नेवी परीक्षा में घुसपैठ की साजिश, बैकडेट डिप्लोमा देकर भर्ती का खेल, एसओजी की बड़ी कार्रवाई

जयपुर. जयपुर से स्पेशल ऑपरेशन्स ग्रुप (SOG) से जुड़ी एक बेहद अहम और चौंकाने वाली खबर सामने आई है, जिसने भारतीय नौसेना की फायर टेक्नीशियन परीक्षा–2025 से जुड़े पूरे सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. इस मामले में एसओजी ने फायर टेक्नीशियन, एपरेटस ऑपरेटर और स्टोरकीपर कोर्स से जुड़े फर्जी डिप्लोमा और सर्टिफिकेट रैकेट का बड़ा खुलासा किया है. जांच में सामने आया है कि अभ्यर्थियों को बैकडेट में डिप्लोमा और सर्टिफिकेट जारी किए गए, जिनका इस्तेमाल नौसेना भर्ती परीक्षा में पात्रता के लिए किया गया.
इस पूरे षड्यंत्र का केंद्र चेन्नई की भारत सेवा समाज संस्था रही, जो कागजों में खुद को मान्यता प्राप्त बताती थी, लेकिन जांच में पूरी तरह फर्जी पाई गई. एसओजी ने इस मामले में भारत सेवा समाज संस्था के प्रमुख और डायरेक्टर SAG उर्फ अरुल ग्नाना मोएसन को चेन्नई से गिरफ्तार किया है. एसओजी की जांच में खुलासा हुआ है कि यह संस्था न तो किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड या एजेंसी से जुड़ी थी और न ही इसके पास खुद का कोई डिप्लोमा या कोर्स संचालित करने का वैध सैट-अप मौजूद था. इसके बावजूद इस संस्था ने देश के अलग-अलग हिस्सों में कॉलेजों को संबद्धता देकर फर्जी डिप्लोमा बांटने का नेटवर्क खड़ा कर रखा था.
बैकडेट में तैयार किए गए सर्टिफिकेटजांच में सामने आया है कि यह पूरा फर्जीवाड़ा 2023–24 के दौरान सुनियोजित तरीके से किया गया. अभ्यर्थियों को 12वीं की मार्कशीट के आधार पर फायर टेक्नीशियन, एपरेटस और स्टोरकीपर कोर्स के सर्टिफिकेट और डिप्लोमा जारी कर दिए गए. हैरानी की बात यह है कि जुलाई 2025 में वर्ष 2023–24 के डिप्लोमा और सर्टिफिकेट बांटे गए, यानी दस्तावेज जानबूझकर बैकडेट में तैयार किए गए ताकि वे भारतीय नौसेना की फायर टेक्नीशियन परीक्षा–2025 में मान्य हो सकें.
करौली से चेन्नई तक फैला षड्यंत्र
एसओजी की जांच में यह भी सामने आया है कि इस साजिश की जड़ें राजस्थान के करौली जिले के तुंगला स्थित फायर एंड सेफ्टी मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट तक फैली हुई थीं. इसी तरह के कई कॉलेजों और इंस्टीट्यूट्स को भारत सेवा समाज संस्था की ओर से संबद्धता दी गई थी. इन कॉलेजों से संबद्धता के नाम पर करीब एक लाख रुपए की फीस वसूली जाती थी. वहीं, संबद्ध कॉलेज अपने यहां पढ़ने वाले छात्रों से 10 से 20 हजार रुपए तक वसूलते थे.
हर छात्र से चलता था कमीशन का खेलजांच में यह भी खुलासा हुआ है कि हर छात्र की फीस में से करीब 2 हजार रुपए सीधे भारत सेवा समाज संस्था को दिए जाते थे. यानी संस्था न केवल छात्रों को फर्जी डिप्लोमा देकर ठग रही थी, बल्कि कॉलेजों से भी मोटी रकम वसूल रही थी. सबसे बड़ा झटका तब सामने आया जब एसओजी ने पाया कि संबद्धता देने वाली संस्था ही फर्जी थी, यानी कॉलेज भी एक तरह से ठगे गए.
एसओजी एडीजी ने दी पूरी जानकारीएसओजी के एडीजी विशाल बंसल IPS ने पूरे मामले की जानकारी देते हुए बताया कि यह फर्जीवाड़ा भारतीय नौसेना जैसी संवेदनशील भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा हुआ है, इसलिए जांच को बेहद गंभीरता से लिया जा रहा है. उन्होंने कहा कि फर्जी डिप्लोमा और सर्टिफिकेट के जरिए सरकारी और रक्षा संस्थानों में घुसपैठ की कोशिश को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
अब एसओजी इस नेटवर्क से जुड़े अन्य कॉलेजों, बिचौलियों और लाभ लेने वाले अभ्यर्थियों की भूमिका की भी जांच कर रही है. यह मामला आने वाले दिनों में और बड़े खुलासों की ओर इशारा कर रहा है, क्योंकि सवाल सिर्फ फर्जी कागजात का नहीं, बल्कि देश की सुरक्षा से जुड़े संस्थानों की भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता का भी है.



