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‘मजा ना कराया तो पैसे वापस’, पाकिस्तानी DG-ISPR की सड़क छाप भाषा, डर और बेचैनी में यह कैसी हरकत? | Mazaa na karaya toh paise vaapis Pakistani DG-ISPR Press Conference street slang

Last Updated:January 07, 2026, 13:12 IST

पाकिस्तान सेना के डीजी आईएसपीआर की हालिया प्रेस ब्रीफिंग ने कूटनीतिक और सैन्य मर्यादाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. सड़कछाप और तंज भरी भाषा के साथ भारत और अफगानिस्तान को दी गई धमकियों को सुरक्षा एजेंसियां आत्मविश्वास नहीं, बल्कि पाक सेना की गहरी असुरक्षा और आंतरिक दबाव का संकेत मान रही हैं. ‘हार्ड स्टेट’ बनने की घोषणा और खुले टकराव की बातों ने यह साफ कर दिया है कि पाकिस्तान अब संवाद के बजाय उकसावे और टकराव की राह पर बढ़ता दिख रहा है.'मजा ना कराया तो... पाक DG-ISPR की सड़क छाप भाषा, डर-बेचैनी में यह कैसी हरकत?

Pakistani DG-ISPR: पाकिस्तानी सेना को एक बार फिर अपनी ही जुबान की वजह से फजीहत झेलनी पड़ रही है. इस बार वजह बनी है इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस के महानिदेशक यानी डीजी-आईएसपीआर (DG ISPR) की हालिया प्रेस ब्रीफिंग. पाकिस्‍तानी सेना के डीजी-आईएसपीआर ने प्रेस ब्रीफिंग के दौरान न सिर्फ कूटनीतिक मर्यादाओं को तार-तार किया है, बल्कि पाकिस्तान आर्मी के अंदर की घबराई और असहजता को जगजाहिर कर दिया है. सुरक्षा और खुफिया हलकों में इस ब्रीफिंग को पेशेवर गिरावट के सार्वजनिक प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है.

प्रेस ब्रीफिंग के दौरान डीजी-आईएसपीआर ने जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया, वह सैन्य प्रवक्ताओं की अब तक की परंपरा को शर्मशार करने वाली थी. डीजी-आईएसपीआर की तरह से ‘मज़ा ना कराया तो पैसे वापस’ जैसी सड़कछाप टिप्पणी न केवल बचकानी थी, बल्कि यह दिखाती है कि पाकिस्तान की सेना अब गंभीर सैन्य संवाद के बजाय मजाक और तंज को हथियार बना रही है. डिफेर्स एक्‍पर्ट का कहना है कि किसी सेवारत सैन्य अधिकारी द्वारा इस स्तर की छिछली और व्यंग्यात्मक भाषा, आत्मविश्वास नहीं बल्कि हड़बड़ाहट और बौखलाहट का संकेत होती है.

नजर आई पाकिस्‍तानी सेना की झुंझलाहट और कुंठाडीजी-आईएसपीआर की प्रेस ब्रीफिंग अब तक सुनियोजित भारत-विरोधी बयानबाजी के लिए जानी जाती रही है, लेकिन इस बार मामला अलग था. इस बार पाकिस्‍तानी सेना की विचारधारा नहीं, झुंझलाहट और कुंठा बोल रही थी. ब्रीफिंग के दौरान भारत और अफगानिस्तान के खिलाफ जिस तरह की धमकी भरी और उकसाने वाली भाषा का इस्‍तेमाल किया गया, वह पाकिस्तान के उस दोहरे चेहरे को भी उजागर करती है, जिसमें वह अंतरराष्ट्रीय मंचों पर शांति की बात करता है और घरेलू मंचों पर टकराव को हवा देता है. डीजी-आईएसपीआर ने खुले तौर पर कहा कि पाकिस्तान को 2026 में एक ‘हार्ड स्टेट’ बनना पड़ेगा.

नजर आई पाकिस्‍तानी सेना की डर और हीनभावनाडिफेंस एक्‍सपर्ट्स के अनुसार, यदि कोई देश ‘हार्ड’ बनने की बात करता है, तो वह खुद ही यह बता रहा है कि अब तक उसकी स्थिति कमजोर रही है. पाकिस्‍तानी डीजी-आईएसपीआर ने इस ब्रीफिंग् में यह भी कहा कि कि भारत कभी पाकिस्तान के अस्तित्व को स्वीकार नहीं करेगा. यह बयान कूटनीति नहीं, बल्कि वर्षों से पाले गए डर और हीनभावना को दिखा रहा है. इसके साथ ही पाकिस्‍तानी डीजी-आईएसपीआर का यह कहना कि राजनीति, सेना और जनता तीनों किसी भी तरह के टकराव के लिए एकजुट हैं. यह बयान साफ दिखा रहा है कि देश में फैले असंतोष को दबाने और सेना के वर्चस्व को सही ठहराने की कोशिश है.

अपनी आवाम को बहलाने की कोशिश में पाकिस्‍तानप्रेस ब्रीफिंग में डीजी-आईएसपीआर ने नाटकीय अंदाज में यह भी कहा कि चाहे दुश्मन ‘ऊपर से आए, नीचे से आए, दाएं से आए, बाएं से आए, अकेला आए या साथ आए’, पाकिस्तान उससे निपटने के लिए तैयार है. डिफेंस एक्‍सपर्ट्स के अनुसार, यह बयान रणनीति से ज्यादा डायलॉगबाजी थी, जिसका मकसद डर पैदा करना कम और अपने देश की जनता को बहलाना ज्यादा था. इस प्रेस ब्रीफिंग ने पाकिस्तान आर्मी की उस कूटनीतिक ढाल को भी हटा दिया है, जिसके पीछे वह वर्षों से छिपता रहा है. पहली बार पाकिस्‍तान ने इतनी बेबाकी से भारत को लेकर दुश्‍मनी को सार्वजनिक मंच पर कबूला गया है.

About the AuthorAnoop Kumar MishraAssistant Editor

Anoop Kumar Mishra is associated with Digital for the last 6 years and is working on the post of Assistant Editor. He writes on Health, aviation and Defence sector. He also covers development related to …और पढ़ें

First Published :

January 07, 2026, 13:08 IST

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