Alwar Darshan Park| West to Wonder in Alwar

Last Updated:May 09, 2026, 08:29 IST
Alwar Darshan Park: अलवर नगर विकास न्यास ने 84 लाख की लागत से सूर्य नगर में ‘अलवर दर्शन पार्क’ विकसित किया है. इस पार्क में पुराने कबाड़ और स्क्रैप मटेरियल से जिले के 11 प्रसिद्ध दर्शनीय स्थल और वन्यजीवों के मॉडल बनाए गए हैं. इनमें मूसी महारानी की छतरी, भानगढ़ किला, बाला किला और सिलीसेढ़ लेक पैलेस प्रमुख हैं. वेस्ट टू वंडर की तर्ज पर बना यह पार्क अपनी रचनात्मकता और कला के कारण पर्यटकों के बीच बेहद लोकप्रिय हो रहा है, जिससे स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा मिल रहा है.
अलवर नगर विकास न्यास ने शहर के सूर्य नगर पार्क का कायाकल्प करते हुए इसे ‘अलवर दर्शन पार्क’ के रूप में विकसित किया है. करीब 84 लाख रुपये की लागत से तैयार हुआ यह पार्क अब पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया है. इस पार्क की सबसे बड़ी खासियत यहाँ स्थापित किए गए 11 दर्शनीय स्थलों के मॉडल हैं, जिन्हें पूरी तरह से वेस्ट मैटेरियल (कबाड़) का इस्तेमाल कर बनाया गया है. इस अनूठी पहल के जरिए लोग एक ही जगह पर जिले की ऐतिहासिक धरोहरों की झलक देख पा रहे हैं, जो शहर के सौंदर्यीकरण में भी चार चांद लगा रहा है.
अलवर नगर विकास न्यास की सचिव के अनुसार, शहर के सूर्य नगर पार्क को 84 लाख रुपये की लागत से ‘अलवर दर्शन पार्क’ के रूप में भव्य रूप दिया गया है. इस पार्क की मुख्य विशेषता यहाँ स्थापित 11 शानदार स्केलपचर हैं, जिन्हें पूरी तरह वेस्ट मैटेरियल से तैयार किया गया है. इन कलाकृतियों के माध्यम से पर्यटक एक ही स्थान पर मूसी महारानी की छतरी, बाला किला, फतेह जंग गुम्बद, नीलकंठ मंदिर, भानगढ़ किला, सिटी पैलेस और सिलीसेढ पैलेस जैसी ऐतिहासिक धरोहरों का दीदार कर सकते हैं. इनके साथ ही वन्यजीवों के प्रति आकर्षण बढ़ाने के लिए टाइगर, बारहसिंघा, लैपर्ड और हरिण के मॉडल भी पार्क में प्रदर्शित किए गए हैं, जो अब पर्यटकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बन गए हैं.
अलवर नगर विकास न्यास की इस विशेष पहल से अब सूर्य नगर बी-ब्लॉक का ‘दर्शन पार्क’ स्थानीय निवासियों और पर्यटकों के लिए एक अनूठा केंद्र बन गया है. यहाँ आने वाले लोगों को एक ही स्थान पर अलवर की समृद्ध विरासत, गौरवशाली इतिहास और अद्भुत कला का जबरदस्त संगम देखने को मिलेगा. वेस्ट मैटेरियल से तैयार की गई ऐतिहासिक इमारतों और वन्यजीवों की ये कलाकृतियाँ न केवल जिले की संस्कृति को प्रदर्शित करती हैं, बल्कि शहर की खूबसूरती में भी इजाफा कर रही हैं. अपनी इन्हीं विशेषताओं के कारण यह पार्क अब शहर के सबसे पसंदीदा भ्रमण स्थलों में से एक बनकर उभरा है.
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अलवर नगर विकास न्यास की सचिव ने बताया कि इस दर्शन पार्क के निर्माण में ‘कबाड़ से कला’ का बेहतरीन उदाहरण पेश किया गया है. यहाँ स्थापित 11 शानदार स्केलपचर को तैयार करने के लिए लोहे की चेन, पुराने डस्टबिन और ऑटोमोबाइल के बेकार पार्ट्स का इस्तेमाल किया गया है. इसके अलावा, कबाड़ी हो चुके स्टॉल और पार्कों की टूटी-फूटी रेलिंग जैसी अनुपयोगी चीजों को भी कलाकृतियों में ढाला गया है. बेकार और कबाड़ की इन चीजों से बनी ऐतिहासिक धरोहरों की प्रतिकृतियाँ अब पर्यटकों के लिए आकर्षण का मुख्य केंद्र बन गई हैं, जो पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ शहर के सौंदर्यीकरण को भी नया आयाम दे रही हैं.
नगर विकास न्यास द्वारा विकसित इस पार्क में कबाड़ से बनी कलाकृतियों को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं. अनुपयोगी चेन, पुराने ऑटोमोबाइल पार्ट्स और टूटी हुई रेलिंग जैसे वेस्ट मैटेरियल से तैयार किए गए ये सभी 11 स्केलपचर पर्यटकों और स्थानीय निवासियों के बीच चर्चा का विषय बने हुए हैं. आने वाले लोग न केवल इन ऐतिहासिक और वन्यजीव मॉडलों की सुंदरता की सराहना कर रहे हैं, बल्कि कबाड़ के इतने रचनात्मक उपयोग को देखकर भी काफी प्रभावित हो रहे हैं. यही कारण है कि यह पार्क अब शहर के सबसे पसंदीदा और आकर्षक स्थलों में शामिल हो गया है.
सूर्यनगर बी-ब्लॉक में बना यह ‘वेस्ट टू वंडर’ पार्क अलवर की विरासत, गौरव और वन्य जीवन को एक नए नजरिए से पेश कर रहा है. यहाँ 100% कबाड़ (स्क्रैप मटेरियल) का उपयोग करते हुए 11 बड़े और आकर्षक शिल्प व स्मारकों का निर्माण किया गया है, जो शहर की ऐतिहासिक सुंदरता को जीवंत करते हैं. कबाड़ के इस रचनात्मक और कलात्मक पुनर्चक्रण के कारण यह पार्क ‘मेक इन इंडिया’ और ‘स्वच्छ भारत’ अभियान की सच्ची भावना को भी चरितार्थ कर रहा है. अपनी इन्हीं खूबियों के चलते यह स्थान अब पर्यटकों के लिए अलवर की संस्कृति और आधुनिक स्वच्छता दृष्टिकोण को समझने का एक खास जरिया बन गया है.
अलवर के इस अनूठे पार्क में कलाकारों ने अपनी रचनात्मकता और कौशल का परिचय देते हुए बेकार पड़ी अनुपयोगी वस्तुओं को नई जान दी है. कबाड़ से तैयार किए गए इन स्मारकों और शिल्प को देखकर पर्यटकों को न केवल अलवर के इतिहास पर गर्व महसूस हो रहा है, बल्कि कलाकारों की कल्पनाशीलता भी उन्हें काफी प्रभावित कर रही है. यही कारण है कि यहाँ आने वाला हर व्यक्ति इन प्रतीकों को देखकर उत्साहित है और यह स्थान अब जिले के सबसे पसंदीदा पर्यटन स्थलों में से एक बन चुका है.
अलवर के सूर्य नगर में इस पार्क के विकसित होने से शहर के पर्यटन क्षेत्र को एक नई ऊर्जा मिली है. यहाँ आने वाले पर्यटकों को अब एक ही स्थान पर अलवर के वास्तविक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक खजानों की विस्तृत जानकारी मिल रही है. कबाड़ से बनी इन अद्भुत कलाकृतियों के माध्यम से लोग जिले की विरासत और गौरवशाली इतिहास को करीब से जान पा रहे हैं, जिससे अलवर के पर्यटन मानचित्र पर इस स्थान की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है. स्थानीय निवासियों के साथ-साथ बाहर से आने वाले सैलानियों के लिए भी यह पार्क अब जिले की पहचान का एक अनिवार्य हिस्सा बन गया है.
सूर्यनगर पार्क में भानगढ़, बाला किला, मूसी महारानी छतरी, सिटी पैलेस, फतेह जंग गुम्बज, नीलकंठ मंदिर और सिलीसेढ़ पैलेस जैसे 11 शिल्प कबाड़ से बने हैं. यहाँ बाघ, तेंदुआ, बारहसिंगा और चीतल के मॉडल भी पर्यटकों को लुभा रहे हैं. यह पार्क अलवर की ऐतिहासिक विरासत और वन्य जीवन का अद्भुत संगम पेश करता है.
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