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jain and ramdev mandir or shankheshwar parshwanath tirth barmer

मनमोहन सेजू/ बाड़मेर:- अपने-अपने धर्म और भगवान को लेकर जहां लोग कट्टर हो जाते हैं और हिंसा तक के लिए उतारू हो जाते हैं, वहीं भारत में आज भी कई ऐसी जगह है, जहां एक ही स्थान पर कई धर्मों के लोग पूजा करते हैं. ऐसी ही एक जगह राजस्थान के बालोतरा में है. बालोतरा में एक मंदिर ऐसा भी है, जहां हिंदू, मुस्लिम, जैन सभी लोग पूजा करते हैं. इस स्थान का नाम श्री शंखेश्वर पार्श्वनाथ रणुजा तीर्थ है. इसे बाबा रामदेव मंदिर के नाम से भी जानते हैं. अलग-अलग धर्म और समुदायों के बीच भाईचारे और एकता का प्रतीक माने जाने वाले इस खास मंदिर की बारे में जानते हैं.

बाबा रामदेव जी के 640वें भादवा मेले का विधिवत शुभारंभ 5 सितंबर भादवा शुक्ल दूज से होगा. लेकिन आस्था का सैलाब अभी से ही रामदेवरा में उमड़ रहा है. गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान सहित देशभर से लाखों श्रद्धालु बाबा रामदेव के दर्शन करने रामदेवरा पहुंचते हैं. ऐसे में बालोतरा के श्री शंखेश्वर पार्श्वनाथ रणुजा तीर्थ में भी श्रद्धालु धोक लगाकर रामदेवरा के लिए रवाना होते हैं. बालोतरा के इस प्रसिद्ध मंदिर में एक तरफ जैन मंदिर, तो दूसरी ओर बाबा रामदेव की भी मूर्ति लगी हुई है. यहां सुबह एक तरफ जहां जैन धर्म के लोग पक्षाल, केसर पूजा और नवकार मंत्र जपते हैं, तो वहीं दूसरी तरफ हिन्दू देवी-देवताओं की आरती भी गूंज रही होती है. कई लोगों के लिए ये बड़े आश्चर्य वाली बात होती है.

रामसा पीर के रूप में मुस्लिम लोग करते हैं पूजाबता दें कि मंदिर में बैठे बाबा रामदेवजी महाराज ऐसे लोकप्रिय लोकदेवता हैं, जिनकी पूजा हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदाय के लोग करते हैं. रामदेवजी के भक्त हिंदू और मुस्लिम दोनों ही समुदायों के लोग हैं. मुस्लिम उन्हें ‘रामसा पीर’ के नाम से जानते हैं और उनकी पूजा करते हैं. बाबा रामदेव का उ‌द्देश्य भी यही रहा, जो इस मंदिर में सामाजिक एकता और भाईचारे के रूप में देखने को मिलती है.

मंदिर में है 23 मूर्तियांयह मंदिर 1 लाख स्कावयर फिट में बना हुआ है. इस अनोखे धाम में शंखेश्वर पार्श्वनाथ, गुरु मन्दिर, विजय शांति सूरी जी मन्दिर, चक्रेश्वर महावीर समेत 9 जैन भगवान और दादा गुरुदेव सहित कुल 23 जैन और हिंदू मूर्तियों की पूजा होती है. मंदिर इतना भव्य है कि यहां आने वाले लोग इसे देखकर प्रभावित हो जाते हैं. यहां पहले सन 2000 में रामदेवजी का मंदिर बनाया गया और साल 2005 में जैन समाज का शिखरबन्द मन्दिर बनाया गया. इस मंदिर को पूरी तरह बनने में 15 साल लग गए. बालोतरा के इस मंदिर को रामदेवरा मंदिर के नाम से भी जाना जाता है. रामदेव मंदिर राजस्थानी शैली में बना है. यहां सुंदर नक्काशी, मूर्तियां और रंग-बिरंगे चित्रों से सजी दीवारें हैं. यहां हर साल लाखों श्र‌द्धालु आते हैं.

रामदेवरा का लगता है मेलारामदेव महाराज को एक महान संत और अवतारी पुरुष माना जाता है. उन्होंने समाज में समानता और भक्ति का संदेश दिया. ये बाबा गरीब और वंचित लोगों के रक्षक के रूप में प्रसिद्ध हैं. यहां हर साल सितंबर-अक्टूबर में बड़ा मेला लगता है, जिसमें दूर-दूर से लोग आते हैं. इस मेले को ‘रामदेवरा मेला’ के नाम से जाना जाता है. बाबा रामदेव के भक्त हर साल राजस्थान और अन्य राज्यों से पैदल चलकर रामदेवरा पहुंचते हैं. इस यात्रा को ‘रामदेवरा पद यात्रा’ कहा जाता है. 5 सितंबर से बाबा रामदेव का 640वां मेले का शुभारंभ होगा.

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भगवान पार्श्वनाथ का है विशेष महत्वअब श्री शंखेश्वर पार्श्वनाथ रणुजा तीर्थ के बारे में बात करें, तो यह एक महत्वपूर्ण जैन तीर्थ स्थल है. यह तीर्थस्थल जैन धर्म के 23वें तीर्थकर भगवान पार्श्वनाथ को समर्पित है और जैन समुदाय के लिए एक पवित्र स्थान माना जाता है. भगवान पार्श्वनाथ का जैन धर्म में विशेष महत्व है. मंदिर में रखी उनकी मूर्ति लोगों को काफी आकर्षित करती है. यहां जैन धर्म से जुड़े आयोजन और पर्व मनाए जाते रहते हैं, जिनमें विशेष पूजा, ध्यान और प्रवचन होते हैं. रणुजा तीर्थ जैन मंदिरों की खास शैली में बनाई गई है. यहां के मुख्य गर्भगृह में भगवान पार्श्वनाथ की भव्य मूर्ति है. यह मूर्ति संगमरमर बनी हुई है. इसके अलावा गर्भगृह में भगवान महावीर, आदिनाथ और अन्य जैन तीर्थकरों की मूर्तियां भी हैं, जिनकी लोग पूजा करते हैं.

बालोतरा पश्चिम राजस्थान के जोधपुर सम्भाग में शामिल है और यह स्थान सड़क और रेल मार्ग से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है. निकटतम रेलवे स्टेशन बलोतरा जंक्शन है और हवाई मार्ग से पहुंचने के लिए निकटतम हवाई अड्‌डा जोधपुर है. मंदिर में आने वाले भक्तों के लिए भोजन और ठहरने की सुविधा भी उपलब्ध रहती है.

Tags: Barmer news, Local18, Rajasthan news

FIRST PUBLISHED : September 3, 2024, 15:43 IST

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