फिल्म में हुई देरी, प्रोड्यूसर ने बना डाली नई मूवी, दोनों फिल्मों का बजा डंका, मेकर्स हुए मालामाल – Dharmendra Amitabh Bachchan ram balram mr natwarlal movies produced by Producers same time both turn superhit coincidentally silsila underperformed

Last Updated:December 24, 2025, 00:03 IST
Amitabh Bachchan Rekha Superhit Movies : बॉलीवुड में हर डायरेक्टर-प्रोड्यूसर चाहते हैं कि उनकी फिल्म जल्द से जल्द बनकर तैयार हो जाए. फिर भी कई फिल्मों को बनाने में तो दस साल से भी ज्यादा का समय लग जाता है. कुछ फिल्में जल्दी बनकर तैयार हो जाती हैं. कोई डायरेक्टर-प्रोड्यूसर अपनी डिले हो रही फिल्म को बीच में छोड़कर नई फिल्म पूरी कर ले, ऐसा कम ही देखने को मिलता है. बॉलीवुड में यह कारनामा वैसे तो कई बार देखने को मिला है. 70 के दशक में एक प्रोड्यूसर की एक फिल्म चार साल में पूरी हुई लेकिन इसी बीच उन्होंने अपनी दूसरी फिल्म बना डाली और रिलीज भी कर दी. दिलचस्प बात यह है कि दोनों फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन किया. ये फिल्में कौन सी थीं, आइये जानते हैं इनसे जुड़े दिलचस्प तथ्य….. 
1975 की दीवार और कालजयी फिल्म शोले के बॉक्स ऑफिस पर झंडे गाड़ने के बाद अमिताभ बच्चन सुपरस्टार बन गए. इसके बाद आई फिल्मों ने उनके स्टारडम में चार चांद लगाए. 1977 के दौरान अमिताभ कई फिल्मों में बिजी थी. शोले के बाद उनकी जोड़ी 1981 की राम-बलराम मूवी में भी नजर आए थी लेकिन यह फिल्म पूरे चार साल में तैयार हुई थी. इस फिल्म का निर्देशन देवानंद के छोटे भाई विजय आनंद ने किया था. इसी बीच प्रोड्यूसर टोनी जुनेजा ने दूसरी फिल्म अमिताभ के साथ शुरू कर दी और 1979 में रिलीज भी कर दी. इस फिल्म का नाम था : मि. नटवरलाल. इन दोनों फिल्मों के बीच यश चोपड़ा की एक शानदार फिल्म भी बन रही थी जो कि बॉक्स ऑफिस पर उतनी सफल नहीं रही थी. आइये जानते हैं इन तीनों फिल्मों से जुड़े दिलचस्प तथ्य….

सबसे पहले बात करते हैं राम-बलराम फिल्म की. राम-बलराम में अमिताभ बच्चन-धर्मेंद्र, रेखा-जीनत अमान, अजीत, प्रेम चोपड़ा, हेलेन और अमजद खान लीड रोल में नजर आए थे. डायरेक्ट-एडिटर विजय आनंद थे. कहानी भी विजय आनंद ने ही लिखी थी. स्क्रीनप्ले कमलेश्वर-विजय आनंद ने लिखा था. डायलॉग कमलेश्वर ने लिखे थे. प्रोड्यूसर टीटो थे. म्यूजिक लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल का था. गीतकार आनंद बख्शी थे. फिल्म का म्यूजिक सुपरहिट रहा था. फिल्म के पॉप्युलर गानों में ‘हमसे भूल हो गई, हमका माफी दे दो’, ‘यार की खबर मिली, प्यार की नजर मिली’ ‘लड़की पसंद की मुश्किल से मिलती है’ शामिल हैं.

रजनीश के आश्रम से लौटकर जब विजय आनंद उर्फ गोल्डी मुंबई आ गए तो प्रोड्यूसर उनसे मिलने लगे थे. प्रोड्यूसर टीटी ने उन्हें राम-बलराम के लिए साइन किया था. टीटो का पूरा नाम कुशाल दीप सिंह जुनेजा था. राम-बलराम के लिए धर्मेंद्र-अमिताभ बच्चन को साइन किया गया था. धर्मेंद्र ने 6 लाख जबकि अमिताभ को 4 लाख मिले थे. राम-बलराम इकलौती फिल्म है, जिसमें रेखा-जीनत अमान ने साथ में कम किया है. कहा जाता है कि अमिताभ के कहने पर ही रेखा को फिल्म में काम मिला था.
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कहानी में विलेन का किरदार बाद में जोड़ा गया था. दोनों भाई भी शातिर थे. उनसे गलत काम करवाने वाला उनका चाचा ही था. अजीत की उन दिनों तबीयत खराब थी. उनका किरदार बहुत सशक्त था. फिल्म की शूटिंग की शुरुआत में ही अमिताभ को पीलिया हो गया. उस दौर में धर्मेंद्र की मांग अमिताभ से ज्यादा थी. फिल्म बनते-बनते अमिताभ की कई फिल्में हिट हो चुकी थीं. अब वो सुपरस्टार बन चुके थे.

अब प्रोड्यूसर्स को दोनों स्टार्स की डेट्स नहीं मिल रही थीं. इसी बीच प्रोड्यूसर टीटो ने अमिताभ को अपनी अगली फिल्म ‘मिस्टर नटवरलाल’ के लिए साइन कर लिया और उसकी शूटिंग भी शुरू कर दी थी. धर्मेंद्र अब खुद को इनसिक्योर समझने लगे. अब धर्मेंद्र ने राम-बलराम पर ध्यान देना छोड़ दिया. दोनों कई दूसरी फिल्मों में बिजी थे. जब भी समय मिलता तो मशीनी अंदाज में काम करते. विजय आनंद समझ चुके थे. फिल्म की क्वालिटी पर खासा असर पड़ रहा था. इसी दौरान विजय आनंद ने महसूस किया कि धर्मेंद्र काम पर ध्यान नहीं दे रहे जबकि अमिताभ घर से ही तैयारी करके आते थे. वो सीन भी जल्द समझ लेते थे. धर्मेंद्र ने फिल्म की डबिंग में भी नखरे दिखाए. गोल्डी ने कई बार उन्हें समझाया तो धर्मेंद्र ने उनकी मौजूदगी में डबिंग करना बंद कर दिया. राम-बलराम को कंप्लीट करने में चार साल से भी ज्यादा का समय लगा. यह 1980 की तीसरी बड़ी हिट फिल्म थी.

अब बात करते हैं मि. नटवरलाल की जिसका मुहुर्त 18 अप्रैल 1977 को हुआ था. फिल्म में अमिताभ बच्चन, रेखा, अजीत, कादर खान, इंद्राणी मुखर्जी और अमजद खान लीड रोल में नजर आए थे. स्टोरी ज्ञानदेव अग्निहोत्री ने, डायलॉग कादर खान, गीतकार आनंद बख्शी और संगीतकार राजेश रोशन थे. प्रोड्यूसर टोनी जुनेजा थे. स्क्रीनप्ले और डायरेक्शन राकेश कुमार का था. इस फिल्म का किस्सा ‘राम-बलराम’ से जुड़ा हुआ है. दो प्रोड्यूसर भाइयों टोनी और टीटो ने राम-बलराम फिल्म शुरू की थी. धर्मेंद्र की डेट्स नहीं मिल रही थीं ऐसे में उन्होंने मि. नटवरलाल शुरू कर दी. यह फिल्म 8 जून 1979 में रिलीज हुई थी.

मिथलेश कुमार श्रीवास्तव एक जालसाज आदमी था. बहुत बार पुलिस को चकमा दे चुका था. बताया जाता है कि ताजमहल और दिल्ली का लालकिला तक बेच चुका था. वह नटवरलाल के नाम से मशहूर था. मिथलेश की जिंदगी से इंस्पायर्ड होकर मि. नटवरलाल फिल्म का टाइटल और हीरो के कैरेक्टर की इंस्पायरेशन ली गई. फिल्म का टाइटल नटवरलाल रखे जाने पर असली नटवरलाल के वकील का लीगल नोटिस आ गया था. ऐसे में फिल्म का नाम बदलकर मिस्टर नटवरलाल कर दिया गया.

अमिताभ की भाभी का रोल पहले निरुपा रॉय को करना था लेकिन फिर उन्हें बताए बिना इंद्राणी मुखर्जी के साथ फिल्म की शूटिंग शुरू की गई थी. खून-पसीना की टीम इस फिल्म में भी काम कर रही थी. खून-पसीना राकेश कुमार के ही निर्देशन में बनी थी. राजेश रोशन ने ‘मि. नटवरलाल’ में अमिताभ को फिल्म में गाना गाने के लिए मनाया था. यह गाना था : मेरे पास आओ मेरे दोस्तो, एक किस्सा सुनाऊं’. यह एक मशाला फिल्म थी. फिल्म में एक्शन-कॉमेडी-सुपरहिट गाने सबकुछ थ. मेन विलेन के रोल में अमजद खान मौजूद थे. ‘परदेसिया ये सच है पिया’ आज भी उतनी ही पॉप्युलर है. मि. नटवरलाल का बजट 1.8 करोड़ था. फिल्म ने 3.25 करोड़ का कलेक्शन किया. यह एक सेमी हिट फिल्म साबित हुई थी.
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December 24, 2025, 00:03 IST
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फिल्म में हुई देरी, प्रोड्यूसर ने बना डाली नई मूवी, दोनों फिल्मों का बजा डंका



