Rajasthan

जवाई बांध में सिर्फ 24 फीट पानी, 500 मगरमच्छ और लाखों मछलियों पर मंडराया ‘काल’ का साया

Last Updated:October 02, 2026, 07:31 IST

Pali Jawai Water Shortage Ground Report: पाली के जवाई बांध में घटता जलस्तर अब इंसानों के साथ-साथ वन्यजीवों के लिए भी चिंता का कारण बन रहा है. 61.25 फीट की भराव क्षमता वाले बांध में पानी 24 फीट से नीचे पहुंचने का दावा किया गया है. इसका असर जवाई के प्राकृतिक इकोसिस्टम पर दिखाई देने लगा है. बांध में 500 से ज्यादा मगरमच्छ और बड़ी संख्या में मछलियां मौजूद हैं, जिनके लिए घटता पानी चिंता बढ़ा रहा है. पानी का दायरा सिमटने के साथ मगरमच्छों के आवास और भोजन की उपलब्धता प्रभावित होने की आशंका है. वहीं गर्म होते पानी से मछलियों पर भी असर पड़ सकता है. विशेषज्ञों के हवाले से अगले करीब तीन महीनों में पानी के डेड स्टोरेज तक पहुंचने की आशंका जताई गई है. जवाई अपनी लेपर्ड सफारी के साथ मगरमच्छों के लिए भी देश-दुनिया में पहचान रखता है. ऐसे में जल संकट का असर यहां के वन्यजीव और पर्यटन दोनों पर पड़ सकता है.

पाली. राजस्थान के पाली जिले की पहचान और पश्चिमी राजस्थान की जीवनरेखा कहे जाने वाले जवाई बांध से इस वक्त एक बेहद चिंताजनक तस्वीर सामने आ रही है. मानसून की बेरुखी से 61.25 फीट की क्षमता वाला जवाई बांध अब मात्र 24 फीट से भी कम पानी पर सिमट चुका है. लेकिन इस जल संकट का सबसे खौफनाक असर इंसानों से पहले बांध में रहने वाले बेजुबान जीवों पर पड़ रहा है. पानी कम होने से जवाई बांध के 500 से ज्यादा मगरमच्छों और लाखों मछलियों की सांसों पर संकट मंडराने लगा है.

जवाई बांध की ये तस्वीरें चीख-चीख कर एक भयानक त्रासदी का संदेश दे रही है. जिस जवाई को मगरमच्छों के प्राकृतिक आवास के रूप में जाना जाता है, आज वही जवाई इन जलचरों के लिए मरणस्थल बनता जा रहा है. बांध में पानी का स्तर घटकर 24 फीट से नीचे पहुंच गया है, जिससे 500 से ज्यादा विशालकाय मगरमच्छों और जलीय जीवों का दायरा लगातार सिमटता जा रहा है. अगर अगले 3 महीनों में स्थितियां नहीं सुधरीं, तो जवाई का पूरा इकोसिस्टम तबाह हो जाएगा. देखिए बेजुबानों की इस जंग पर हमारी यह विशेष ग्राउंड रिपोर्ट….

जल स्तर कम होने पर नजर आ रहे मगरमच्छ

पानी का स्तर कम होने से न सिर्फ मगरमच्छों के लिए तैरने और छिपने की जगह खत्म हो रही है, बल्कि जलीय तापमान बढ़ने से लाखों मछलियों के अस्तित्व पर भी सीधा खतरा मंडरा रहा है. मछलियों के मरने से जहां बांध के पानी के दूषित होने का खतरा बढ़ गया है, वहीं मगरमच्छों के लिए भोजन और पानी दोनों का भीषण संकट खड़ा हो गया है.

तीन महीने का ही बचा है पानी

विशेषज्ञों की मानें तो बांध में महज 3 महीने का पानी बचा है. इसके बाद जवाई बांध ‘डेड स्टोरेज’ में चला जाएगा. यानी इंसानों को तो ट्रेनों से पानी लाकर पिला दिया जाएगा, लेकिन बांध के इन 500 से ज्यादा मगरमच्छों और लाखों मछलियों को पानी कौन पिलाएगा? चुनाव के समय प्रकृति और वन्यजीव संरक्षण के बड़े-बड़े वादे करने वाले नेता आज इस भीषण संकट पर चुप्पी साधे बैठे हैं. अगर समय रहते जवाई बांध में पानी के बैकअप और इन बेजुबान जीवों को बचाने के लिए वन्यजीव विभाग और प्रशासन ने कोई इमरजेंसी प्लान नहीं बनाया, तो आने वाले दिनों में हमें बड़े पैमाने पर मगरमच्छों और मछलियों की जान जाने की दुखद खबरें देखने को मिल सकती हैं.

तेंदुए के बाद इन मगरमच्छों से है जवाई की पहचान

जवाई का इको सिस्टम पूरे विश्व में अपनी अनोखी और अद्भुत पहचान रखता है. तेंदुए (लेपर्ड) के दीदार के लिए मशहूर जवाई का दूसरा सबसे बड़ा और मुख्य आकर्षण यहां के विशालकाय मगरमच्छ हैं. पहाड़ियों से घिरे जवाई बांध के पानी और उसके किनारों पर धूप सेकते मगरमच्छों का नजारा बेहद रोमांचक होता है, जिसे देखने के लिए देश-विदेश से हर साल हजारों पर्यटक और वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर खिंचे चले आते हैं. यहां लेपर्ड और मगरमच्छों का सह-अस्तित्व इस पूरे इलाके की प्राकृतिक सुंदरता में चार चांद लगाता है. पर्यटक जवाई सफारी के दौरान बांध के उथले पानी और चट्टानों पर इन बेजुबान जीवों की गतिविधियों को निहारते हैं, जो यहां के पर्यटन उद्योग और स्थानीय अर्थव्यवस्था की मजबूत रीढ़ माने जाते हैं.

About the Authorदीप रंजन सिंह Content Producer

दीपरंजन सिंह लगभग एक दशक से पत्रकारिता के फिल्ड से जुड़े हुए हैं. वह अभी न्यूज18 हिंदी के राजस्थान डिजिटल डेस्क से जुड़े हैं, जहां वे बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले लगभग एक दशक से सक्रिय पत…

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October 02, 2026, 07:31 IST

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