Kanhaiya Lal murder case | उदयपुर कन्हैयालाल हत्याकांड: सभी 8 आरोपियों पर आतंकवाद की धाराओं में चलेगा मुकदमा, हाईकोर्ट ने याचिकाएं खारिज कीं

Last Updated:November 06, 2026, 19:15 IST
Kanhaiyalal Murder Case Rajasthan : राजस्थान हाईकोर्ट ने कन्हैयालाल हत्याकांड के आठ आरोपियों की याचिकाएं खारिज कर दी हैं. अब सभी आरोपियों पर आतंकवाद से जुड़ी धाराओं के तहत मुकदमा चलेगा. हाईकोर्ट ने साफ कर दिया कि ट्रायल कोर्ट के आदेश में दखल देने की जरूरत नहीं है. यानी अब मामले की सुनवाई तय किए गए आरोपों के आधार पर आगे बढ़ेगी. सभी 8 आरोपियों को इस स्तर पर कोई राहत नहीं मिली है.
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कन्हैयालाल हत्याकांड: हाईकोर्ट ने 8 आरोपियों की याचिकाएं खारिज कीं.
जयपुर. उदयपुर के चर्चित कन्हैयालाल हत्याकांड में राजस्थान हाईकोर्ट से आरोपियों को राहत नहीं मिली है. कोर्ट ने मामले के सभी 8 आरोपियों की याचिकाएं खारिज कर दी हैं. इसके साथ ही अब सभी आरोपियों पर आतंकवाद से जुड़ी धाराओं के तहत मुकदमा चलेगा. हाईकोर्ट ने एनआईए की विशेष अदालत की ओर से आरोप तय करने के आदेश में दखल देने से इनकार कर दिया है.
मुख्य न्यायाधीश संजय के. अग्रवाल और जस्टिस समीर जैन की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाया. आरोपियों में मोहम्मद रियाज अत्तारी और मोहम्मद गौस सहित कुल 8 लोग शामिल हैं. इन सभी ने ट्रायल कोर्ट की ओर से आरोप तय किए जाने के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. लेकिन कोर्ट ने उनकी याचिकाओं को स्वीकार नहीं किया.
आरोप तय करने के आदेश को दी थी चुनौतीकन्हैयालाल हत्याकांड की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने की थी. मामले में एनआईए की विशेष अदालत ने आरोपियों के खिलाफ UAPA, भारतीय दंड संहिता (IPC) और आर्म्स एक्ट की धाराओं में आरोप तय किए थे. आरोपियों ने इन आरोपों को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. उनकी याचिकाओं पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने साफ कर दिया कि ट्रायल कोर्ट के आदेश में दखल देने की जरूरत नहीं है. यानी अब मामले की सुनवाई तय किए गए आरोपों के आधार पर आगे बढ़ेगी. सभी 8 आरोपियों को इस स्तर पर कोई राहत नहीं मिली है.
हाईकोर्ट ने कहा- आरोप तय करते समय मिनी ट्रायल नहीं हो सकताखंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि आरोप तय करने के चरण में मिनी ट्रायल नहीं चलाया जा सकता. इसका मतलब है कि इस शुरुआती स्तर पर अदालत पूरे मामले की तरह सभी साक्ष्यों की विस्तार से जांच करके अंतिम फैसला नहीं देती. इस दौरान यह देखा जाता है कि अभियोजन की ओर से पेश किए गए साक्ष्यों के आधार पर प्रथम दृष्टया मामला बनता है या नहीं. हाईकोर्ट के मुताबिक, अगर अभियोजन के साक्ष्यों से पहली नजर में मामला बनता है तो आरोप तय करना सही है. इस स्तर पर ही यह तय नहीं किया जा सकता कि आरोपी दोषी हैं या नहीं. दोष साबित होने या न होने का फैसला मुकदमे की सुनवाई और साक्ष्यों की जांच के बाद होगा.
वीडियो, धमकियों और आरोपियों के संबंधों की जांच ट्रायल में होगीहाईकोर्ट ने यह भी कहा कि मामले में सामने आए वीडियो, धमकियों और आरोपियों के बीच संबंधों जैसे पहलुओं की जांच ट्रायल के दौरान की जाएगी. इन सभी बातों पर सुनवाई के समय साक्ष्यों के आधार पर विचार होगा. आरोप तय करने के चरण में इन पहलुओं पर मिनी ट्रायल नहीं किया जा सकता. इस फैसले के बाद कन्हैयालाल हत्याकांड में सभी 8 आरोपियों के खिलाफ तय धाराओं में मुकदमे की कार्यवाही आगे बढ़ेगी. अदालत ने फिलहाल आरोप तय करने के आदेश को बरकरार रखा है. हालांकि, हाईकोर्ट के इस फैसले का मतलब आरोपियों को दोषी ठहराना नहीं है. मामले में अंतिम फैसला ट्रायल पूरा होने और अदालत में पेश साक्ष्यों की जांच के बाद ही होगा.
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आनंद पाण्डेय वर्तमान में हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अ…
Jaipur,Jaipur,Rajasthan
First Published :
November 06, 2026, 19:15 IST



