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Fisherman Discovers Rare Thing: मछली पकड़ने को फेंका था जाल फंस गई ऐसी चीज कि फटी रह गईं मछुआरे की आंखें

Last Updated:May 01, 2026, 11:44 IST

Fisherman Discovers Rare Thing: अमेरिका के केप गॉड के पास मछुआरों के जाल में एक बेहद दुर्लभ लोब्स्टर फंसा, जो आधा भूरा और आधा नारंगी था. वेलफ्लीट शेलफिश कंपनी ने इसे करोड़ों में एक बताया. वैज्ञानिकों के अनुसार यह अनोखा रंग जेनेटिक कारणों से होता है. इसे खाने के बजाय Woods Hole Science Aquarium को दान किया गया है, जहां इसका अध्ययन होगा और लोगों को दिखाया जाएगा.

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मछली पकड़ने को फेंका था जाल, फंस गई ऐसी चीज कि फटी रह गईं मछुआरे की आंखेंZoomमछुआरे के जाल में फंसी अजीब चीज. (Canva)

Fisherman Discovers Split Coloured Lobster: सोचिए मछली पकड़ने गए मछुआरे के जाल डालने पर बदले में उधर से कुछ ऐसा फंसकर आ जाए, जिसे देखकर खुद मछुआरे भी चौंक जाएं. कुछ ऐसा ही हुआ एक मछुआरे के साथ, जो अपनी टीम के साथ मछलियां पकड़ने के लिए केप गॉड गया हुआ था. यहां पर मछली के जाल में उनसे मछलियों का साथ कुछ ऐसा भी मिला, जो बेहद अलग था. आखिरकार जब इसकी पहचान हुई, तो मछुआरा खुद को चौंक ही गया, उसने जब सोशल मीडिया पर तस्वीरें शेयर कीं तो वैज्ञानिक भी भागे चले आए.

लॉबस्टर की एक बेहद दुर्लभ प्रजाति अमेरिका के केप गॉड के पास समुद्र में मिली है, जिसने मछुआरों और वैज्ञानिकों को हैरान कर दिया. यह खास लॉब्स्टर आधा-आधा दो अलग रंगों में बंटा हुआ है- एक तरफ भूरा और दूसरी तरफ चमकीला नारंगी. इस अनोखे लॉब्स्टर को वेलफ्लीट शेलफिश कंपनी की मछली पकड़ने वाली टीम ने पकड़ा. बाद में कंपनी ने इसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा कीं, जो तेजी से वायरल हो गईं. कंपनी ने इसे बेहद दुर्लभ बताया और कहा कि इस तरह के लॉब्स्टर बहुत कम देखने को मिलते हैं.

5 करोड़ में से एक है ये जीव

कंपनी के अधिकारी डैन ब्रांड्ट ने बताया कि जब उन्हें इतना खास जीव मिला, तो उन्होंने इसे सुरक्षित रखने का फैसला किया. उनका कहना था कि ऐसे दुर्लभ जीव को लोगों के सामने लाना जरूरी है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इसके बारे में जान सकें. वैज्ञानिकों के अनुसार इस लॉब्स्टर के दो रंग होने के पीछे खास जैविक कारण हो सकते हैं. यह स्थिति जेनेटिक मोजेकिज्म या गाइनेंड्रोमॉर्फिज्म की वजह से हो सकती है. इसका मतलब है कि एक ही शरीर में अलग-अलग तरह की कोशिकाएं या नर और मादा दोनों के गुण मौजूद हो सकते हैं. इसी कारण इसका रंग दो हिस्सों में बंटा हुआ दिखता है.

साइंस एक्वेरियम को दान किया जाएगा जीव

इस दुर्लभ लॉब्स्टर को खाने के लिए इस्तेमाल करने के बजाय वुड्स होल साइंस एक्वेरियम को दान कर दिया गया है. वहां इसे वैज्ञानिक अध्ययन के लिए रखा जाएगा और भविष्य में लोगों के देखने के लिए प्रदर्शित भी किया जाएगा. एक्वेरियम की जीवविज्ञानी जूलिया स्टडली ने कहा कि यह लॉब्स्टर न सिर्फ देखने में आकर्षक है, बल्कि यह हमें प्रकृति की जटिलता और विविधता के बारे में भी सिखाता है. कुल मिलाकर यह दुर्लभ खोज यह दिखाती है कि प्रकृति कितनी अनोखी और अप्रत्याशित हो सकती है. यह लॉब्स्टर अब एक वैज्ञानिक आकर्षण बन चुका है और आने वाले समय में लोगों के लिए सीखने का खास जरिया बनेगा.

About the AuthorPrateeti Pandey

में इंटरनेशनल डेस्क पर कार्यरत हैं. टीवी पत्रकारिता का भी अनुभव है और इससे पहले Zee Media Ltd. में कार्य किया. डिजिटल वीडियो प्रोडक्शन की जानकारी है. टीवी पत्रकारिता के दौरान कला-साहित्य के साथ-साथ अंतरर…और पढ़ें

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