मोदी के दोस्त का बड़ा खेल, बांग्लादेश की फैक्ट्रिया में पड़ जाएंगे ताले, भारत की गारमेंट इंडस्ट्री में बरसेंगी नौकरियां

Last Updated:April 04, 2025, 05:01 IST
Bangladesh Textile Crisis: अमेरिका में बांग्लादेश और चीन पर ऊंचे टैरिफ के बाद भारतीय टेक्सटाइल इंडस्ट्री में रोजगार के नए अवसर बढ़ने की संभावना है. भारतीय गारमेंट कंपनियां अब अमेरिकी बाजार में अपनी पकड़ मजबूत …और पढ़ें
ट्रंप के टैरिफ के बाद भारतीय गारमेंट्स इंडस्ट्री में मौके आने वाले हैं.
हाइलाइट्स
भारतीय गारमेंट इंडस्ट्री में नई नौकरियों की बाढ़ आने की उम्मीद.ट्रंप के टैरिफ के बाद निर्यात में उछाल, युवाओं को मिलेगा फायदा.टेक्सटाइल सेक्टर में निवेश आएगा और ग्रोथ होने की संभावना.
ेपीएम मोदी को दोस्त बताने वाले डोनाल्ड ट्रंप ने ऐसी चाल चली है, जिससे बांग्लादेश की गारमेंट इंडस्ट्री का संकट में आना तय है. जबकि भारत के लिए यह कमाई का मौका है. दरअसल, ट्रंप ने बांग्लादेश से आने वाले रेडीमेड कपड़ों पर दोगुना टैक्स लगा दिया है. टैक्स भारत पर भी बढ़ा है, लेकिन यह अब बांग्लादेश से काफी कम हो गया है. सीधे शब्दों में समझें तो अमेरिका में अब बांग्लादेश का कपड़ा भारत के कपड़े से महंगा हो गया है. अब से पहले तक बांग्लादेश का कपड़ा सस्ता था, जिससे वह यूएस मार्केट में छाया हुआ था, लेकिन अब कम टैरिफ होने की वजह से भारत का कपड़ा ज्यादा पसंद किया जाएगा. इससे इंडियन गारमेंट इंडस्ट्री में नौकरियां बरसेंगी. आइए इसके आंकड़ों के जरिए समझते हैं.
ट्रंप प्रशासन ने बांग्लादेश से आने वाले गारमेंट्स पर 37% टैरिफ लगाया है, जबकि भारत पर 27% तय होगा. सभी एक्सपोर्ट पर पहले से घोषित 10% बेसलाइन टैरिफ भी प्रभावी रहेगा, जिसके बाद बांग्लादेश पर कुल टैरिफ 47% और भारत पर 36% तक पहुंच जाएगा. साफ है कि बांग्लादेश का कपड़ा अब अमेरिका में भारतीय कपड़े से 10 फीसदी सस्ता होगा. बांग्लादेश की कमाई का मुख्य जरिया रेडीमेड गारमेंट एक्सपोर्ट से आता है. 2022 में बांग्लादेश ने अमेरिका को 11.7 बिलियन डॉलर के गारमेंट्स निर्यात किए थे, जो उसकी कुल निर्यात आय का एक बड़ा हिस्सा है. अमेरिका बांग्लादेश के गारमेंट्स का सबसे बड़ा बाजार है, और यह इंडस्ट्री वहां लाखों लोगों को रोजगार देती है. लेकिन ट्रंप के नए टैरिफ के बाद, बांग्लादेशी गारमेंट्स की कीमत अमेरिकी बाजार में 47% तक बढ़ सकती है. इससे वहां की फैक्ट्रियों पर ताले लगने का खतरा मंडरा रहा है. जबकि भारत का गारमेंट निर्यात 2022 में लगभग 16 बिलियन डॉलर का था, जिसमें से अमेरिका को करीब 4.5 बिलियन डॉलर का निर्यात हुआ.
आसान भाषा में समझिएउदाहरण के लिए, अगर एक बांग्लादेशी टी-शर्ट की कीमत पहले 5 डॉलर थी, तो अब टैरिफ के बाद यह 7.35 डॉलर हो जाएगी. इससे अमेरिकी खरीदारों के लिए बांग्लादेशी उत्पाद महंगे हो जाएंगे, और उनकी मांग में भारी गिरावट की आशंका है. विशेषज्ञों का मानना है कि इससे बांग्लादेश की गारमेंट फैक्ट्रियों में उत्पादन घट सकता है, और कई छोटी इकाइयां बंद होने की कगार पर पहुंच सकती हैं. दूसरी ओर, मान लीजिए, एक भारतीय टी-शर्ट की कीमत भी 5 डॉलर है. 37% टैरिफ के बाद यह 6.80 डॉलर की पड़ेगी, जो बांग्लादेशी टी-शर्ट से 55 सेंट सस्ती होगी. यह छोटा अंतर बड़े ऑर्डरों में लाखों डॉलर का फर्क ला सकता है. भारतीय गारमेंट निर्माता इस मौके को भुनाने के लिए तैयार हैं, और उम्मीद है कि अमेरिकी बाजार में भारत की हिस्सेदारी बढ़ेगी.
कौन कितना कपड़ा बेचता है अमेरिका मेंबांग्लादेश का अमेरिकी गारमेंट निर्यात (2022): 11.7 बिलियन डॉलरभारत का अमेरिकी गारमेंट निर्यात (2022): 4.5 बिलियन डॉलरबांग्लादेश पर टैरिफ: 37% + 10% बेसलाइन = 47%भारत पर टैरिफ: 26% + 10% बेसलाइन = 36%संभावित कीमत वृद्धि (प्रति टी-शर्ट): बांग्लादेश- 47% (2.35 डॉलर), भारत- 37% (1.80 डॉलर)
भारत की तैयारी तो जान लीजिएभारतीय गारमेंट इंडस्ट्री पहले से ही इस अवसर को भुनाने की तैयारी में जुट गई है. तमिलनाडु और गुजरात जैसे गारमेंट हब में उत्पादन बढ़ाने की योजना बन रही है. विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगले दो साल में भारत का गारमेंट निर्यात अमेरिका में 6-7 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है, जो बांग्लादेश से होने वाली कमी को पूरा करेगा. भारत के वाणिज्य मंत्रालय ने भी कहा कि हम इस मौके का लाभ उठाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं.
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New Delhi,New Delhi,Delhi
First Published :
April 04, 2025, 05:01 IST
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मोदी के दोस्त का खेल, बांग्लादेश की फैक्ट्रियों पर संकट, भारत के लिए मौका