सर्दियों का पारंपरिक स्वाद! बाजरे का ढोकला है सेहतमंद और लाजवाब, जानें आसान रेसिपी

नागौर. सर्दियों का मौसम अपने साथ में न केवल ठंडी सर्दी लाता है, बल्कि विभिन्न प्रकार के गरमा-गरम व्यंजन का स्वाद भी लाता है. अधिकतर लोग सर्दियों को बेहद पसंद करते हैं, क्योंकि सर्दियों का मतलब खाने का मौसम होता है. राजस्थान की मिट्टी में जितनी मीठी खुशबू है, उतना स्वाद में भी है. इसी स्वाद को सबसे खूबसूरत तरीके से पेश करता है बाजरे का ढोकला, जो हल्का, पौष्टिक और पेट के लिए बेहद आरामदायक माना जाता है. यह ढोकला गांव में बहुत पसंद किया जाता है. गांव में इस ढोकले को चूल्हे पर बनाया जाता है.
बाजरे के ढोकले में यह खूबी होती है कि जितना साधारण दिखता है, स्वाद में उतना ही गहरा और दिल को छूने वाला होता है. इसे खाने के बाद जो संतुष्टि मिलती है, मानो आत्मा तृप्त हो गई हो. गांव में बाजरे के ढोकले को दाल के साथ और तिल्ली के तेल में मिक्स कर परोसा जाता है. इसका जो स्वाद होता है, वह बहुत ही लाजवाब होता है.
बाजरे के ढोकले बनाने की विधि
ग्रामीण शारदा देवी ने बाजरे के ढोकले बनाने की विधि साझा की है. उनके अनुसार, सबसे पहले एक कटोरी बाजरे का आटा, दो बड़े चम्मच बेसन, एक मुट्ठी भीगा हुआ चना दाल, दो छोटा चम्मच जीरा, दो छोटा चम्मच सौंफ, दो छोटा चम्मच खड़ा धनिया और चार से छह हरी मिर्च, जरूरत के अनुसार बारीक कटा हुआ धनिया, एक चम्मच लहसुन अदरक का पेस्ट, एक छोटा चम्मच हल्दी पाउडर और एक छोटा चम्मच बैंकिंग सोडा एक दो बड़े चम्मच मूंगफली तेल और स्वाद अनुसार नमक लेना है.
10 मिनट में ऐसे तैयार करें बजारे के ढोकले
अब एक बर्तन में सभी चीज मिक्स कर लेना है. एक बर्तन में बाजरे का आटा, बेसन दाल और मिर्च पाउडर हल्दी पाउडर, धनिया, हरी मिर्च और सौंफ, जीरा दरदरा काटकर डालना है और अब इसमें तेल मिक्स कर देना है. यह सभी चीज मिक्स कर लेने के बाद आटा गूथ लेना है. इसमें लाल मिर्ची डाल देनी है. आटा कड़ा गूथना है, जैसे रोटी के लिए गूथते हैं. अब छोटे-छोटे पेढे लेकर हाथों से गोल-गोल बनाकर चपटा कर बीच में होल कर लेना है. इसके बाद इडली स्टैंड को ग्रीश करके उसमें रख दीजिए और ऊपर से तेल लगाइए. मीडियम फ्लेम पर पकने दीजिये और 5-5 मिनट में चेक कर लेना है. 10 मिनट में बनकर तैयार है ढोकला.
नागौर के ग्रामीण क्षेत्रों में ढोकले को दाल के साथ ज्यादा खाया जाता है. यह दाल ढोकले के नाम से ज्यादा प्रसिद्ध है. शहर में रहने वाले युवा लोग सर्दियों में ढोकला दाल खाने के लिए आते हैं. ढोकले में घी की जगह तिल्ली का तेल डाला जाता है जो इसके स्वाद में चार चांद लगा देता है. यह न केवल स्वाद में, बल्कि सेहत के लिए भी उतना ही लाभकारी है.



