Property Knowledge : पुश्तैनी प्रॉपर्टी पर पत्नी और बेटी को भी मिलता है अधिकार या सिर्फ बेटों का हक

Last Updated:October 15, 2026, 23:09 IST
Property Knowledge : प्रॉपर्टी के मामले में कानून इतने पेचीदा हैं कि ज्यादातर लोगों को इसकी जानकारी ही नहीं होती है. बेटों के उत्तराधिकार के बारे में तो कुछ लोगों को पता भी होगा, लेकिन पत्नी और बेटी के उत्तराधिकार के बारे में बहुत कम लोगों को ही जानकारी होगी. आज हम इसी बारे में बात करें कि किसी संपत्ति पर पत्नी और बेटी को किस तरह उत्तराधिकार मिल सकता है.हिंदू उत्तराधिकार कानून में पत्नी, बेटे, बेटा और मां को पहला हक मिलता है.
नई दिल्ली. बिहार की राजधानी पटना के रहने वाले प्रभुनाथ की उम्र काफी ज्यादा हो चुकी है. गंभीर बीमारियों से ग्रसित प्रभुनाथ के मन में कई दिनों से अपनी वसीयत तैयार करने की इच्छा बार-बार जाग रही है. वैसे तो प्रभुनाथ पेशे से डॉक्टर थे और उन्हें अपने पुरखों से भी काफी संपत्ति मिली थी, लेकिन अपनी वसीयत तैयार करने से पहले वह काफी पशोपेश में हैं और संपत्ति से जुड़े कई सवाल उनके मन में उठ रहे हैं. अपने बेटों को लेकर वह पूरी तरह आश्वस्त हैं, लेकिन प्रॉपर्टी में पत्नी और बेटी को हिस्सा देने को लेकर कानून और अन्य पेच उनकी समझ से परे हैं. यह सवाल सिर्फ प्रभुनाथ का नहीं है और सिर्फ बिहार का भी नहीं है. यूपी, दिल्ली, महाराष्ट्र समेत देशभर में इस तरह के मसले हर साल सैकड़ों की संख्या में सामने आते हैं.
सबसे पहले इस बात की पड़ताल करते हैं कि क्या हिंदू उत्तराधिकार कानून में पत्नी और बेटी को संपत्ति पर अधिकार मिलता है या नहीं. इसका जवाब सीधा नहीं है, बल्कि यह इस बात पर निर्भर करता है कि संपत्ति किस प्रकार की है. हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1965 के तहत पत्नी और बेटी के अधिकार इस बात पर निर्भर करते हैं कि उस संपत्ति के मालिक की मौत वसीयत के बाद हुई है या फिर वसीयत के बिना और परिवार में कौन-कौन से जीवित उत्तराधिकारी हैं. एक बात तो तय है कि पत्नी और बेटी दोनों को कानून के तहत उत्तराधिकार मिलता है, लेकिन संपत्ति के प्रकार के साथ उनकी हिस्सेदारी अलग तरीके से तय होती है.
खुद कमाई प्रॉपर्टी कैसे निभाती है अहम रोलप्रभुनाथ के सामने भी यही स्थिति पैदा हो गई है कि वे अपनी पत्नी और बेटी को किस तरह उत्तराधिकार बनाएं और उन्हें कानून के तहत कितनी संपत्ति दे सकते हैं. यहां सबसे पहले समझते हैं खुद कमाई गई संपत्ति के बारे में. प्रभुनाथ ने जो संपत्तियां खुद कमाई या बनाई हैं, जैसे अपने नाम से मकान, दुकान या जमीन खरीदी है तो वे जीवित रहते ही इसे पत्नी, बेटी या बेटे अथवा सभी को जितना हिस्सा मन करे, उतना उपहार में दे सकते हैं या फिर वसीयत कर सकते हैं. इस संपत्ति पर पूरी तरह उनका ही अधिकार होगा और इस पर हिंदू उत्तराधिकार कानून सामान्य रूप में लागू नहीं होगा.
पुश्तैनी प्रॉपर्टी है तो क्या करना चाहिएप्रभुनाथ की शेष बची प्रॉपर्टी अगर पूरी तरह पुश्तैनी है तो इस संपत्ति में बेटे की तरह ही बेटी का भी बराबर का अधिकार जन्म के साथ होता है. साल 2005 में सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसला सुनाया था, जिसमें साफ कहा था कि बेटी विवाहित हो या अविवाहित उसका संपत्ति पर हक समाप्त नहीं हो सकता है. ऐसे मामले में प्रभुनाथ अपने बेटे और बेटी दोनों को ही उस संपत्ति में बराबर की हिस्सेदारी दे सकते हैं. अगर उन्हें सिर्फ बेटे को देना है तो उन्हें बेटी से सहमति पत्र बनवाना होगा.
प्रॉपर्टी वसीयत में मिली हो तो क्याअगर प्रभुनाथ की खुद कमाई संपत्ति और पैतृक संपत्ति के अलावा उनकी पत्नी अथवा बेटी को किसी अन्य से वसीयत में संपत्ति मिली है तो यह देखना होगा कि यह विरासत किसने की और उत्तराधिकार के समय लागू कानून क्या कहता है. पिता से विरासत में हर प्रॉपर्टी पुश्तैनी नहीं हो जाती है. एक और स्थिति है कि अगर प्रभुनाथ की मौत बिना वसीयत किए हो जाती है तो संपत्ति के उत्तराधिकार को अधिनियम की धारा 8 और 10 से तय किया जाएगा. ऐसे मामले में पहले पायदान पर जो उत्तराधिकारी होते हैं, उनमें मृतक की विधवा, बेटा, बेटी और मां शामिल हैं. इसका मतलब है कि इन चारों में ही संपत्ति का बराबर बंटवारा होगा. मसलन, अगर प्रभुनाथ के पास 60 लाख खुद बनाई संपत्ति है तो उनकी पत्नी, मां, बेटा और बेटी को 15-15 लाख की प्रॉपर्टी मिलेगी.
About the AuthorPramod Kumar Tiwari
प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…
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New Delhi,Delhi
First Published :
October 15, 2026, 23:05 IST



