Public Opinion:”परिवारवाद बंद हो, जमीनी कार्यकर्ताओं को मिले मौका”… पंचायत चुनाव पर भीलवाड़ा की जनता ने रखी बेबाक राय

Last Updated:October 16, 2026, 13:15 IST
Bhilwara Public Opinion: राजस्थान के भीलवाड़ा में पंचायती राज चुनाव के दौरान नेताओं के परिजनों को टिकट मिलने के खिलाफ जनता और स्थानीय नेताओं ने तीखा रोष व्यक्त किया है. लोकल 18 से बातचीत में लोगों ने कहा कि परिवारवाद के कारण दिन-रात पार्टी के लिए मेहनत करने वाले आम कार्यकर्ताओं का हक मारा जाता है. जनता और व्यापारियों का मानना है कि रिश्तेदारों को प्राथमिकता देने की बजाय जमीन पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं को चुनाव लड़ने का अवसर मिलना चाहिए ताकि विकास कार्यों में तेजी आ सके.
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Bhilwara: राजस्थान में पंचायती राज चुनावों का बिगुल बजते ही ग्रामीण राजनीति का पारा चढ़ गया है. एक तरफ जहां संभावित उम्मीदवार अपनी दावेदारी मजबूत करने में जुटे हैं, वहीं दूसरी तरफ बड़े नेताओं और मंत्रियों द्वारा अपने रिश्तेदारों को चुनावी मैदान में उतारने की प्रथा ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है. सवाल यह उठ रहा है कि क्या राजनीति में सिर्फ नेताओं के परिवार के सदस्यों को ही प्राथमिकता मिलनी चाहिए, या फिर लंबे समय से पार्टी और जनता के बीच रहकर जमीन पर पसीना बहाने वाले आम कार्यकर्ताओं को भी चुनाव लड़ने का हक मिलना चाहिए? इस गंभीर मुद्दे पर भीलवाड़ा की आम जनता और स्थानीय नेताओं ने लोकल 18 से खास बातचीत में अपनी राय खुलकर रखी है.
राजस्थान जन मंच के अध्यक्ष और स्थानीय व्यापारी कैलाश सोनी ने इस प्रथा को 100 प्रतिशत गलत बताया है. उनका कहना है कि यदि कोई बड़ा नेता खुद चुनाव लड़ना चाहे तो किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए, लेकिन नेताजी द्वारा अपनी पत्नी, बच्चों या रिश्तेदारों के लिए टिकट मांगना और उसमें अपनी ताकत का इस्तेमाल करना सरासर गलत है. उन्होंने कहा कि जो कार्यकर्ता दिन-रात पार्टी की नींव को सींचते हैं, रीति-नीति के अनुसार काम करते हैं और संगठन के लिए झंडा-बैनर उठाते हैं, उनका हक इन नेताओं के परिजनों की वजह से मारा जाता है. टिकट हमेशा जमीन पर मेहनत करने वाले कार्यकर्ताओं को ही मिलना चाहिए.
कार्यकर्ताओं का टूटता है विश्वास और बढ़ती है निराशासेन समाज के प्रतिनिधि संजय सेन ने इस बात पर जोर दिया कि रिश्तेदारों को टिकट देने की इस परंपरा को पूरी तरह बंद किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि जो लोग धरातल पर तन-मन से पार्टी के साथ लगे रहते हैं और रात-एक करते हैं, उन्हें दरकिनार कर जब परिवार के किसी सदस्य को टिकट दे दिया जाता है, तो पार्टी के प्रति कार्यकर्ताओं का विश्वास डगमगा जाता है. लंबे समय तक निष्ठा से काम करने के बावजूद मौका न मिलने पर कार्यकर्ताओं के मन में गहरी निराशा घर कर जाती है, जिससे उनका पार्टी से मोहभंग होने लगता है.
जाजम उठाने तक सीमित रह गया है आम कार्यकर्ता: लोकेश बासीतायुवा नेता लोकेश बासीता ने बेहद दर्द भरे शब्दों में अपनी बात रखते हुए कहा कि आज की स्थिति में आम कार्यकर्ता सिर्फ जाजम उठाने या भीड़ जुटाने लायक ही रह गया है. कार्यकर्ता घर-घर जाकर पार्टी के लिए वोट बैंक बढ़ाता है, नेताओं को सांसद और विधायक बनाकर सरकार बनाने में मदद करता है, लेकिन जब टिकट बंटवारे की बारी आती है तो उसका जमकर शोषण होता है. उन्होंने आरोप लगाया कि जिन नेताओं के परिजनों को एसी कमरों से निकालकर सीधे टिकट दे दिया जाता है, उन्होंने कभी पार्टी के लिए जमीन पर संघर्ष नहीं किया होता. वे सत्ता का सुख भोगकर निकल जाते हैं, जिससे आम कार्यकर्ता का राजनीतिक करियर भी बर्बाद हो जाता है और जनता के विकास कार्य भी ठप पड़ जाते हैं.
विकास कार्यों में आती है बाधा, जनता में बढ़ता है आक्रोशस्थानीय व्यापारी गौरव का मानना है कि सालों से चली आ रही रिश्तेदारों को टिकट देने की यह परंपरा पूरी तरह अनुचित है. जो लोग पहले से सांसद, विधायक या मंत्री पद पर रहे हैं, बार-बार उन्हीं के घरवलों को रिपीट किया जाता है, जिससे जमीनी कार्यकर्ताओं को कभी आगे बढ़ने का मौका नहीं मिलता. इस राजनीतिक ठहराव के कारण जनता का आक्रोश लगातार बढ़ता जाता है और स्थानीय मुद्दे ऊपर तक नहीं पहुंच पाते, जिससे विकास कार्यों में बड़ी बाधा उत्पन्न होती है. जनता अब यही चाहती है कि परिवारवाद को छोड़कर आम और कर्मठ कार्यकर्ताओं को मौका दिया जाए ताकि विकास को नई गति मिल सके.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…
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Bhilwara,Bhilwara,Rajasthan
First Published :
October 16, 2026, 13:00 IST



