Dholpur News: दुनियाभर में 2 हजार से भी कम बचे इंडियन स्कीमर की चंबल में वापसी, रेतीले टापुओं पर फिर जमाया डेरा

Last Updated:November 03, 2026, 16:56 IST
Dholpur News: धौलपुर की चंबल नदी में दुर्लभ इंडियन स्कीमर पक्षियों की एक बार फिर वापसी हो गई है. दुनिया में 2 हजार से भी कम संख्या में बचे इन पक्षियों ने नदी के रेतीले टापुओं पर डेरा जमाना शुरू कर दिया है. दुनिया की करीब 80 फीसदी इंडियन स्कीमर हर साल चंबल में प्रवास के लिए पहुंचती हैं. अब चंबल सफारी में पर्यटक इन खूबसूरत पक्षियों का दीदार कर सकेंगे.
धौलपुर. जिले की पहचान बन चुकी दुर्लभ इंडियन स्कीमर पक्षियों की चंबल नदी में एक बार फिर वापसी हो गई है. बारिश की आहट के साथ जून में चंबल छोड़कर गईं ये पक्षियां इस बार नवंबर की शुरुआत में ही लौट आई हैं. अक्टूबर-नवंबर में चंबल पहुंचने वाली इन पक्षियों ने नदी के बीच बने रेतीले टापुओं पर अपना ठिकाना बनाना शुरू कर दिया है. अब चंबल सफारी के दौरान पर्यटक इन खूबसूरत और दुर्लभ पक्षियों को करीब से देख सकेंगे. इंडियन स्कीमर को चंबल का मोती भी कहा जाता है, इन्हें स्थानीय भाषा में पनचीरा नाम से भी जाना जाता है. इसकी खासियत है कि यह पानी की सतह को अपनी चोंच से चीरते हुए मछलियों का शिकार करती है. दुनियाभर में इनकी संख्या 2 हजार से भी कम बची है. ऐसे में चंबल नदी इन दुर्लभ पक्षियों के लिए सबसे खास ठिकाना बन गई है. चंबल नदी दुनिया की ऐसी खास नदियों में शामिल है, जहां हर साल दुनियाभर की करीब 80 फीसदी इंडियन स्कीमर पक्षियां प्रवास के लिए पहुंचती हैं.
भारतीय मूल की ये पक्षियां पाकिस्तान, बांग्लादेश और म्यांमार में भी पाई जाती हैं. इनकी घटती संख्या को देखते हुए इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर ने इन्हें अपनी रेड लिस्ट में शामिल किया है. वाइल्ड लाइफ विभाग और बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी भी इनके संरक्षण के लिए काम कर रही हैं. पक्षी प्रेमी राजीव तोमर बताते हैं कि इंडियन स्कीमर नदियों के बीच बने रेतीले टापुओं पर घोंसले बनाकर अंडे देती हैं. मार्च से जून तक इनका प्रजनन काल होता है. चंबल का साफ पानी और मछलियों की उपलब्धता इन्हें यहां आने के लिए आकर्षित करती है. हालांकि, चंबल के ईको सिस्टम में बदलाव, अवैध खनन और रेत के टापुओं पर जंगली जानवरों व आवारा कुत्तों की बढ़ती आवाजाही इनके लिए खतरा बनती है.
इस बार चंबल में अवैध बजरी खनन बंद होने से पक्षियों को राहत मिलने की उम्मीद है. इससे टापुओं पर शोर और मानवीय गतिविधियां कम होंगी. चंबल सेंचुरी के डीएफओ विष्णु पाटिल तेजस ने बताया कि इंडियन स्कीमर के लिए नदी के रेतीले टापू सबसे पसंदीदा जगह हैं. पिछले साल भी विभाग ने टापुओं पर फेंसिंग और तारबंदी कर इनके घोंसलों को सुरक्षित किया था, इससे अंडे नष्ट होने से बचे और अच्छी संख्या में चूजे बड़े हुए. धौलपुर जिले में राजघाट, अंडवा पुरैनी, डांग बसई और मौरौली सहित चंबल के कई क्षेत्रों में इन पक्षियों की विशेष निगरानी की जाती है. अब इनकी वापसी के साथ ही वन विभाग ने इनके सुरक्षित प्रवास और प्रजनन की तैयारियां शुरू कर दी हैं.
About the Authorमोनाली पाल
नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…
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Dhaulpur,Rajasthan
First Published :
November 03, 2026, 16:56 IST



