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Agriculture News: राजस्थान में बरसे बादल बने किसानों के लिए आफत! सरसों-चना की फसलें बर्बादी के कगार पर

Last Updated:October 29, 2025, 13:01 IST

Agriculture News : राजस्थान में पिछले कुछ दिनों से हो रही बेमौसम बारिश ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. सरसों और चने की बुवाई के बीच हुई इस बारिश से कई जगह फसलों को नुकसान पहुंचा है. जहां कुछ किसानों को नमी का फायदा मिलेगा, वहीं कई को बीज खराब होने और दोबारा बुवाई का आर्थिक भार झेलना पड़ सकता है.एग्रीकल्चर न्यूज

सीकर : राजस्थान के कई हिस्सों में पिछले दो तीन से बेमौसम बारिश हो रही है. इसका प्रभाव आम जनजीवन के साथ साथ कृषि पर भी दिखाई देने लगा है. इस बारिश ने जहां कुछ इलाकों में फसलों के लिए राहत दी है, वहीं कई जगहों पर किसानों के लिए यह नुकसानदेह साबित हो सकती है. खासकर सरसों और चने की बुवाई के इस सीजन में अचानक हुई बारिश से फसलें प्रभावित हुई हैं. एग्रीकल्चर एक्सपर्ट दिनेश जाखड़ ने बताया कि अभी हो रही बारिश किसानों को आर्थिक रूप से नुकसान पहुंचा रही है.

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वर्तमान समय में प्रदेश के ज्यादातर क्षेत्रों में सरसों और चने की बुवाई का दौर चल रहा है. इससे कई किसानों ने सरसों की बुवाई पहले ही पूरी कर ली है, जबकि कुछ जगहों पर बुवाई की शुरुआत हुई थी. बारिश के कारण जहां पहले बोई गई सरसों को लाभ मिलेगा, वहीं हाल ही में बोई गई सरसों के बीज खराब हो सकते हैं. इससे किसानों को दोबारा बुवाई करनी पड़ सकती है, जो उनके लिए अतिरिक्त आर्थिक बोझ बनेगा. इसके अलावा जिन किसानों ने खरपतवार को खत्म करने की दवा दी थी वो भी अब वापस देनी होगी.

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एग्रीकल्चर एक्सपर्ट दिनेश जाखड़ ने बताया कि जिन किसानों ने करीब दस दिन पहले सरसों की बुवाई कर दी थी, उनकी फसल को इस बारिश से फायदा मिल सकता है, क्योंकि इससे खेतों में आवश्यक नमी बनी रहेगी. लेकिन जिन किसानों ने पिछले पांच-छह दिनों में बुवाई की है, उनकी फसल को नुकसान होने की संभावना है. इन बीजों के अंकुरण पर असर पड़ेगा और फसल उग नहीं पाएगी, जिससे दोबारा बुवाई करनी पड़ेगी.

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एग्रीकल्चर एक्सपर्ट के अनुसार किसान बुवाई के समय बीज महंगे दामों पर खरीदते हैं, क्योंकि इस मौसम में बीज की मांग अधिक रहती है. ऐसे में यदि बीज खराब हो जाते हैं, तो किसानों को दोबारा महंगे दामों पर बीज खरीदने होंगे. इसके अलावा खेतों की जुताई और बुवाई पर आने वाला अतिरिक्त खर्च भी उनकी आर्थिक स्थिति को कमजोर करेगा. इस वजह से किसानों का नुकसान दोगुना हो सकता है.

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बारिश का असर चने की बुवाई पर भी देखने को मिलेगा. इस बार प्रदेश में समय से पहले हुई अच्छी बारिश के कारण खेतों में पहले से ही पर्याप्त नमी मौजूद थी. ऐसे में नई बारिश ने खेतों को ज्यादा गीला कर दिया है, जिससे चने की बुवाई में देरी होगी. बुवाई के देरी से होने पर ठंड के मौसम में फसल की बढ़त प्रभावित होती है और उत्पादन में गिरावट आ सकती है. ऐसे में यह बारिश सरसों के साथ साथ चने की फसल को भी प्रभावित किया है.

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आमतौर पर सरसों और चने की बुवाई का सबसे सही समय 15 अक्टूबर तक माना जाता है. इस तारीख के बाद की गई बुवाई में बीज अंकुरण धीमा होता है और फसल को आवश्यक तापमान नहीं मिल पाता. देर से बोई गई फसल पर कीट और ठंड दोनों का खतरा बढ़ जाता है. इसलिए अब जो किसान बारिश रुकने के बाद बुवाई करेंगे, उन्हें उत्पादन में कमी का सामना करना पड़ सकता है.

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एग्रीकल्चर एक्सपर्ट दिनेश जाखड़ ने बताया कि बारिश का असर केवल रबी फसलों तक सीमित नहीं रहेगा. जहां धान और सोयाबीन की फसल कटाई के अंतिम चरण में थी, वहां इस बारिश से फसलों की क्वालिटी पर असर पड़ेगा. धान और सोयाबीन की नमी बढ़ने से दाने की गुणवत्ता घटेगी, जिससे बाजार में भाव कम मिलेंगे. इस प्रकार किसानों को वहां भी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है. आपको बता दें कि इससे पहले करीब एक महीने पहले हुई बेमौसम बारिश के कारण मूंग, मोठ, बाजरा और मूंगफली की पहले भी खराब हो चुकी है. अब किसानों को मंडी में इनके सही दाम भी नहीं मिल पा रहा है.

First Published :

October 29, 2025, 13:01 IST

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सीकर में बारिश से सरसों-चने की फसल खराब, किसानों की बढ़ी चिंता

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