Agniveer News | हर दूसरे घर में सैनिक, 25000 युवा कर रहे तैयारी; अग्निवीरों का सेवाकाल बढ़ने पर झुंझुनूं में क्यों है उत्साह?

झुंझुनूं. शेखावाटी की धरती का सेना से गहरा रिश्ता रहा है. यहां की पीढ़ियों ने देश की सीमाओं की रक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित किया है. गांव-गांव में सैनिक परिवार हैं तो युवाओं के मन में भी सेना की वर्दी पहनने का सपना है. ऐसे में अग्निवीरों का सेवाकाल चार साल से बढ़ाकर छह साल करने के फैसले ने जिले के युवाओं में नई उम्मीद जगाई है. पूर्व सैनिकों से लेकर सेना भर्ती की तैयारी कर रहे युवाओं तक ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है. उनका कहना है कि दो साल अतिरिक्त सेवा का अवसर मिलने से अग्निवीरों को सेना में काम करने और अनुभव हासिल करने के लिए अधिक समय मिलेगा.
पूर्व सैनिक हवलदार अनिल कुमार ने बताया कि अग्निवीरों का कार्यकाल चार से बढ़ाकर छह साल करना तैयारी कर रहे युवाओं के लिए अच्छा अवसर है. पहले चार साल बाद सेवा छोड़ने की स्थिति बनती थी, लेकिन अब दो साल अतिरिक्त सेना में रहने का मौका मिलेगा. उन्होंने कहा कि झुंझुनूं सैनिकों की नगरी है. यहां हर दूसरे घर में सैनिक है. सेना में भर्ती होने वाले युवाओं में जिस तरह देशसेवा का जज्बा रहता है, वही जुनून अग्निवीरों में भी दिखाई देता है.
दो साल से तैयारी, फैसले से बढ़ा हौसलाचिराना निवासी हंसराज पिछले दो साल से झुंझुनूं में रहकर सेना भर्ती की तैयारी कर रहे हैं. उनका कहना है कि अग्निवीरों का कार्यकाल बढ़ाने का फैसला युवाओं के लिए अच्छा है. इससे सेना में सेवा देने का अवसर और लंबा होगा. वहीं, निराधनु निवासी सुशील भी पिछले दो साल से झुंझुनूं में रहकर आर्मी की तैयारी कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि सरकार का यह फैसला युवाओं का उत्साह बढ़ाने वाला है. इससे उन्हें और मेहनत करने की प्रेरणा मिलेगी.
पूर्व सैनिक शिक्षक संघ ने भी सराहा फैसलाप्रांतीय अध्यक्ष, गौरव सेनानी शिक्षक संघ झुंझुनूं, राजपाल फोगाट ने कहा कि सरकार ने अग्निवीरों का सेवाकाल दो साल बढ़ाकर अच्छा निर्णय लिया है. 14 जून 2022 को अग्निपथ योजना की शुरुआत हुई थी. इसके तहत चार साल की सेवा के बाद 25 प्रतिशत अग्निवीरों को नियमित सेना में शामिल करने का प्रावधान किया गया था. अब छह साल तक सेवा का अवसर मिलने से अग्निवीरों को सैन्य जीवन का अधिक अनुभव मिल सकेगा. उन्होंने इसे युवाओं और सैनिकों के हित में उठाया गया कदम बताया.
शहादत और शौर्य की मिसाल है झुंझुनूंझुंझुनूं की पहचान केवल सैनिकों की संख्या से नहीं, बल्कि देश के लिए दिए गए बलिदान से भी है. भारत-पाकिस्तान के बीच 1971 का युद्ध महज 13 दिन चला था. इस युद्ध में देश के करीब 3900 जवान शहीद हुए थे. शेखावाटी के 168 जवानों ने भी मातृभूमि की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया. इनमें झुंझुनूं के 108, सीकर के 46 और चूरू के 12 जवान शामिल थे. जिले की सैन्य परंपरा को हवलदार मेजर पीरू सिंह जैसे वीरों ने नई पहचान दी. परमवीर चक्र विजेता पीरू सिंह की वीरता आज भी युवाओं के लिए प्रेरणा है. जिले के गांवों में शहीदों की प्रतिमाएं इस बात की गवाही देती हैं कि यहां की मिट्टी ने देश की रक्षा के लिए कितने वीर सपूत दिए हैं.
वीरता पुरस्कारों में भी जिले का नामझुंझुनूं के सैनिकों ने अलग-अलग सैन्य अभियानों में अदम्य साहस का परिचय देकर कई वीरता सम्मान हासिल किए हैं. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, जिले के वीरों को 4 कीर्ति चक्र, 23 वीर चक्र, 10 शौर्य चक्र, 23 सेना मेडल, 2 नौसेना मेडल और 14 मेंशन इन डिस्पैच सम्मान मिले हैं.
25 हजार युवा कर रहे सेना में जाने की तैयारीजिले में सेना के प्रति युवाओं का आकर्षण आज भी बरकरार है. करीब 25 हजार युवा तीनों सेनाओं में भर्ती होने के लिए तैयारी कर रहे हैं. इनके लिए जिले में 24 से अधिक डिफेंस एकेडमियां संचालित हैं. सैनिकों और उनके परिवारों की सुविधाओं के लिए सैनिक विश्राम गृह, ईसीएचएस पॉलीक्लिनिक और झुंझुनूं, चिड़ावा व गुढ़ागौड़जी में कैंटीन संचालित हैं. शहीदों के बच्चों की शिक्षा और देखभाल के लिए सांझी छत हॉस्टल भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है.
यह है अग्निवीर योजना में बदलावअग्निपथ योजना के तहत पहले अग्निवीरों का सेवाकाल चार साल निर्धारित था. चार साल की सेवा पूरी होने पर 25 प्रतिशत अग्निवीरों को मेरिट और निर्धारित चयन प्रक्रिया के आधार पर नियमित सेना में शामिल करने का प्रावधान था, जबकि शेष 75 प्रतिशत को सेवा से मुक्त किया जाता था. अब घोषित बदलाव के अनुसार, अग्निवीरों को छह साल तक सेवा का अवसर मिलेगा. शेष 75 प्रतिशत अग्निवीरों को उनकी सहमति से दो साल अतिरिक्त सेवा का मौका दिया जाएगा. इस दौरान उन्हें निर्धारित वेतन और भत्ते भी मिलेंगे. छह साल बाद नियमित सेवा में जाने के इच्छुक अग्निवीरों को चयन प्रक्रिया से गुजरना होगा.



