डेंगू, स्वाइन फ्लू और अब हैंड फूट माउथ डिजीज..मॉनसून में पेरेंट्स की एक लापरवाही पड़ सकती है भारी, डॉक्टर ने दी खास सलाह

Doctor Tips For Monsoon Diseases In Children : इन दिनों दिल्ली-एनसीआर के अस्पतालों और क्लीनिक्स में बुखार, खांसी और तरह-तरह के इंफेक्शंस से पीड़ित बच्चों की संख्या में भारी उछाल देखा जा रहा है. बच्चे न केवल गंभीर रूप से बीमार हो रहे हैं, बल्कि स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति पर भी इसका सीधा असर पड़ रहा है. हालिया स्थिति को देखते हुए डॉ. प्रशांत त्यागी(सलाहकार बाल रोग विशेषज्ञ एवं एलर्जी विशेषज्ञ, सीताराम भरतिया इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड रिसर्च, दिल्ली)ने मॉनसून में पनपने वाली 4 प्रमुख बीमारियों और उनसे बचाव को लेकर पेरेंट्स के लिए विशेष हेल्थ गाइडलाइन साझा की है.
दिल्ली-एनसीआर में स्वाइन फ्लू और डेंगू के डराने वाले आंकड़े सामने आए हैं. स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में 2026 में अब तक H1N1 के 1,344 मामले दर्ज किए जा चुके हैं, जो पिछले साल की इसी अवधि (229 मामले) की तुलना में लगभग 6 गुना अधिक हैं. वहीं, डेंगू के मामलों में भी लगातार वृद्धि हो रही है. जुलाई तक 205 से ज्यादा मामले सामने आने के बाद दिल्ली और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सर्विलांस और मच्छर नियंत्रण उपायों को तेज कर दिया है. यही नहीं, छोटे बच्चों में हाथ-पैर-मुंह की बीमारी (HFMD) और दूषित खान-पान से होने वाले टाइफाइड के मामले भी तेजी से सामने आ रहे हैं.
इन 4 बीमारियों के लक्षण और खतरे के निशान (Red Flags)-
डॉक्टर के मुताबिक पेरेंट्स को इन बीमारियों के शुरुआती लक्षणों और डेंजर साइंस की पहचान होना बेहद जरूरी है:
1.H1N1 (स्वाइन फ्लू): बुखार, खांसी, गले में खराश और तेज बदन दर्द.खतरे का निशान: सांस लेने में तकलीफ, छाती में दर्द, होठ नीले पड़ना या अत्यधिक सुस्ती. (5 साल से छोटे बच्चों को अधिक खतरा).
2.डेगू (Dengue): तेज बुखार, सिरदर्द, उल्टी और शरीर पर दाने.खतरे का निशान: पेट में तेज दर्द, लगातार उल्टी, मसूड़ों या नाक से खून आना.
3.HFMD (हाथ-पैर और मुंह की बीमारी):बुखार, मुंह में छाले और हथेलियों-तलवों पर लाल चकत्ते.खतरे का निशान: छाले के कारण बच्चे का पानी या तरल पदार्थ न पी पाना और डिहाइड्रेशन.
4.टाइफाइड (Typhoid): लगातार तेज बुखार, सिरदर्द, कमजोरी और पेट की समस्याएं. यह मुख्य रूप से दूषित पानी और खुले खाने से फैलता है.
डॉक्टर की सख्त हिदायत-डॉ. त्यागी ने पेरेंट्स को खुद डॉक्टर बनने या पैनिक में आकर बेवजह टेस्ट कराने से बचने की सलाह दी है:
हर बुखार में एंटीबायोटिक जरूरी नहीं: अधिकांश मॉनसूनी बुखार वायरल होते हैं. बिना डॉक्टरी सलाह के एंटीबायोटिक देना बच्चे के स्वास्थ्य और इम्युनिटी के लिए हानिकारक है.बेवजह के टेस्ट से बचें: हर बुखार में CBC, CRP, डेंगू या टाइफाइड का टेस्ट कराना जरूरी नहीं होता. इससे मानसिक तनाव और गलत इलाज का खतरा बढ़ता है.टेली-कंसल्टेशन अपनाएं: अगर लक्षण सामान्य हैं, तो पहले फोन या ऑनलाइन माध्यम से अपने बाल रोग विशेषज्ञ से परामर्श लें. इससे क्लीनिक या अस्पताल की भीड़ से बचाव होगा.
बीमार बच्चे को स्कूल न भेजें-अक्सर पेरेंट्स पढ़ाई या परीक्षा का नुकसान न हो, यह सोचकर बीमार बच्चे को भी स्कूल भेज देते हैं. डॉक्टर इसे एक बड़ी भूल मानते हैं. डॉ त्यागी क अनुसार, “यदि बच्चे को बुखार, दस्त, उल्टी या संक्रामक दाने हैं, तो उसे घर पर ही रखें. बीमार बच्चे को घर रखना पढ़ाई का नुकसान नहीं, बल्कि पूरी क्लास और स्कूल को संक्रमण से बचाना है.” ऐसे में डॉक्टरों की सलाह है कि बच्चा बीमार हो तो तुरंत स्कूल प्रशासन को सूचित करें, ताकि अन्य बच्चों को समय रहते सुरक्षित किया जा सके.
बचाव के 5 जरूरी नियम-साफ सफाई जरूरी : बच्चों को समय-समय पर हाथ धोने और खांसते-छींकते समय मुंह ढकने की आदत डालें.मच्छरों से सुरक्षा: पूरी आस्तीन के कपड़े पहनाएं और घर या आसपास पानी जमा न होने दें.सुरक्षित खान-पान: केवल उबला या साफ पानी ही पिलाएं और बाहर के खुले, बासी खाने से पूरी तरह परहेज करें.फ्लू वैक्सीनेशन : डॉक्टर की सलाह से फ्लू का टीका (Influenza Vaccine) अप-टू-डेट रखें.
याद रखें, सतर्कता, सही इलाज और थोड़ी सी सावधानी ही इस मौसम में हमारे बच्चों की सबसे बड़ी ढाल है! ऐसे में डेंगू, स्वाइन फ्लू, HFMD या टाइफाइड जैसी बीमारियों से डरने या पैनिक होने के बजाय, सही समय पर सही कदम उठाना ही असली सुरक्षा है.
बिना डॉक्टरी सलाह के एंटीबायोटिक देने और बेवजह के मेडिकल टेस्ट कराने से बचें, और यदि बच्चा बीमार हो तो उसे घर पर आराम करने दें. पेरेंट्स का एक ज़िम्मेदार फैसला न केवल उनके अपने बच्चे को जल्द स्वस्थ बनाएगा, बल्कि स्कूल और समाज के अन्य बच्चों को भी सुरक्षित रखेगा.



