खरपतवार नहीं औषधीय गुणों की खान है ये पौधा, जोड़ों के दर्द में तो यह रामबाण औषधि, इसकी जड़ का काढ़ा शरीर को देता है ताकत

Last Updated:November 21, 2025, 20:24 IST
Health Tips : प्रकृति का छोटा-सा पौधा अतिबला हर किसी के लिए बड़ा सहारा बन सकता है! औषधीय गुणों से भरपूर यह पौधा ना केवल शरीर को ताकत देता है बल्कि जोड़ों के दर्द, नसों की कमजोरी और सर्दी-जुकाम जैसी समस्याओं में भी बेहद कारगर है. कम लागत में खेती योग्य यह पौधा किसानों के लिए अतिरिक्त आय का शानदार मौका बनकर उभर रहा है.
सीकर : प्रकृति में ऐसे अनेकों पेड़ पौधे पाए जाते हैं जो मानव के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं, ऐसा ही एक पौधा है अतिबला, इस पौधे के पत्ते और फल की अनोखी बनावट के कारण इसे आसानी से पहचाना जा सकता है. इसकी पत्तियां कंघी की तरह कटे-फटे किनारों वाली होती हैं, इसलिए लोग इसे कंघी का पौधा भी कहते हैं. दिखने में बहुत सामान्य लगने वाला यह पौधा वास्तव में औषधीय गुणों से भरपूर है. आयुर्वेद में इस पौधे का उपयोग दवा बनाने में भी किया जाता है. इस पौधे में अनेकों बीमारियों को दूर करने वाले गुण पाए जाते हैं.

आयुर्वेदिक डॉक्टर नरेंद्र कुमार ने बताया कि अतिबला को बलवर्धक और वातशामक गुणों के लिए जाना जाता है. इसकी जड़ और पत्तियों का उपयोग शरीर को ताकत देने, नसों को मजबूत करने और जोड़ों के दर्द से राहत दिलाने में किया जाता है. पुराने समय में इस पौधे को वैद्यों द्वारा कमजोरी, लगातार थकान सहित अनेक प्रकार के वात रोगों में प्राकृतिक उपचार के रूप में काम में लेते थे. इसकी गर्म प्रकृति शरीर में गर्मी लाती हैं. इसके अलावा यह पौधा शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बेहतर करता है.

अतिबला के पौधे में चोट, मोच, मांसपेशियों के दर्द और जकड़न जैसी समस्याओं में बेहद उपयोगी माना जाता है. आयुर्वेदिक डॉक्टर के अनुसार, इसके पत्तों और जड़ों को घरेलू नुस्खे में भी काम में लिया जाता है. यह पौधा त्वचा की जलन, रैशेज और सूजन को शांत करने में भी कारगर माना जाता है. अतिबला की इम्यूनिटी बढ़ाने वाली क्षमता के कारण इसका उपयोग सर्दी-जुकाम, खांसी और मौसमी संक्रमणों से राहत पाने में किया जाता है
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आयुर्वेदिक डॉक्टर नरेंद्र कुमार ने बताया कि अतिबला का काढ़ा भी शहरी के लिए बहुत फायदेमंद है. इसे पीने से शरीर में गर्मी संतुलित रहती है और रोग जल्दी नहीं लगते. इसके पौष्टिक तत्त्व शरीर में प्राकृतिक ढंग से शक्ति बढ़ाते हैं और लंबे समय तक स्वास्थ्य को बनाए रखने में मदद करते हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में अतिबला की जड़ को सुखाकर काढ़ा बनाया जाता है, जिसे थकान दूर करने और दर्द शांत करने के काम आती है.

इसके अलावा इसके पत्तों को पीसकर बनाया गया लेप त्वचा पर लगाकर जलन, सूजन और खुजली से राहत ली जाती है. इसकी जड़ को दूध में उबालकर टॉनिक की तरह काम में लिया जाता है. यह टॉनिक ताकत देता है, इससे अधिक काम करने पर भी थकावट नहीं आती है. अतिबला का पौधा आमतौर पर 1 से 2 फुट ऊंचा होता है और इसके तने पतले, हरे तथा लचीले होते हैं. इसकी पत्तियां हथेली के आकार की होती हैं जिनके किनारों पर गहरी कटिंग होती है, जिससे वे कंघी जैसी दिखती हैं.

राजस्थान के शुष्क और गर्म इलाकों में यह पौधा आसानी से उग जाता है क्योंकि इसे बहुत कम पानी की आवश्यकता होती है. राजस्थान में कम पानी और बंजर जमीन में खेती योग्य फसलों की तलाश करने वाले किसानों के लिए अतिबला की खेती एक अच्छा ऑप्शन है. आयुर्वेदिक कंपनियों में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है, जिसके कारण इसकी सूखी जड़ें बाजार में 180 से 250 रुपये प्रति किलो तक बिकती हैं. एक बीघा में इसकी खेती से किसान लगभग 20 से 30 हजार रुपये की अतिरिक्त आमदनी कमा सकते हैं. कम लागत, कम पानी और अच्छे लाभ के कारण यह पौधा किसानों के लिए फायदे का सौदा है.
First Published :
November 21, 2025, 20:24 IST
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खेतों में उगने वाला यह चमत्कारी पौधा जोड़ों का दर्द मिटाए, काढ़ा बढ़ाए ताकत



