेला पंचायतों में भी शराबबंदी लागू हुई. निगरानी व्यवस्था और शिक्षा के प्रति बढ़ी जागरूकता के चलते बीते 10 सालों में इन पंचायतों के 50 से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी मिली है.

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Kachbali: 10 साल पहले वोटिंग से बंद कराई थी शराब, अब बदली गांव की सूरतZoomKachbali Prohibition Model: 10 साल पहले वोटिंग से बंद कराई थी शराब, अब बदली गांव की सूरत

राजसमंद: राजस्थान के राजसमंद जिले की भीम-देवगढ़ तहसील की काछबली ग्राम पंचायत का माहौल करीब दस साल पहले एकदम अलग हुआ करता था. गांव की हर गली में अवैध शराब बिकती थी, जिससे घरेलू हिंसा, अपराध और युवा पीढ़ी का भविष्य बर्बाद हो रहा था. इस बदहाली को दूर करने के लिए तत्कालीन सरपंच गीता रावत और जिला परिषद सदस्य हीरा कंवर की अगुवाई में गांव की महिलाओं ने एकजुट होकर मोर्चा संभाला. महिलाओं के इस जोरदार आंदोलन ने पूरे क्षेत्र में नशामुक्त समाज की अलख जगा दी.

महिलाओं के लगातार संघर्ष का नतीजा यह हुआ कि आबकारी विभाग को शराबबंदी के लिए मतदान (जनमत संग्रह) कराना पड़ा. मार्च 2016 में हुए ऐतिहासिक मतदान में काछबली के करीब 95 प्रतिशत ग्रामीणों ने शराबबंदी के पक्ष में वोट दिया. इसके बाद काछबली राजस्थान की पहली ऐसी पंचायत बनी, जहां वोटिंग के जरिए शराब का ठेका हमेशा के लिए बंद करवा दिया गया. शराबबंदी लागू होने के बाद भी महिलाओं ने ढील नहीं दी और गांव में अवैध बिक्री रोकने के लिए खुद निगरानी दल बनाए.

चुनाव में प्रत्याशियों को लेना पड़ता है नशामुक्त पंचायत का संकल्पकाछबली में शराबबंदी लागू करना जितना कठिन था, उसे पिछले 10 सालों से कायम रखना उससे भी बड़ा टास्क था. ग्रामीणों ने इसे पूरे गांव की साझा जिम्मेदारी बना लिया. आज आलम यह है कि काछबली में सरपंच का चुनाव लड़ने वाले हर प्रत्याशी को पहले यह संकल्प लेना पड़ता है कि वह जीतने के बाद भी शराबबंदी को पूरी सख्ती से लागू रखेगा. तत्कालीन सरपंच गीता रावत के अनुसार, गांव के लोग और महिलाएं आज भी हर मोहल्ले पर मुस्तैदी से नजर रखते हैं.

आसपास की 4 पंचायतों में भी लागू हुई शराबबंदी, 50 से अधिक युवाओं को मिली नौकरीकाछबली की इस मिसाल से प्रेरित होकर आसपास की चार अन्य पंचायतों में भी शराबबंदी का आंदोलन फैला. मंडावर में 2018 में 95% वोट से शराबबंदी लागू हुई, थानेटा में 2021 में 95% समर्थन मिला, जबकि बरार और हामेला पंचायतों में 2020 से शराबबंदी लागू है. इन गांवों में हर सदस्य अपने मोहल्ले के 20 घरों की निगरानी करता है. शराबबंदी के बाद से अपराधों में भारी कमी आई है और शिक्षा का माहौल बना है, जिसके चलते बीते 10 सालों में इन पंचायतों के 50 से अधिक युवाओं ने सरकारी नौकरियां हासिल की हैं.

About the Authorvicky Rathore

Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…

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Rajsamand,Rajsamand,Rajasthan

First Published :

November 02, 2026, 08:50 IST

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