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Explainer: अमेरिका क्यों नहीं दे रहा वेनेजुएला प्रेसीडेंट मादुरो को इम्युनिटी, क्या है नियम

ये तो अब पूरी दुनिया को मालूम हो चुका है कि 3 जनवरी को अमेरिका ने एक आपरेशन किया. इसमें उसके कमांडो एयरफोर्स के विमानों के जरिए वेनेजुएला की राजधानी काराकस में मादुरो के निवास पर पहुंचाए गए. जहां से आधे घंटे के भीतर उन्होंने प्रेसीडेंट निकोलस मादुरो को पकड़ा और उन्हें लेकर न्यूयार्क पहुंचे. आमतौर पर जब कोई राष्ट्रप्रमुख गिरफ्तार किया जाता है तो उसे खास इम्युनिटी मिलती है लेकिन मादुरो को ये नहीं मिल रही है. आखिर ऐसा क्यों है.

जब किसी राष्ट्राध्यक्ष को गिरफ्तारी और मुकदमे की स्थिति में लाया जाता है तो इसका सीधा संबंध अंतरराष्ट्रीय कानून में प्रमुखों को मिलने वाली इम्युनिटी से होता है, ये काफी पेचीदा और सशर्त है. इसी वजह से जब मादुरो न्यूयार्क की साउथ डिस्ट्रिक्ट अदालत के सामने जब पेश किए गए तो उन्होंने साफ कहा कि वो अब भी वेनेजुएला में प्रेसीडेंट हैं. उनके कहने का मतलब था कि उन्हें बांधकर जेल में नहीं रखा जा सकता, इसके उलट उन्हें इम्युनिटी मिलनी चाहिए

सवाल – अमेरिका वेनेजुएला के प्रेसीडेंट निकोलस मादुरो को राष्ट्रप्रमुख होने के नाते इम्युनिटी क्यों नहीं दे रहा?

– अमेरिका निकोलस मादुरो को राष्ट्रप्रधान की इम्युनिटी इसलिए नहीं दे रहा क्योंकि वह उन्हें वेनेजुएला का वैध राष्ट्रप्रधान नहीं मानता. हालिया घटनाओं में मादुरो पर ड्रग तस्करी और अन्य आरोप लगे हैं. इसी वजह से अमेरिकी अदालतें उनकी गिरफ्तारी व मुकदमे की प्रक्रिया चला रही हैं.

सवाल – मादुरो तो वेनेजुएला के प्रेसीडेंट हैं, हर निर्वाचित राष्ट्रप्रमुख इस इम्युनिटी का हकदार होता है?

– दरअसल इस इम्युनिटी को किनारे रखने के लिए ही अमेरिका ने पहले से ही कहा हुआ है कि वेनेजुएला में वर्ष 2024 में हुए चुनाव धांधलीपूर्ण हैं, जिसमें मादुरो ने सत्ता बरकरार रखी लेकिन विपक्षी उम्मीदवार को विजेता घोषित किया गया. इसी वजह से अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने मादुरो को “अवैध शासक” कहा है, जिससे हेड ऑफ स्टेट इम्युनिटी उन पर लागू नहीं की जा रही.

सवाल – क्या मादुरो ने अपनी इम्युनिटी का दावा किया है?

– हां, वेनेजुएला के प्रेसीडेंट ने साउथ न्यूयार्क कोर्ट में पेश किए जाने के समय साफ कहा कि वो अब भी वेनेजुएला के प्रेसीडेंट हैं. उन्हें इम्युनिटी पाने का हक है.

सवाल – 80 के दशक के आखिर में जब अमेरिका ने पनामा के प्रेसीडेंट मैनुएल नोरिएगा को गिरफ्तार किया था, तब उन्हें भी इम्युनिटी नहीं दी थी. तब किस वजह से कोर्ट ने इम्युनिटी को खारिज कर दिया था?

– पनामा के पूर्व सैन्य तानाशाह मैनुअल नोरिएगा को 1989 में अमेरिकी आक्रमण के बाद गिरफ्तार किया गया था. जब उन पर अमेरिका में मुकदमा चला, तो उनके वकीलों ने ‘हेड ऑफ स्टेट’ होने के नाते इम्युनिटी यानि राजनयिक छूट की मांग की थी, लेकिन अमेरिकी अदालत ने इसे खारिज कर दिया. इम्युनिटी का लाभ आमतौर पर उन नेताओं को मिलता है जिन्हें अमेरिका आधिकारिक तौर पर किसी देश के वैध शासक के रूप में मान्यता देता है. अमेरिकी सरकार ने तब भी नोरिएगा को पनामा का वैध या संवैधानिक प्रमुख नहीं माना था. अमेरिका का रुख ये था कि वह केवल एक सैन्य तानाशाह थे, जिन्होंने सत्ता पर अवैध कब्जा कर रखा था, इसलिए वे ‘सॉवरेन इम्युनिटी’ के हकदार नहीं थे. नोरिएगा पर नशीली दवाओं की तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप थे.

सवाल – क्या वेनेजुएला ने अगर मादुरो के लिए इम्युनिटी मांगी तब क्या होगा?

– तब निश्चित तौर पर अमेरिका पर उसका दबाव तो पड़ेगा ही. क्योंकि इम्युनिटी अक्सर उस देश के द्वारा भी मांगी जाती है, जिसका वो नेता होता है. हालांकि वेनेजुएला की कार्यवाहक सरकार ने अब तक ऐसा नहीं किया है. उम्मीद भी नहीं है कि वो ऐसा कुछ करने जा रही है.1989 में भी नोरिएगा के हटने के बाद पनामा की जो नई सरकार बनी, उसने नोरिएगा के लिए किसी भी प्रकार की इम्युनिटी की मांग नहीं की. इसके विपरीत पनामा की नई सरकार ने उनके खिलाफ कानूनी कार्यवाही का समर्थन किया.तब अदालत ने नोरिएगा को बेशक इम्युनिटी नहीं दी, लेकिन उन्हें ‘युद्ध बंदी’ का दर्जा दिया. इसका मतलब यह था कि उनके साथ जिनेवा कन्वेंशन के तहत सम्मानजनक व्यवहार किया जाना था लेकिन यह दर्जा उन्हें आपराधिक मुकदमों से नहीं बचा सकता था.

सवाल – क्या मादुरो को युद्ध बंदी का दर्जा मिलेगा?

– नहीं, निकोलस मादुरो को युद्धबंदी का दर्जा नहीं दिया जाएगा. अमेरिकी प्रशासन उन्हें आपराधिक आरोपी मानता है, न कि सैन्य संघर्ष का कैदी. मादुरो ने खुद को अदालत में पहले कंट्रीहेड इम्युनिटी देने के बात की, वो भी खारिज कर दी गई. फिर उन्होंने खुद को युद्धबंदी का दर्जा की अपील भी की, इसे भी जज ने खारिज कर दिया.मादुरो ने न्यूयॉर्क कोर्ट में कहा कि उनकी गिरफ्तारी डेल्टा फोर्स द्वारा सैन्य कार्रवाई थी, इसलिए वे युद्धबंदी हैं. उन्होंने जिनेवा कन्वेंशन का हवाला दिया, जहां युद्ध बंदी पर सिविल कोर्ट में मुकदमा नहीं चलाया जाता. लेकिन अमेरिका इसे कानूनी गिरफ्तारी बताता है, नार्को-टेररिज्म के पुराने इनडिक्टमेंट पर आधारित. ट्रंप प्रशासन इसे लॉ एनफोर्समेंट ऑपरेशन कहता है, न कि युद्ध.

सवाल – एक राष्ट्राध्यक्ष को अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत कैसी इम्युनिटी मिलती है. इसकी शर्तें क्या होती हैं?

– एक राष्ट्राध्यक्ष को अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत कुछ सुरक्षा यानि इम्युनिटी मिलती है. ये उसे विदेश की नेशनल कोर्ट्स के मुकदमों से बचाती है. अंतरराष्ट्रीय परंपरा और अंतरराष्ट्रीय कानून कहता है कि एक देश दूसरे देश के प्रमुख के खिलाफ मुकदमा नहीं चला सकता, क्योंकि यह उस देश की सार्वभौमिकता का उल्लंघन माना जाता है.अगर कोई देश का आतंकवादी, हत्या या भ्रष्टाचार के आरोप में भी पकड़ा जाए, तो दूसरे देश में उसे गिरफ्तार या ट्रायल करना सामान्यतः कानूनी रूप से अवैध माना जाता है जब तक कि उस देश की सरकार खुद इम्युनिटी न हटाए या अंतरराष्ट्रीय अदालत में मामला न चल रहा हो.

सवाल – ये इम्युनिटी कब तक लागू होती है?

– एक सक्रिय राष्ट्राध्यक्ष के लिए यह इम्युनिटी पूरी तरह लागू होती है, मतलब दूसरे देश की अदालत उस पर जुर्म के लिए मुकदमा नहीं चला सकतीं. जबरदस्ती गिरफ्तार करके ले जाना या कहीं बुलाकर गिरफ्तार करके ट्रायल करना विवादास्पद माना जाता है.

सवाल – क्या अंतरराष्ट्रीय अपराधों में इम्युनिटी रहती है?

– ऐसे मामलों में राष्ट्रीय अदालतों में तो इम्युनिटी काम करती है लेकिन अगर ये मुकदमा इंटरनेशनल कोर्ट में चलाया जाए तो वहां इम्युनिटी नहीं मिलती. ICC के Rome Statute (आर्टिकल 27) के अनुसार, कोई भी व्यक्ति चाहे वह राष्ट्राध्यक्ष हो अंतरराष्ट्रीय अपराध के लिए मुकदमे से बच नहीं सकता. अंतरराष्ट्रीय अदालतों ने कई राष्ट्राध्यक्षों के खिलाफ आरोप लगाकर वॉर क्राइम, मानवता के खिलाफ अपराध आदि में मुकदमा चलाया है.

सवाल – क्या इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस दखल देकर कह सकता है कि मादुरो के खिलाफ मुकदमा अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में चले?

– नहीं. आईसीजे के पास ये अधिकार ही नहीं है कि वह किसी देश की आपराधिक अदालत का मुकदमा रुकवा दे या कहे कि “ये केस इंटरनेशनल क्राइम कोर्ट को सौंपो”. वो केवल ये तय कर सकता है कि क्या अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन किया. क्या किसी संधि का उल्लंघन हुआ?

सवाल – तो फिर कोई अंतरराष्ट्रीय दखल संभव ही नहीं?

– सीमित और अप्रत्यक्ष दखल संभव. वेनेजुएला ICJ में केस कर सकता है कि मादुरो उसके प्रेसीडेंट हैं, उनकी गिरफ्तारी से देश की संप्रुभता का उल्लंघन हुआ है. लेकिन ICJ भी अधिक से अधिक ये कह सकता है कि अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन किया, उसे ये कृत्य रोकना चाहिए. अमेरिका चाहे तो अनदेखा कर सकता है, जैसा कई बार हुआ है.

सवाल – क्या इस मामले में संयुक्त राष्ट्र संघ कुछ कर सकता है?

– लगता तो नहीं. वो भी बस ये कह सकता है कि ये मामला अंतरराष्ट्रीय शांति के लिए खतरा है. व्यवहारिक तौर पर अमेरिका खुद संयुक्त राष्ट्र संघ की सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्य है. अगर कोई प्रस्ताव संयुक्त राष्ट्र संघ में उसके खिलाफ आता है तो वो वीटो से उसको रोक देगा, लिहाजा ये रास्ता भी बंद ही है.

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