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Hyderabad Abids History: नवाबों के शहर में एक मुलाज़िम के नाम पर कैसे बस गया पूरा बाजार, कहानी कर देगी हैरान

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दुकान टूटी, टॉकीज़ बनी, कॉम्प्लेक्स आया… फिर भी जिंदा रहा इस शख्स का नाम

Last Updated:September 30, 2026, 06:52 IST

Hyderabad Abids History: हैदराबाद के मशहूर ‘आबिड्स’ बाजार का नाम किसी राजा नहीं, बल्कि छठे निज़ाम के आर्मेनियाई सहायक अल्बर्ट आबिद के नाम पर पड़ा था. 19वीं सदी में अल्बर्ट ने यहाँ ‘आबिद एंड कंपनी’ नाम से एक आलीशान स्टोर खोला, जहाँ निज़ाम भी खरीदारी करते थे. बाद में 1939 में इस इमारत को तोड़कर पैलेस टॉकीज़ बना और 1980 के दशक में यह एक आधुनिक शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में बदल गया. दो बार इमारतें टूटने के बावजूद, अल्बर्ट आबिद के नाम पर रखा गया यह इलाका आज भी हैदराबाद की प्रमुख व्यावसायिक पहचान बना हुआ है.

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Hyderabad: हैदराबाद का दिल कहे जाने वाले आबिड्स इलाके की पहचान आज भले ही शहर के सबसे व्यस्त व्यावसायिक बाज़ारों में होती है. लेकिन इसका इतिहास बेहद दिलचस्प और अनोखा है. आम तौर पर हमारे देश में शहरों, सड़कों और बाज़ारों के नाम राजा-महाराजाओं, नवाबों या बड़े राजनेताओं के नाम पर रखे जाते हैं. मगर हैदराबाद के इस मशहूर इलाके का नाम किसी नवाब के नाम पर नहीं, बल्कि हैदराबाद के छठे निज़ाम के एक निजी मुलाज़िम की दुकान पर पड़ा था. आज यह जगह कमर्शियल हब बन चुकी है, लेकिन इसके पीछे की कहानी किसी पुरानी दास्तान से कम नहीं है. डेकन लाइब्रेरी के अशफ़ाक बताते हैं कि इस नाम के पीछे एक विदेशी शख्स की कामयाबी की कहानी छुपी हुई है.

इतिहास के पन्नों को पलटें तो पता चलता है कि 19वीं सदी के आख़िरी दौर में, जब हैदराबाद रियासत पर छठे निज़ाम मीर महबूब अली ख़ान का शासन था, तब उनके दरबार में आर्मेनियाई मूल का एक शख्स आया. इस शख्स का नाम अल्बर्ट आबिद था, जो निज़ाम का निजी सहायक यानी वैलेट नियुक्त हुआ. अपनी बुद्धिमत्ता, लगन और निज़ाम के साथ अच्छे व भरोसेमंद रिश्तों के चलते अल्बर्ट ने जल्द ही व्यापार की दुनिया में क़दम रखा. अल्बर्ट को व्यापार की अच्छी समझ थी और निज़ाम का संरक्षण मिलने से उसके लिए राहें आसान हो गईं.

आबिद एंड कंपनी: पहला बड़ा डिपार्टमेंटल स्टोरउस दौर में अल्बर्ट आबिद ने नामपल्ली और बशीरबाग़ के बीच रोमन वास्तुकला की एक बेहद ख़ूबसूरत शैली में एक आलीशान इमारत बनवाई. दोहरे खंभों और अर्ध-गोलाकार गैलरी वाली इस भव्य इमारत में उसने अपना एक शानदार डिपार्टमेंटल स्टोर खोला, जिसका नाम रखा गया ‘आबिद एंड कंपनी’. यह उस ज़माने का हैदराबाद का पहला बड़ा और आधुनिक कमर्शियल स्टोर था. इस स्टोर में विदेशों से आयातित महंगे कपड़े, विलासिता का सामान, खूबसूरत क्रॉकरी और विदेशी घड़ियाँ मिलती थीं. दुकान की शोहरत इतनी तेजी से बढ़ी कि ख़ुद निज़ाम और शाही परिवार के लोग यहाँ ख़रीदारी के लिए पहुँचने लगे.

महारानी विक्टोरिया की जुबली पर खास सजावटइतिहासकार बताते हैं कि साल 1887 में महारानी विक्टोरिया की गोल्डन जुबली के मौक़े पर इस शानदार दुकान को ख़ास रोशनी और दीपों से सजाया गया था. उस वक्त यह इमारत देखने में बेहद अद्भुत लग रही थी. लोगों के बीच यह जगह इतनी ज्यादा लोकप्रिय हो गई कि लोग इसे पहचान के तौर पर इस्तेमाल करने लगे. पहले इसे ‘आबिद शॉप’, फिर ‘आबिद रोड’ और आख़िरकार समय के साथ इसे सिर्फ़ ‘आबिड्स’ कहा जाने लगा. यह नाम लोगों की जुबान पर ऐसा चढ़ा कि आज तक कायम है.

दुकान से टॉकीज़ और फिर शॉपिंग कॉम्प्लेक्स का सफरहालाँकि, वक्त के थपेड़ों के साथ रोमन वास्तुकला की यह ऐतिहासिक इमारत हमेशा के लिए टिक न सकी. आधुनिकीकरण की दौड़ में साल 1939 में ‘आबिद एंड कंपनी’ के मूल ढांचे को हमेशा के लिए गिरा दिया गया. इसके बाद उस ज़मीन पर शहर का चर्चित और शानदार सिनेमाघर ‘पैलेस टॉकीज़’ बनाया गया. दशकों तक सिनेमा प्रेमियों का मनोरंजन करने के बाद 1980 के दशक में पैलेस टॉकीज़ भी बंद हो गया. इसके बाद उस ऐतिहासिक जगह ने एक नए आधुनिक शॉपिंग कॉम्प्लेक्स का रूप ले लिया. इमारतें ढह गईं, स्वरूप बदल गया और कई दशक बीत गए, लेकिन अल्बर्ट आबिद का दिया हुआ नाम आज भी जीवित है. आबिड्स आज भी हैदराबाद के ऐतिहासिक गौरव और आधुनिक व्यापार के संगम का सबसे जीवंत प्रतीक बना हुआ है.

About the Authorvicky Rathore

Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…

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Hyderabad,Hyderabad,Telangana

First Published :

September 30, 2026, 06:52 IST

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