Agriculture: बारिश कम हुई तो कौन सी फसल किसानों के काम आएगी? काजरी की मोठ किस्में किसानों के लिए वरदान

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बारिश कम हुई तो कौन सी फसल किसानों के काम आएगी? काजरी की मोठ किस्में वरदान
Last Updated:October 08, 2026, 18:03 IST
CAZRI Moth Bean Varieties Agriculture: जोधपुर में कम बारिश के बीच काजरी की उन्नत मोठ किस्में मोठ-6 और मोठ-7 किसानों के लिए उम्मीद की किरण बनी हैं. ये कम समय में पकती हैं और मौसम के जोखिम से बचाती हैं. किसानों को मौसम पूर्वानुमान और खेत में उपलब्ध नमी की स्थिति को ध्यान में रखते हुए फसल का चयन करना चाहिए, ताकि कम बारिश की स्थिति में भी उत्पादन को बनाए रखा जा सके.
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जोधपुर. कम बारिश और लगातार बढ़ते शुष्क अंतराल के बीच जहां किसानों के सामने खरीफ फसल को लेकर चिंता बढ़ रही है, वहीं काजरी की उन्नत मोठ की किस्में उम्मीद की नई किरण बनकर सामने आई हैं. इन किस्मों में देसी मोठ की तुलना में जल्दी फूल आने के साथ ही कम समय में फसल पकने की क्षमता देखने को मिली है. इससे कम बारिश वाले पश्चिमी राजस्थान के क्षेत्रों में किसानों को मौसम के जोखिम से बचने में मदद मिल सकती है.
केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान यानी काजरी में फील्ड हार्वेस्ट डे एवं किसान-वैज्ञानिक संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया. कार्यक्रम के दौरान खेत में मोठ-6 और मोठ-7 की फसल की कटाई कर किसानों के सामने उपज का प्रत्यक्ष प्रदर्शन किया गया. वैज्ञानिकों ने किसानों को इन उन्नत किस्मों की विशेषताओं के बारे में जानकारी दी. कार्यक्रम का उद्देश्य कम बारिश और बदलते मौसम के बीच ऐसी फसल तकनीकों को किसानों तक पहुंचाना रहा, जिनके माध्यम से उपलब्ध नमी का बेहतर उपयोग करते हुए फसल उत्पादन किया जा सके. किसानों को वैज्ञानिक खेती और मौसम आधारित फसल प्रबंधन अपनाने पर भी जोर दिया गया.
पांच साल में 500 मिमी से घटकर इस साल 220 मिमी बारिशकाजरी निदेशक डॉ. एचएस जाट ने बताया कि इस वर्ष क्षेत्र में करीब 220 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई है, जबकि पिछले पांच वर्षों में औसत बारिश करीब 500 मिलीमीटर तक रही है. इसके अलावा इस बार करीब 30 से 35 दिन का लंबा शुष्क अंतराल भी रहा. ऐसे मौसम में फसल की बुवाई से लेकर उसके विकास और पकने तक उपलब्ध नमी का सही उपयोग करना बेहद जरूरी हो जाता है. उन्होंने कहा कि किसानों को मौसम पूर्वानुमान और खेत में उपलब्ध नमी की स्थिति को ध्यान में रखते हुए फसल का चयन करना चाहिए, ताकि कम बारिश की स्थिति में भी उत्पादन को बनाए रखा जा सके.
बारिश के अनुसार बाजरा, मोठ और ग्वार को फसल सिस्टम में करें शामिलवैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी कि क्षेत्र में बारिश की स्थिति के अनुसार बाजरा, मोठ और ग्वार जैसी फसलों को फसल प्रणाली में शामिल किया जाए. साथ ही फसल चक्र अपनाने पर भी जोर दिया गया, जिससे मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और मौसम के जोखिम को कम करने में मदद मिल सके. काजरी की उन्नत मोठ जैसी कम अवधि में तैयार होने वाली किस्में विशेष रूप से उन क्षेत्रों के लिए उपयोगी साबित हो सकती हैं, जहां बारिश सीमित रहती है और बीच में लंबे समय तक सूखा पड़ जाता है. वैज्ञानिकों के मुताबिक बदलती जलवायु के दौर में कम पानी में उत्पादन देने वाली फसलों, उन्नत किस्मों और वैज्ञानिक खेती की तकनीकों को अपनाना किसानों की आय और उत्पादन को स्थिर रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है.
About the Authorआनंद पाण्डेयContent Producer
आनंद पाण्डेय वर्तमान में हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अ…
Jodhpur,Jodhpur,Rajasthan
First Published :
October 08, 2026, 18:03 IST



