यहां से उठी थी आजादी की चिंगारी, धर्मस्तुप पर शान से लहराया गया था तिरंगा, जानें चूरू का योदगान

नरेश पारीक/चूरू. एक वक्त था जब ब्रिटिश हुकूमत का सूरज डूबता नही था. ब्रिटिश हुकूमत को चुनौती देना तो दूर की बात फिरंगियों की मर्जी के बगैर पत्ता भी नहीं हिलता था और लोग ब्रिटिश हुकूमत के जुल्मों को अपना नसीब मान चुके थे. लेकिन कुछ आजादी के दीवाने ऐसे भी थे जो गुलामी की बेड़ियों से देश को आजाद कराने का दिन रात सपना देखते थे और अंग्रेजी हुकूमत की जड़े हिलाने का साहस रखते थे. ऐसे लोगों के दम पर देश को आजादी मिली. ऐसी ही एक घटना राजस्थान के चूरू में हुई. जिससे ब्रिटिश हुकूमत बुरी तरह से हिल गई. इस घटना का साक्षी शहर के बीच मे खड़ा धर्मस्तुप है. जहां आजादी के 17 बरस पहले ही आजादी के दीवानों ने तमाम पाबंदियों और कड़ाईयो के बीच तिरंगा झंडा लहराकर ब्रिटिश हुकूमत को सीधे चुनोती दे दी थी.
नगर श्री के सचिव श्याम सुंदर शर्मा ने बताया कि दिसंबर 1929 में राष्ट्रीय कांग्रेस का अधिवेशन पंडित जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में लाहौर (अब पाकिस्तान) में हुआ था. जिसमे देश की पूर्ण स्वंत्रता का प्रस्ताव पारित किया गया था.
26 जनवरी 1930 को देशभर में स्वाधीनता दिवस मनाए जाने की अपील की गई और 1 जनवरी 1930 को महात्मा गांधी ने ध्वजा रोहण का संदेश दिया था. उन्होंने ने बताया कि उस वक्त बीकानेर में महाराजा गंगासिह का शाशन था और देश मे ब्रिटिश सरकार थी. उन्होंने बताया कि कांग्रेस के लाहौर अधिवेशन में लिए गए निणर्य के अंतर्गत चूरू के चंदनमल बहड़, वैद्य भालचंद शर्मा, महंत गनपतिदास, घनश्यामदास पौधार, वैद्य शांत शर्मा आदि ने 26 जनवरी 1930 को आजादी की मांग को लेकर शहर के धर्मस्तुप पर प्रतीक रूप में तत्काल तैयार किया तिरंगा झंडा फहराया था. जिसके बाद ब्रिटिश शाशन में हलचल मच गई और आंदोलनकारियों को गिरफ्तार करने के लिए छापामारी शुरू हो गईं.
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FIRST PUBLISHED : August 10, 2023, 18:04 IST