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Opinion: अग्निवीर योजना पर राहुल गांधी पर सवाल, अग्निवीर के जवानों को मोदी सरकार में मिल रहा है उचित सम्मान

लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने एक बार फिर अग्निवीर योजना के माध्यम से केंद्र सरकार को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश की. लेकिन लोकसभा ने राहुल गांधी ने अग्निवीर योजना को लेकर जो टिप्पणी की है वो पूरी तरह से खोखली नज़र आती है और तथ्यों से परे है. आपको बता दूँ कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने लोकसभा में अग्निवीर योजना पर सवाल उठाते हुए कहा कि केंद्र सरकार द्वारा अग्निवीर के बलिदान पर मुआवजा नहीं दिया जाता। राहुल गांधी ने ये भी कहा कि अग्निवीर के जवान की अगर युद्ध में मौत हो जाती है तो उन्हें शहीद का दर्जा नहीं देती, राहुल गांधी ने ये सारी बाते हाल ही में अग्निवीर अजय सिंह के सन्दर्भ में बोली जिन्होंने इसी साल जनवरी में जम्मू-कश्मीर के राजौरी में एक लैंडमाइन विस्फोट में सर्वोच्च बलिदान दिया था।

लेकिन आपको बता दूँ कि कोई भी अग्निवीर युद्ध के दौरान या देश की सुरक्षा के दौरान अगर शहीद होता है तो केंद्र सरकार एक करोड़ रुपये की धनराशि उसके परिवार की सहायता में देती है।

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लोकसभा में दिए गए इस बयान से पहले भी राहुल गांधी ने अग्निवीर जवान अक्षय लक्ष्मण गावते को लेकर भी राहुल गांधी ने भ्रम फैलाया था

आपको बताऊ कि सियाचिन में तैनात अग्निवीर जवान अक्षय लक्ष्मण गावते की ड्यूटी के दौरान मौत हो गई थी। अक्षय गावते की पिछले साल अक्तूबर, 2023 में लाइन ऑफ ड्यूटी पर तैनाती के दौरान दुनिया के सबसे ऊंचे युद्ध क्षेत्र सियाचिन में मौत हो गई थी। लक्ष्मण गावते पहले अग्निवीर थे, जिनका ड्यूटी के दौरान निधन हुआ था। इनके निधन के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ट्वीट कर केंद्र सरकार पर निशाना साधा था. राहुल गांधी ने कहा था कि सियाचिन में, अग्निवीर गवाते अक्षय लक्ष्मण की शहादत का समाचार बहुत दुखद है। उनके परिवार को मेरी गहरी संवेदनाएं। एक युवा देश के लिए शहीद हो गया – सेवा के समय न ग्रेच्युटी न अन्य सैन्य सुविधाएं, और शहादत में परिवार को पेंशन तक नहीं। अग्निवीर, भारत के वीरों के अपमान की योजना है!

लेकिन एक आरटीआई से राहुल गांधी ने दावे खोखले साबित हुए है। एक आरटीआई से खुलासा हुआ है कि अक्षय लक्ष्मण गावते के परिजनों को केंद्र सरकार ने एक करोड़ रुपये से ज्यादा की आर्थिक मदद प्रदान की है। लक्ष्मण भारतीय सेना की फायर एंड फ्यूरी कोर (14 कोर) का हिस्सा थे, जो लद्दाख में तैनात है।आरटीआई जो सरकारी दस्तावेज है उसमे साफ तौर पर बताया गया था कि मृतक अक्षय लक्ष्मण गावते के परिवारजनों को अग्निपथ योजना के तहत आर्थिक मदद उपलब्ध कराई गई है। उन्होंने बताया कि कुल मिला कर एक करोड़ 30 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी गई है। इनमें 48 लाख रुपये गैर-अंशदायी बीमा (इंश्योरेंस कवर), 44 लाख रुपये की अनुग्रह राशि (एकमुश्त एक्स-ग्रेशिया), आर्मी वाइव्स वेलफेयर एसोसिएशन से 30,000 रुपये, आर्मी सेंट्रल वेलफेयर फंड से 8 लाख रुपये, सेवा निधि में अग्निवीर द्वारा दिए गए 30 फीसदी योगदान, जिसमें सरकार का भी बराबर योगदान होता है और पूरी राशि पर ब्याज दिया गया है। इसके अलावा परिजनों को मृत्यु की तारीख से चार साल पूरे होने तक शेष कार्यकाल के लिए भी वेतन भी दिया गया है।

जानते हैं कि सेना की वेबसाइट के अनुसार अग्निवीरों के शहीद होने पर उनके परिवार को क्या क्या सुविधाएं मिलती हैं

ड्यूटी पर शहीद होने पर (श्रेणी ‘Y/Z’)यदि अग्निवीर की ड्यूटी के दौरान मृत्यु हो जाती है (श्रेणी ‘Y/Z’), तो उन्हें ₹48 लाख का बीमा कवर, ₹44 लाख का अनुग्रह राशि, चार साल तक का पूर्ण वेतन और सेवा निधि, और सेवा निधि कोष में जमा राशि और सरकार का योगदान मिलेगा।

अगर ड्यूटी पर नहीं हुई अग्निवीर की मौत तब (श्रेणी X)यदि अग्निवीर की ड्यूटी के दौरान मृत्यु नहीं होती है (श्रेणी X), तो उन्हें ₹48 लाख का बीमा कवर और सेवा निधि कोष में जमा राशि और सरकार का योगदान मिलेगा।

अगर ड्यूटी के दौरान विकलांग हो गया है अग्निवीर तब

यदि अग्निवीर ड्यूटी के कारण विकलांग हो जाता है, तो उन्हें विकलांगता के स्तर (100%, 75% या 50%) के आधार पर ₹44 लाख, ₹25 लाख या ₹15 लाख का अनुग्रह राशि, चार साल तक का पूर्ण वेतन और सेवा निधि, और सेवा निधि कोष में जमा राशि और सरकार का योगदान मिलेगा।

राहुल गांधी ने “शहीद” शब्द पर भी की गलतबयानी*

राहुल गांधी ने लोकसभा में अग्निवीर अजय सिंह के सन्दर्भ में ये भी कहा कि केंद्र सरकार ने उन्हें शहीद का दर्जा नहीं दिया है. जबकि आपको बता दूँ कि राहुल गांधी ने इस मसले पर भी सदन में सही तथ्य नहीं रखे है. भारत में सेना और अर्धसैनिक बलो में शहीद जैसा कोई शब्द है ही नहीं।

शहीद शब्द को लेकर सेना ने कई बार स्पष्टीकरण दिया है कि देश के लिए जान देने वाले सैनिक को ‘मार्टर’ यानी  ‘शहीद’ कहा जाता है जो सही नहीं है। रक्षा मंत्रालय ने भी पहले कई बार कहा है कि ऐसे जवानों के लिये ‘शहीद’ अधिकारिक शब्द नही है .

हालांकि सेना ने कहा है कि देश की सुरक्षा और एकता के लिए कुर्बानी देने वाले सैनिकों को लिए छह शब्दों के इस्तेमाल किया जा सकता है जिसमे किल्ड इन एक्शन (कार्रवाई के दौरान मृत्यु) ,लेड डाउन देयर लाइफ्स (अपना जीवन न्यौछावर करना), सुप्रीम सेक्रिफाइस फॉर नेशन ( देश के लिए सर्वोच्च बलिदान), फॉलन हीरोज  (लड़ाई में मारे गए हीरो), इंडियन आर्मी ब्रेव्स (भारतीय सेना के वीर) , फॉलन सोल्जर्स (ऑपरेशन में मारे गए सैनिक) शामिल है .

आपको ये भी बता दूँ कि गृह मंत्रालय ने भी इसको लेकर 22 दिसंबर 2015 को लोक सभा में एक लिखित जवाब में कहा कि रक्षा मंत्रालय के मुताबिक ‘शहीद’ शब्द का प्रयोग सेना में ऑपरेशन या कार्रवाई के दौरान  मारे गए सैनिकों के संदर्भ में नही किया जाता है और न हीं सेन्ट्रल आर्म्ड पुलिस बल  या असम पुलिस के जवानों के लिये, यदि वह किसी ऑपरेशन में मारे गए हों.

ऐसे ही 16 जुलाई 2019 को लोक सभा में  गृह राज्य मंत्री से आतंकवादी हमलों में अपनी जान गंवाने वाले अर्धसैनिक बलों के जवानों को ‘शहीद’ का दर्जा देने के बारे में लिखित प्रश्न पूछा गया तो उन्होने कहा कि ऐसा कोई अधिकारिक नामकरण (नोमेनक्लेचर) नहीं है.

(डिस्‍क्‍लेमर- ये लेखक के निजी विचार हैं.)

Tags: Agniveer, PM Modi, Rahul gandhi

FIRST PUBLISHED : July 2, 2024, 12:15 IST

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