टमाटर के फटने को कैसे रोकें? | How to Stop Tomato Fruit Cracking Farmer Tips.

Last Updated:January 07, 2026, 07:17 IST
How to Stop Tomato Fruit Cracking Farmer Tips: टमाटर की खेती में फ्रूट क्रैकिंग एक बड़ी चुनौती है, जिसका मुख्य कारण अनियमित सिंचाई और मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी है. एग्रीकल्चर एक्सपर्ट दिनेश जाखड़ बताते हैं कि लंबे समय के सूखे के बाद अचानक अधिक पानी देने से टमाटर का अंदरूनी हिस्सा तेजी से फैलता है, जिससे बाहरी छिलका फट जाता है. इससे न केवल पैदावार कम होती है, बल्कि गुणवत्ता खराब होने से बाजार में दाम भी कम मिलते हैं. इस समस्या से बचने के लिए किसानों को संतुलित सिंचाई प्रबंधन और बोरॉन जैसे पोषक तत्वों का छिड़काव करना चाहिए.

टमाटर की खेती में फ्रूट क्रैकिंग यानी फलों का फटना किसानों के लिए एक बड़ी और आम समस्या है. इस कारण न केवल उत्पादन में कमी आती है, बल्कि बाजार में टमाटर की गुणवत्ता भी प्रभावित होती है, जिससे किसानों को सीधा आर्थिक नुकसान झेलना पड़ता है. फटे हुए टमाटर अधिक समय तक टिक नहीं पाते और जल्दी खराब होने लगते हैं; साथ ही उन पर फफूंद और कीटों का प्रकोप भी तेजी से बढ़ जाता है. इसके परिणामस्वरूप किसानों को मंडी में उचित मूल्य नहीं मिल पाता है. हालांकि, खेती के दौरान कुछ महत्वपूर्ण बातों और सावधानियों का ध्यान रखकर किसान इस समस्या का प्रभावी समाधान कर सकते हैं और अपनी फसल को सुरक्षित रख सकते हैं.

एग्रीकल्चर एक्सपर्ट दिनेश जाखड़ के अनुसार, फ्रूट क्रैकिंग का सबसे प्रमुख कारण सिंचाई में असंतुलन है. जब लंबे समय तक खेत में नमी की कमी बनी रहती है और फिर अचानक अधिक मात्रा में पानी दिया जाता है, तो फल के अंदर का गूदा बहुत तेजी से फैलता है. इस स्थिति में टमाटर की बाहरी त्वचा अंदरूनी फैलाव की गति के साथ तालमेल नहीं बिठा पाती, जिससे फल पर अत्यधिक दबाव बनता है और वह फट जाता है. ऐसे में किसानों को फसल की सिंचाई के प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना चाहिए ताकि नमी का स्तर स्थिर बना रहे और इस समस्या को रोका जा सके.

दिनेश जाखड़ ने आगे बताया कि दिन और रात के तापमान में होने वाला भारी अंतर भी टमाटर के फटने की समस्या को काफी बढ़ा देता है. दिन की तेज गर्मी और रात का ठंडा वातावरण फल की बाहरी त्वचा को कमजोर कर देता है, जिससे वह फटने लगती है. इसके साथ ही मौसम में अचानक बदलाव, तेज धूप, ठंडी हवाएं और वातावरण में अधिक नमी फल की त्वचा पर अतिरिक्त दबाव डालती हैं, जिससे क्रैकिंग की संभावना कई गुना बढ़ जाती है. इस समस्या से बचाव के लिए आवश्यकतानुसार कैल्शियम नाइट्रेट, बोरॉन या अन्य सूक्ष्म पोषक तत्वों का छिड़काव करना बेहद फायदेमंद रहता है. साथ ही, अत्यधिक गर्मी के दौरान पौधों को आंशिक छाया प्रदान करने से भी टमाटर फटने की समस्या कम होती है और फसल का उत्पादन बेहतर होता है.
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एग्रीकल्चर एक्सपर्ट के अनुसार, पोषक तत्वों की कमी, विशेषकर कैल्शियम और बोरॉन की कमी भी फ्रूट क्रैकिंग का एक बड़ा कारण है. ऐसे में किसानों को टमाटर की फसल में कैल्शियम की मात्रा बढ़ानी चाहिए, क्योंकि यह फल की कोशिकाओं को मजबूती प्रदान करता है और उसकी त्वचा को लचीला बनाता है. वहीं दूसरी ओर, बोरॉन कोशिकाओं के विभाजन और उनके सही विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. इन दोनों तत्वों की कमी होने से फल की त्वचा काफी कमजोर हो जाती है, जिसके परिणामस्वरूप फल हल्के दबाव में भी आसानी से फट सकते हैं.

इसके अलावा, सबसे खास बात यह है कि फ्रूट क्रैकिंग से बचाव के लिए सही सिंचाई प्रबंधन बेहद आवश्यक है. टमाटर के पौधों को एक साथ अधिक पानी देने के बजाय थोड़ी-थोड़ी मात्रा में लेकिन नियमित रूप से पानी देना चाहिए. इसके लिए ड्रिप सिंचाई पद्धति (टपक सिंचाई) अपनाना सबसे बेहतर रहता है, क्योंकि इससे मिट्टी में नमी का स्तर हमेशा संतुलित रहता है. साथ ही, गर्म मौसम में पानी की मात्रा और बार-बार सिंचाई करने की आवृत्ति बढ़ानी चाहिए, जबकि ठंडे मौसम में जरूरत के अनुसार ही सिंचाई में कमी करनी चाहिए.

एग्रीकल्चर एक्सपर्ट दिनेश जाखड़ ने बताया कि टमाटर की खेती में मल्चिंग का प्रयोग किसानों के लिए बहुत फायदेमंद रहता है. खेत में भूसा, सूखी घास, पॉलिथीन या जैविक मल्च का उपयोग करने से मिट्टी की नमी लंबे समय तक बरकरार रहती है और तापमान भी स्थिर बना रहता है. मल्चिंग की मदद से जड़ों का विकास बेहतर होता है, खरपतवार की समस्या कम होती है और फलों में दरार आने यानी क्रैकिंग की संभावना भी काफी हद तक कम हो जाती है. इसके अलावा, बेहतर परिणामों के लिए किसानों को हमेशा क्रैकिंग-रोधी किस्मों का ही चयन करना चाहिए और समय-समय पर अपने खेत की मिट्टी की जांच जरूर करानी चाहिए.
First Published :
January 07, 2026, 07:17 IST
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