Brain Workout : याददाश्त होगी तेज, दिमाग रहेगा यंग; न्यूरोसाइंटिस्ट ने बताए नए ब्रेन सेल्स बनाने वाले 3 बेस्ट वर्कआउट

Brain Workout Exercises : हमारी उम्र जैसे-जैसे बढ़ती है, शरीर में कमजोरी, थकान, बिमारियों का खतरा बढ़ता चला जाता है. इन सब से बचने के लिए हम खुद की फिटनेस पर ध्यान देते हैं और जिम जाते हैं, योग करते हैं या वॉक पर निकलते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि शरीर के साथ-साथ आपके दिमाग को भी एक्सरसाइज की सख्त जरूरत होती है? दरअसल, बढ़ती उम्र के साथ दिमाग की कार्यक्षमता कम होने लगती है, लेकिन अगर न्यूरोसाइंस (Neuroscience) की नई रिसर्च की मानें तो आप दिमाग को बड़ी आसानी से कमजोर होने से बचा सकते हैं.
दरअसल, जब इस विषय पर अल्जाइमर रोग के इलाज में विशेषज्ञ न्यूरोसाइंटिस्ट डॉ. रॉबर्ट लोव (Dr. Robert Lowe) से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि हमारा दिमाग जीवनभर नए सेल्स (कोशिकाएं) बना सकता है. इस प्रक्रिया को न्यूरोजेनेसिस (Neurogenesis) कहा जाता है. अगर आप सही वर्कआउट करें तो आप न सिर्फ अपने दिमाग को एक्टिव रख सकते हैं, बल्कि याददाश्त को मजबूत बनाकर अल्जाइमर जैसी बीमारियों के खतरे को भी कम कर सकते हैं. आइए जानते हैं वे 3 आसान और असरदार वर्कआउट, जो आपके दिमाग में नए सेल्स बनाकर उसे हमेशा यंग और शार्प बनाए रखते हैं:
नए ब्रेन सेल्स बनाने वाले वर्कआउट –
रेजिस्टेंस ट्रेनिंग (Resistance Training) – मसल्स के साथ मजबूत होगा दिमाग-
अगर आप रोज वेट लिफ्टिंग, स्क्वाट्स (Squats), पुश-अप्स या रेजिस्टेंस बैंड करते हैं तो इससे न सिर्फ बॉडी बिल्डिंग के लिए अच्छा है, बल्कि टीओटी खबर के अनुसार, न्यूरोवैज्ञानिक अध्ययनों से पता चला है कि जब आप रेजिस्टेंस ट्रेनिंग करते हैं, तो शरीर में BDNF (Brain-Derived Neurotrophic Factor) नाम का प्रोटीन तेजी से बनता है. यह प्रोटीन दिमाग के सीखने और याददाश्त वाले हिस्से (हिप्पोकैम्पस) में नए न्यूरॉन्स पैदा करने में मदद करता है. ऐसे में अगर आप सप्ताह में 2 से 3 बार हल्के वजन या बॉडीवेट के साथ स्क्वाट्स और पुश-अप्स करें तो इससे बढ़ती उम्र में मांसपेशियों की कमजोरी तो दूर होगी ही, दिमागी संतुलन भी बेहतर रहेगा.
डुअल-टास्क एक्सरसाइज (Dual-Task Exercises) –
जब आप शरीर को एक्टिव रखने के साथ-साथ दिमाग को भी किसी काम में लगाते हैं, तो इसे डुअल-टास्क एक्सरसाइज कहते हैं. इसमें आपको एक ही समय पर दो काम करने होते हैं. जैसे तेज चलने के दौरान उल्टी गिनती गिनना, चलते-चलते पहेलियां सुलझाना या किसी विषय पर सोचते हुए वॉक करना.इस तरह की एक्सरसाइज में शरीर के साथ दिमाग की भी कसरत होती है. इससे ध्यान लगाने, एक साथ दो काम संभालने और सही फैसला लेने जैसी मानसिक क्षमताओं को अभ्यास मिलता है. उम्र बढ़ने के साथ दिमाग को एक्टिव रखना खास तौर पर जरूरी हो जाता है.बुजुर्गों के लिए ऐसी गतिविधियां शारीरिक संतुलन और मानसिक चुस्ती बनाए रखने में मददगार हो सकती हैं. हालांकि, इसे याददाश्त खोने से बचाने का रामबाण इलाज नहीं माना जा सकता. बुजुर्गों को चलते समय कोई मानसिक काम करने से पहले अपनी सुरक्षा का ध्यान रखना चाहिए, ताकि गिरने का खतरा न बढ़े.
लेग एक्सरसाइज (Leg Exercises) – पैरों की ताकत से बढ़ेगा ब्रेन पावर
पैरों की एक्सरसाइज जैसे तेज चलना (Brisk Walking), सीढ़ियां चढ़ना या जॉगिंग करना आपके दिमाग के लिए बेहद जादुई काम करती है. हमारे पैरों में शरीर की सबसे बड़ी मांसपेशियां होती हैं. जब ये मांसपेशियां खिंचती हैं, तो दिमाग तक मजबूत बायोकेमिकल सिग्नल भेजती हैं. इससे दिमाग में ऑक्सीजन और ब्लड फ्लो तेजी से बढ़ता है, जिससे पुराने सेल्स की मरम्मत होती है और नए सेल्स तेजी से बनते हैं. रोजाना 20-30 मिनट की तेज चाल भी आपके दिमाग को लंबे समय तक सेहतमंद रख सकती है.
अपनी दिनचर्या में कैसे करें शामिल? (Quick Action Plan)-
-रोजाना 20-30 मिनट ब्रिस्क वॉक करें और सीढ़ियों का इस्तेमाल करें.-हफ्ते में 2-3 बार हल्के स्क्वाट्स, पुश-अप्स या वेट ट्रेनिंग करें.-वॉक करते समय गाने गुनगुनाने या किसी विषय पर सोचने जैसे डुअल-टास्क एक्टिविटी अपनाएं.
सवाल-जवाब (Q&A)-
Q1. क्या बढ़ती उम्र में भी नए दिमाग के सेल्स (Neurons) बन सकते हैं?उत्तर: जी हाँ! हमारा दिमाग पूरे जीवन चक्र के दौरान नए सेल्स बना सकता है. इस प्राकृतिक प्रक्रिया को ‘न्यूरोजेनेसिस’ (Neurogenesis) कहते हैं. सही एक्सरसाइज और मानसिक चुनौतियों की मदद से किसी भी उम्र में दिमागी विकास संभव है.
Q2. लेग एक्सरसाइज (पैरों की कसरत) का दिमाग से क्या संबंध है?उत्तर: पैरों की मांसपेशियां शरीर में सबसे बड़ी होती हैं. जब हम स्क्वाट्स, सीढ़ियां चढ़ने या जॉगिंग जैसी लेग एक्सरसाइज करते हैं, तो ये मांसपेशियां सिकुड़ते समय दिमाग को बायोकेमिकल सिग्नल भेजती हैं. इससे दिमाग में ऑक्सीजन और ब्लड फ्लो बढ़ता है, जो अल्जाइमर जैसी बीमारियों और डिमेंशिया (याददाश्त खोना) के खतरे को कम करता है.
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी केवल जागरूकता और शैक्षणिक (Educational) उद्देश्यों के लिए है. यह किसी भी तरह से पेशेवर चिकित्सा, निदान या इलाज का विकल्प नहीं है. अपनी दिनचर्या में किसी भी नए वर्कआउट या व्यायाम को शामिल करने से पहले अपने डॉक्टर या फिटनेस विशेषज्ञ से परामर्श जरूर लें.



