करौली में अनोखी दिवाली, नरक चतुर्दशी पर मनाई जाती है ‘कुत्तों की दिवाली’, घर-घर जलते हैं चौमुखे दीप, जानें कारण

Last Updated:November 07, 2026, 18:29 IST
Narak Chaturdashi 2026: इस परंपरा की सबसे खास बात आटे से बनाया जाने वाला चौमुखा दीप है. महिलाएं इसे विशेष रूप से तैयार करती हैं. और छोटी दिवाली की रात इसे घर के बाहर जलाती हैं. कई परिवार इस दीप को कुत्तों के नाम समर्पित करते हैं. दीप जलाने के साथ कुत्तों को भोजन कराना भी इस परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है.
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करौली में मनाई जाती है ‘कुत्तों की दिवाली’
करौली. दीपावली का त्योहार देशभर में अलग-अलग परंपराओं और मान्यताओं के साथ मनाया जाता है. कहीं नरक चतुर्दशी पर भगवान कृष्ण की पूजा होती है तो कहीं यमराज को दीपदान करने की परंपरा निभाई जाती है. लेकिन राजस्थान के करौली में छोटी दिवाली का स्वरूप ही कुछ अलग है. यहां इस दिन कुत्तों के नाम दीप जलाने और उनका पूजन करने की अनूठी परंपरा निभाई जाती है. इसी वजह से करौली में छोटी दिवाली को स्थानीय स्तर पर ‘कुत्तों की दिवाली’ भी कहा जाता है.
छोटी दिवाली की रात करौली के कई घरों में महिलाएं आटे से चौमुखा दीपक तैयार करती हैं. इस दीपक को घर के बाहर जलाकर कुत्तों के नाम समर्पित किया जाता है. इसके साथ ही कुत्तों को मिठाई और भोजन खिलाने की परंपरा भी निभाई जाती है. मान्यता है कि इस दीप के जरिए यमदूतों के लिए मार्ग प्रकाशित होता है और यमराज की कृपा प्राप्त होती है.
सुरक्षा और सुख-समृद्धि बनी रहतीस्थानीय ज्योतिषाचार्य एवं कर्मकांडी पंडित मनीष उपाध्याय के अनुसार, करौली में यह परंपरा लंबे समय से चली आ रही है और इसके पीछे धार्मिक मान्यता जुड़ी हुई है. हिंदू मान्यताओं में कुत्ते का संबंध यमराज से माना गया है. ऐसी मान्यता है कि छोटी दिवाली पर कुत्तों का पूजन करने और उन्हें भोजन कराने से यमराज प्रसन्न होते हैं तथा परिवार की सुरक्षा और सुख-समृद्धि बनी रहती है.
घर के बाहर जलता है खास चौमुखा दीपइस परंपरा की सबसे खास बात आटे से बनाया जाने वाला चौमुखा दीप है. महिलाएं इसे विशेष रूप से तैयार करती हैं. और छोटी दिवाली की रात इसे घर के बाहर जलाती हैं. कई परिवार इस दीप को कुत्तों के नाम समर्पित करते हैं. दीप जलाने के साथ कुत्तों को भोजन कराना भी इस परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है.
गलियों में नजर आता है अनोखा नजारा छोटी दिवाली की रात करौली की गलियों में जब अलग-अलग घरों के बाहर दीपक जलते हैं तो माहौल बेहद खास हो जाता है.एक ओर घरों में दीपावली की तैयारियां चलती हैं, वहीं दूसरी ओर कुत्तों के लिए जलाए गए दीपक इस पर्व को अलग पहचान देते हैं. परंपरा को निभाने वाले परिवारों का मानना है कि यह केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि जीवों के प्रति दया, प्रेम का भी संदेश है.
About the AuthorJagriti Dubey
मेरा नाम जागृति दुबे है. मीडिया और डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया में पिछले 6 वर्षों से सक्रिय हूं. पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को मैंने वर्ष 2019 में GBN 24 न्यूज़ चैनल से इंटर्नशिप के साथ शुरुआत देकर एक पेशेव…
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Karauli,Rajasthan
First Published :
November 07, 2026, 18:29 IST



