India role in ending Russia-Ukraine war: ‘भारत खत्म करा सकता है रूस यूक्रेन जंग’, फिनलैंड के राष्ट्रपति को भरोसा

फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब ने भारत को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म कराने में भारत बहुत अहम भूमिका निभा सकता है. फर्स्टपोस्ट की मैनेजिंग एडिटर पलकी शर्मा को दिए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में उन्होंने कहा, भारत रूस और यूक्रेन दोनों से अच्छे संबंध रखता है, इसलिए अगर कोई देश इस युद्ध को खत्म करने में मध्यस्थता कर सकता है, तो वह भारत है. स्टब के मुताबिक, भारत की डिप्लोमेसी और लीडरशिप का संतुलित रवैया आज दुनिया के लिए एक उदाहरण है.
स्टब ने भारत की भूमिका की तारीफ करते हुए कहा, भारत की विदेश नीति आज दुनिया के लिए एक मॉडल बन चुकी है. चाहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हों या विदेश मंत्री एस. जयशंकर, दोनों की रणनीतिक सोच यह दिखाती है कि भारत अब वैश्विक मंचों पर सिर्फ सुनने नहीं, बल्कि बोलने और दिशा देने वाला देश है. उन्होंने कहा, भारत की खासियत यह है कि वह सबके साथ दोस्ती रखता है. रूस से भी उसके ऐतिहासिक रिश्ते हैं, अमेरिका और यूरोपीय यूनियन से भी साझेदारी है, और चीन के साथ भी संवाद बनाए रखता है. स्टब ने कहा कि यही संतुलन आज के तनावभरे दौर में भारत को बाकी देशों से अलग बनाता है. हर देश चाहता है कि वह किसी न किसी पक्ष में खड़ा दिखे, लेकिन भारत ने साबित किया है कि निष्पक्ष रहकर भी आप वैश्विक प्रभाव डाल सकते हैं.
पीएम मोदी, शी जिनपिंग को आना चाहिए आगे
रूस-यूक्रेन जंग पर बात करते हुए स्टब ने कहा कि इस संघर्ष को खत्म करने के लिए अब बड़े खिलाड़ी आगे आएं. उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि अब समय है जब बड़े नेता चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा साथ आएं. ये देश उपनिवेशवाद का दर्द समझते हैं, इसलिए इनकी मध्यस्थता इस जंग को खत्म करने में मदद कर सकती है. उनका मानना है कि युद्ध को रोकने के लिए सिर्फ यूरोप और अमेरिका की कोशिशें काफी नहीं होंगी, बल्कि ग्लोबल साउथ यानी एशिया और अफ्रीका के बड़े देशों की भागीदारी जरूरी है.
भारत की हर बात सुन रही दुनिया
फिनलैंड के राष्ट्रपति ने कहा कि भारत की नीति मल्टीफैक्टोरल यानी बहुआयामी है. भारत ने दिखाया है कि कूटनीति केवल बयानबाज़ी नहीं, बल्कि बुद्धिमानी और धैर्य से काम करने की कला है. यही कारण है कि आज भारत हर मंच पर सुना जा रहा है. भारत ने रूस-यूक्रेन जंग में तटस्थ रहते हुए भी कई बार युद्धविराम और संवाद की अपील की है. पीएम मोदी ने पुतिन से कहा था आज का युग युद्ध का नहीं है. यह एक लाइन पूरी दुनिया में गूंजी थी.
फिनलैंड का भरोसा- भारत कर सकता है कमाल
फिनलैंड के राष्ट्रपति का यह बयान ऐसे समय आया है जब यूरोप खुद युद्ध से थक चुका है और समाधान की तलाश में है. स्टब का कहना है कि भारत जैसे देश अगर आगे आते हैं, तो शांति की उम्मीद बढ़ सकती है. उन्होंने कहा, भारत के पास भरोसा है, अनुभव है और संवाद की क्षमता है. दुनिया को अब ऐसे नेतृत्व की जरूरत है जो विभाजन नहीं, समाधान की दिशा में सोचता हो, और भारत वही कर रहा है. पिछले कुछ सालों में भारत ने G20, BRICS और SCO जैसे मंचों पर अपनी भूमिका को मजबूती से रखा है. रूस-यूक्रेन युद्ध, ऊर्जा संकट, या वैश्विक दक्षिण की आवाज हर जगह भारत की मौजूदगी महसूस की गई है. अब जब यूरोप के नेता खुद भारत की भूमिका को कुंजी बता रहे हैं, तो यह साफ संकेत है कि नई विश्व व्यवस्था में भारत का रोल अब केवल दर्शक का नहीं, बल्कि निर्णायक खिलाड़ी का है.



