Kota News | Rajasthan News | चंबल किनारे अद्भुत कुंड; यहां सर्दियों में गर्म और गर्मियों में ठंडा पानी, चर्म रोग होते हैं दूर

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चंबल किनारे अद्भुत कुंड; यहां सर्दियों में गर्म और गर्मियों में ठंडा पानी!
Last Updated:July 10, 2026, 15:40 IST
Kota Chambal Kund Story: कोटा में चंबल नदी किनारे एक रहस्यमयी कुंड है, जहां सर्दी में गर्म और गर्मी में ठंडा पानी रहता है. 200-300 साल पुराने इस कुंड का पानी चर्म रोगों में लाभकारी माना जाता है. स्थानीय निवासी पवन पंचोली ने बताया कि यह कुंड लगभग 200 से 300 साल पुराना है. इसका निर्माण विशाल चट्टानों को काटकर किया गया था.
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कोटा. राजस्थान के हाड़ौती अंचल में चंबल नदी के किनारे एक ऐसा प्राचीन और रहस्यमयी कुंड स्थित है, जिसके बारे में कई रोचक मान्यताएं प्रचलित हैं. इस कुंड की सबसे बड़ी खासियत यह बताई जाती है कि यहां मौसम के विपरीत पानी का तापमान बदल जाता है. कड़ाके की सर्दी में इस कुंड का पानी गर्म महसूस होता है, जबकि भीषण गर्मी में यही पानी बेहद ठंडा हो जाता है.
स्थानीय निवासी पवन पंचोली ने बताया कि यह कुंड लगभग 200 से 300 साल पुराना है. इसका निर्माण विशाल चट्टानों को काटकर किया गया था. इस कुंड में आने वाले पानी का स्रोत आज भी रहस्य बना हुआ है. जमीन के नीचे से आने वाला यह पानी कहां से आता है, इसका अब तक कोई स्पष्ट वैज्ञानिक प्रमाण सामने नहीं आया है. पवन पंचोली के अनुसार, उनका परिवार पिछले तीन पीढ़ियों से इस कुंड की सेवा करता आ रहा है. सबसे पहले उनके नानाजी यहां पूजा-पाठ करते थे. उनके बाद उनके पिता ने इसकी जिम्मेदारी संभाली और पिछले 25 वर्षों से वे स्वयं यहां नियमित सेवा कर रहे हैं.
भोजन बनाने में भी होता था उपयोगउन्होंने बताया कि वर्षों पहले, जब इस क्षेत्र में पानी की पाइपलाइन या अन्य सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं, तब यहां होने वाले धार्मिक आयोजनों और गोठ में भोजन पकाने के लिए इसी पवित्र कुंड के पानी का उपयोग किया जाता था.
चर्म रोगों के लिए लाभकारी मानते हैं लोगस्थानीय मान्यताओं के अनुसार, इस कुंड के पानी में कई औषधीय गुण हैं. लोगों का विश्वास है कि दाद, खाज, खुजली और अन्य चर्म रोगों से पीड़ित व्यक्ति यदि इस पानी से स्नान करे तो उसे लाभ मिलता है. यही वजह है कि दूर-दूर से लोग यहां स्नान करने आते हैं. कई श्रद्धालु इस पानी को बोतलों में भरकर अपने घर भी ले जाते हैं.
भगवान का अभिषेक भी इसी जल से होता हैइस कुंड का पानी बेहद पवित्र माना जाता है. मंदिर में स्थापित भगवान के विग्रह का पंचस्नान और दैनिक अभिषेक इसी जल से किया जाता है. कुंड का पानी लगातार बहता रहता है और यहां से एक गोमुखी के माध्यम से सीधे चंबल नदी में जाकर मिल जाता है. श्रद्धालु गोमुखी से गिरते पानी के नीचे बैठकर भी श्रद्धापूर्वक स्नान करते हैं.
भक्त खुद रखते हैं स्वच्छता का ध्यानकुंड की पवित्रता और स्वच्छता बनाए रखने के लिए स्थानीय श्रद्धालु प्रतिदिन सुबह और शाम यहां आकर सफाई करते हैं. इसके अलावा पानी का बहाव तेज होने के कारण नीचे जमा होने वाली गंदगी भी बहकर नदी की ओर चली जाती है. इसी वजह से कुंड का पानी हमेशा साफ और पारदर्शी बना रहता है.
About the AuthorAnand Pandey
आनंद पाण्डेय वर्तमान में हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाते हुए उन्होंने राजनीति, अपराध और लाइफ…और पढ़ें
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