दीपावली के बाद भिवाड़ी की हवा जहरीली, सांस, आंख और त्वचा पर भारी असर, डॉक्टरों ने दी चेतावनी

अलवर : दीपावली त्यौहार के बाद भिवाड़ी सहित आसपास के क्षेत्र में प्रदूषण का स्तर खतरनाक स्थिति में पहुंच गया है. अलवर जिले के भिवाड़ी की हवा अभी भी खतरनाक स्थिति में बनी हुई है. ऐसे में प्रदूषण से लोगों को बचने के लिए विभिन्न उपाय करने चाहिए. रेड क्रॉस सोसायटी अलवर के सेक्रेटरी डॉक्टर रूप सिंह ने बताया कि अलवर के भिवाड़ी के समीप धारूहेड़ा प्रदेश ही नहीं देश में सबसे प्रदूषित शहर रहा. जहां की हवा “बेहद खराब’ श्रेणी में है. भिवाड़ी में शुक्रवार को भी AQI 152 दर्ज किया गया. यह स्तर मध्यम से खराब और खांसी, आंखों में जलन, बच्चों-बुजुगों को परेशानी का सामना व 3-5 सिगरेट के बराबर असर करता है.
डॉक्टर रूप सिंह ने बताया कि जब प्रदूषण फैलता है तो भूमि, गगन, पानी, फायर सहित आकाश को प्रदूषित कर देता है, क्योंकि शरीर ही इन पांचो तत्वों से बना है. इसलिए यह प्रदूषण हमारे तन, मन सहित आत्म को भी बीमार करेगा. ऐसे में प्रदूषण के कारण दमा, खांसी और श्वास के रोगियों की संख्या बढ़ जाएगी. देश के कारण संतानों के रूप में विकलांग संतान पैदा होंगे. उन्होंने बताया कि व्यक्तिगत स्तर पर, कम्युनिटी स्तर पर, एनजीओ और गवर्नमेंट स्तर पर पांच- पांच उपाय करने की आवश्यकता है ताकि प्रदूषण पर नियंत्रण पाया जा सकता है. उन्होंने कहा कि घर से निकलने वाला दूषित कचरा, प्लास्टिक, केमिकल युक्त पानी को रोकना होगा.
सर्दियों में बढ़ा पॉल्यूशन, सावधानी जरूरीडॉ रूप सिंह ने बताया कि सर्दियों में पॉल्यूशन से बचने के लिए मास्क लगाना अति आवश्यक है. सुबह-सुबह घूमने से बचें. प्रोटीन युक्त भोजन, हरी सब्जी, विटामिन सी युक्त भोजन भोजन करना आवश्यक है ताकि प्रदूषण से बचा जा सके. उन्होंने बताया कि अगर पॉल्यूशन शरीर की चमड़ी पर लग गया तो वह जल जाती है. उन्होंने कहा कि प्रदूषण की हवा श्वास और नाक के जरिए फेफड़ों में उतर गई तो फेफड़ों का कैंसर, होने वाला दमा, खांसी, एलर्जिक ब्रोंकाइटिस होता है. हाल ही में अलवर में धात्री माताओं के एक सर्वे में 120 माताओं के स्तन के दूध की जांच की गई तो पाया गया कि मानदंड के हिसाब से मां का दूध भी सुरक्षित नहीं है.
प्रदूषण से सबसे ज्यादा बच्चों और बुजुर्गों को खतराप्रदूषण बढ़ने से सबसे ज्यादा खतरा बच्चों व बुजूर्ग, अस्थमा के रोगियों को है. एक्यूआई का स्तर बढ़ने से गले में खराश, आंखों में जलन, सांस लेने में तकलीफ, खांसी, सिरदर्द और थकान, अस्थमा या एलर्जी के रोगियों की स्थिति बिगड़ना, दिल के रोग और हाई ब्लड प्रेशर का खतरा बढ़ता है, गर्भवती महिलाओं में भ्रूण के विकास पर असर, बच्चों की ग्रोथ और दिमागी विकास पर नकारात्मक प्रभाव कैंसर और स्ट्रोक का जोखिम भी बढ़ता है.



