राजस्थान में सब्जियों की फसल बचाने के देसी और वैज्ञानिक उपाय जानें.

Last Updated:November 09, 2025, 20:36 IST
राजस्थान के नागौर जिले में मौसम के बदलाव के कारण रबी और सब्जियों की फसलों में कीटों का प्रकोप बढ़ने लगा है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ी है. एग्रीकल्चर एक्सपर्ट बाबूलाल के अनुसार, माइट, जैसिड, होपर और विषाणु रोगों का प्रभाव बढ़ सकता है, जिनसे बचने के लिए इमिडाक्लोप्रिड जैसी रासायनिक दवाओं का छिड़काव किया जा सकता है.
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नागौर. राजस्थान में लगातार मौसम में बदलाव जारी है, जिससे रबी की फसलों के साथ-साथ सब्जियों की फसलों में भी कीटों का खतरा बढ़ने लगा है. इससे किसानों की चिंता लगातार बढ़ रही है, ऐसे में किसान फसल को बचाने के उपाय ढूंढ रहे हैं. हम किसानों को कुछ देसी नुस्खों के बारे में बताएंगे, जिनसे सब्जियों की फसल को नुकसान से बचाया जा सके. किसान समय पर सतर्कता और उचित उपचार अपनाकर अपनी फसल को नुकसान से बचा सकते हैं. एग्रीकल्चर एक्सपर्ट बाबूलाल ने बताया कि बारिश के बाद भिंडी, मिर्च, बैंगन और कदू वर्गीय फसलों में माइट, जैसिड और होपर का प्रकोप बढ़ जाता है. ऐसे में यदि किसानों को यह प्रकोप दिखाई दे, तो इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एसएल की एक मिली प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें.
वहीं, मिर्च और टमाटर की फसल में यदि कोई पौधा विषाणु रोग से ग्रसित हो जाए, तो उसे उखाड़कर जमीन में दबा देना चाहिए. यदि प्रकोप अधिक हो, तो इमिडाक्लोप्रिड 0.3 मिली प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव आसमान साफ रहने पर करें. एग्रीकल्चर एक्सपर्ट के अनुसार, मिर्च की फसल में एन्थ्रेक्नोज़ रोग भी बड़ा नुकसान पहुंचाता है। इसके नियंत्रण के लिए डाइफेनोकोनाजोल 25 ईसी की 0.5 मिली प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करना चाहिए. इसके अलावा, इस मौसम में फसलों और सब्जियों में दीमक के प्रकोप की संभावना बनी रहती है. यदि खेत में दीमक दिखाई दे, तो क्लोरपाइरीफॉस 20 ईसी की 4.0 मिली प्रति लीटर पानी सिंचाई के साथ देनी चाहिए.
प्राकृतिक नुस्खों से ऐसे पाए समाधान
एग्रीकल्चर एक्सपर्ट बाबूलाल ने बताया कि रासायनिक दवाओं के साथ-साथ किसान प्राकृतिक नुस्खों का भी उपयोग कर सकते हैं. इससे मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है और कीटनाशकों पर खर्च कम होता है. नीम का तेल और नीम की खली माइट, एफिड और व्हाइटफ्लाई जैसे कीटों पर प्रभावी मानी जाती है. इसके अलावा, लहसुन और हरी मिर्च का घोल बनाकर छिड़काव करने से चूसक कीटों का प्रकोप कम किया जा सकता है. गोमूत्र और छाछ का घोल फफूंदनाशी के रूप में काम करता है और विषाणु रोगों की रोकथाम में मदद करता है. वहीं, राख का छिड़काव दीमक और अन्य भूमिगत कीटों को रोकने में कारगर सिद्ध होता है.
Hello I am Monali, born and brought up in Jaipur. Working in media industry from last 9 years as an News presenter cum news editor. Came so far worked with media houses like First India News, Etv Bharat and NEW…और पढ़ें
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Location :
Nagaur,Rajasthan
First Published :
November 09, 2025, 20:36 IST
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जानिए मौसम बदलने पर सब्जियों की फसल को कीटों से बचाने उपाय



