Mystery of Haat Kalika Temple: यहां जागृत स्वरूप में मां काली, सेना की कुमाऊं रेजीमेंट की हैं आराध्य देवी, हर सुबह दिखता बड़ा चमत्कार

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यहां जागृत स्वरूप में मां काली, सेना की कुमाऊं रेजीमेंट की हैं आराध्य देवी
Last Updated:September 20, 2026, 08:49 IST
Mystery of Haat Kalika Temple: उत्तराखंड में एक ऐसा शक्तिपीठ है जहां मां काली जागृत स्वरूप में विराजमान हैं. यह मंदिर भारतीय सेना की कुमाऊं रेजीमेंट की आराध्य देवी का है. यहां हर सुबह एक बड़ा चमत्कार देखने को मिलता है, जिसे देखकर श्रद्धालु और सैनिक अचंभित रह जाते हैं. इस मंदिर की महिमा और चमत्कारिक घटनाओं को जानने के लिए पढ़ें पूरी खबर.
Mystery of Haat Kalika Temple: देवभूमि उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के गंगोलीहाट में घने देवदार के जंगलों के बीच स्थित ‘मां हाटकलिका मंदिर’ एक प्रसिद्ध और जागृत शक्तिपीठ है. मान्यता है कि माता काली पश्चिम बंगाल से आकर गंगोलीहाट में बस गईं थीं. स्कंद पुराण के मानस खंड के अनुसार, इस स्थान पर माता काली ने सुमैया नामक दैत्य का वध किया था. हाटकलिका मंदिर, मां महाकाली के प्रति अनगिनत भक्तों की अटूट आस्था का पवित्र केंद्र है. यह मंदिर अपनी दिव्य आध्यात्मिक ऊर्जा, शानदार इतिहास और समृद्ध धार्मिक परंपराओं के लिए एक खास पहचान रखता है. मान्यता है कि यहां मां काली जागृत स्वरूप में विराजमान हैं और दूर-दूर से श्रद्धालु अपनी मनोकामनाएं लेकर पहुंचते हैं. मंदिर की आस्था और यहां से जुड़ी लोकमान्यताएं इसे विशेष बनाती हैं.
कुमाऊं रेजिमेंट की आराध्य और संरक्षक देवीयह मंदिर भारतीय सेना की कुमाऊं रेजिमेंट की आराध्य और संरक्षक देवी माना जाता है. यहां के सैनिकों की अटूट आस्था इस मंदिर से जुड़ी हुई है. इस सिद्ध पीठ की स्थापना आदि गुरु शंकराचार्य ने की थी. इसका निर्माण 9वीं से 14वीं शताब्दी के दौरान कत्यूरी और चंद वंश के राजाओं से जुड़ा हुआ माना जाता है. स्कंद पुराण के मानस खंड में इस स्थान का उल्लेख मिलता है. मान्यता है कि मां काली पश्चिम बंगाल से आकर यहां स्थापित हुईं और उन्होंने सुमैया नामक दैत्य का वध किया था. स्थानीय लोगों का कहना है कि रात के समय मां काली मंदिर में विश्राम करने के लिए आती हैं. मंदिर के पुजारी रोजाना रात को माता के लिए बिस्तर लगाते हैं और सुबह जब कपाट खोले जाते हैं, तो बिस्तर पर सिलवटें दिखाई देती हैं, जिसे भक्त चमत्कार मानते हैं.
क्या है मंदिर का रहस्य?स्थानीय धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां हाटकालिका को भगवान शिव की शक्ति और देवी काली के उग्र स्वरूप से जोड़ा जाता है. कहा जाता है कि मंदिर में देवी की शक्ति अत्यंत प्रभावशाली है. कई श्रद्धालु मानते हैं कि सच्चे मन से मां से प्रार्थना करने पर उनकी मनोकामना पूरी होती है. मंदिर से जुड़ी एक प्रसिद्ध मान्यता यह भी है कि यहां मां काली की पूजा से नकारात्मक शक्तियों और बाधाओं से मुक्ति मिलती है. विशेष अवसरों पर मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर पूजा-अर्चना करते हैं. नवरात्रि के समय यहां भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिलती है.
मां हाटकालिका के चमत्कारमंदिर में होने वाले धार्मिक अनुष्ठानों और श्रद्धालुओं के अनुभवों को लेकर कई चमत्कारिक कथाएं प्रचलित हैं. भक्तों का विश्वास है कि मां हाटकालिका संकट के समय अपने भक्तों की रक्षा करती हैं. सेना से जुड़े लोगों में भी इस मंदिर के प्रति विशेष श्रद्धा बताई जाती है और यहां सैनिकों द्वारा पूजा किए जाने की परंपरा का उल्लेख मिलता है. मंदिर परिसर में नवरात्रि और अन्य प्रमुख पर्वों के दौरान विशेष पूजा होती है. घंटियों की गूंज, मंत्रोच्चार और पहाड़ी वातावरण मंदिर की आध्यात्मिक अनुभूति को और गहरा बनाते हैं. धार्मिक आस्था, प्राचीन परंपराओं और लोककथाओं का संगम होने के कारण गंगोलीहाट का मां हाटकालिका मंदिर उत्तराखंड के प्रमुख देवी स्थलों में विशेष स्थान रखता है.
About the AuthorParag SharmaChief Sub Editor
पराग शर्मा Hindi Digital में Chief Sub Editor के पद पर कार्यरत हैं. वर्तमान में धर्म, ज्योतिष, ग्रह-नक्षत्र, राशि और वास्तु से जुड़ी खबरों पर काम कर रहे हैं. भारतीय धार्मिक परंपराओं, ज्योतिष शास्त्र, मेद…
September 20, 2026, 08:49 IST



