Rajasthan Fake Doctors | Rajasthan Farji Doctor

जयपुर. मरीज अस्पताल पहुंचता है तो उसे उम्मीद होती है कि डॉक्टर उसकी बीमारी समझेगा और सही इलाज करेगा. लेकिन राजस्थान में दो ऐसे लोगों का मामला सामने आया है, जिन पर फर्जी दस्तावेजों के सहारे डॉक्टर बनने और राजस्थान मेडिकल काउंसिल (RMC) में रजिस्ट्रेशन कराने का आरोप है. राजस्थान पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने पंकज यादव और नानजीराम चौधरी को गिरफ्तार किया है. दोनों को कोर्ट में पेश किया गया है और एसओजी उनसे पूछताछ कर रही है.
इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात दोनों का कथित फर्जीवाड़ा करने का तरीका है. पंकज यादव ने कजाकिस्तान से MBBS की पढ़ाई की, लेकिन विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट परीक्षा (FMG) छह बार पास नहीं कर सका. आरोप है कि इसके बाद उसने बिहार के एक मेडिकल कॉलेज की फर्जी डिग्री और मार्कशीट खरीदी और उसी के आधार पर राजस्थान मेडिकल काउंसिल में रजिस्ट्रेशन करा लिया.
8वीं पास, उसके बाद के सभी डॉक्यूमेंट फर्जीदूसरी तरफ, नानजीराम चौधरी पर आरोप है कि आठवीं कक्षा के बाद उसकी पढ़ाई से जुड़े दस्तावेज ही फर्जी थे. इसके बावजूद उसने अलग-अलग संस्थानों की डिग्री और डिप्लोमा के सहारे खुद को डॉक्टर के रूप में पेश किया. इतना ही नहीं, उसने अस्पताल भी खरीदा और बाद में उसका नाम बदल दिया. अब एसओजी इस पूरे मामले की परतें खोलने में जुटी है.
कजाकिस्तान से MBBS, छह बार परीक्षा में असफल
एसओजी की जांच में पंकज यादव का मामला विदेशी मेडिकल डिग्री से जुड़ा सामने आया है. जानकारी के अनुसार, पंकज ने वर्ष 2013 से 2018 के बीच कजाकिस्तान से MBBS की पढ़ाई की थी. विदेश से मेडिकल की पढ़ाई करने वाले भारतीय छात्रों को भारत में डॉक्टर के तौर पर काम करने के लिए जरूरी परीक्षा पास करनी होती है. पंकज यादव छह बार FMG परीक्षा में असफल रहा. आरोप है कि परीक्षा पास नहीं कर पाने के बाद उसने बिहार के श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज की MBBS डिग्री और मार्कशीट खरीदी. ये दस्तावेज कथित तौर पर फर्जी थे. इसके बाद पंकज ने इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर राजस्थान मेडिकल काउंसिल में अपना रजिस्ट्रेशन करा लिया. यानी जिस भारतीय मेडिकल डिग्री के आधार पर उसका रजिस्ट्रेशन हुआ, उसकी असलियत पर अब सवाल खड़े हो गए हैं.
बिहार से वेरिफिकेशन हुआ तो खुला फर्जी डिग्री का मामला
इस कथित फर्जीवाड़े का खुलासा दस्तावेजों के वेरिफिकेशन के दौरान हुआ. बिहार के श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज से डिग्री और मार्कशीट की पुष्टि कराई गई तो उनकी सत्यता पर सवाल सामने आए. इसके बाद मामला जांच के दायरे में आया. एसओजी ने पंकज यादव को हरियाणा के कैथल से गिरफ्तार किया. अब जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी दस्तावेज कहां से तैयार कराए गए, रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया में किन लोगों की भूमिका रही और दस्तावेजों के आधार पर उसे मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण कैसे मिला.
आठवीं पास नानजीराम ने खुद को बनाया स्त्री रोग विशेषज्ञ
इस मामले का दूसरा आरोपी नानजीराम चौधरी है. उसके बारे में सामने आई जानकारी के अनुसार, वह आठवीं कक्षा तक पढ़ा था. आरोप है कि इसके बाद की पढ़ाई से लेकर मेडिकल डिग्री और विशेषज्ञता के दस्तावेज भी फर्जी थे. नानजीराम के पास 10वीं और 12वीं की जो मार्कशीट बताई गई, वे आंध्र प्रदेश सेकेंडरी बोर्ड की थीं. उसकी MBBS डिग्री कानपुर की रामा यूनिवर्सिटी के नाम से बताई गई. इसके अलावा उसने मुंबई के द कॉलेज ऑफ फिजिशियन्स एंड सर्जन्स से स्त्री रोग यानी OB-GYN से जुड़ा डिप्लोमा भी लिया हुआ बताया. जांच में इन दस्तावेजों को फर्जी पाया गया है. इस तरह आरोप है कि नानजीराम ने अपनी शैक्षणिक योग्यता से जुड़े अलग-अलग दस्तावेजों के सहारे मेडिकल पेशे में जगह बनाई. आठवीं के बाद की पढ़ाई के प्रमाणपत्रों से लेकर MBBS डिग्री और स्त्री रोग विशेषज्ञता के डिप्लोमा तक पर सवाल उठे हैं.
पहले अस्पताल खरीदा, फिर नाम बदला और डॉक्टर भी रखानानजीराम के मामले में कहानी सिर्फ फर्जी डिग्री तक सीमित नहीं है. जानकारी के अनुसार, वह पहले अस्पताल में ओपीडी की पर्चियां काटने का काम करता था. इसके बाद वर्ष 2015 में उसने एक अस्पताल खरीदा, जिसका नाम उस समय राजदेव अस्पताल था. साल 2016 में अस्पताल का नाम बदलकर भास्कर अस्पताल रख दिया गया. इसके बाद वर्ष 2019 में नानजीराम ने अस्पताल के लिए एक स्त्री रोग विशेषज्ञ को रखा. यह पूरा घटनाक्रम अब जांच का हिस्सा है. आरोप है कि नानजीराम ने मेडिकल काउंसिल में लगातार आने-जाने के दौरान कर्मचारियों से पहचान बना ली थी. इसके बाद उसने खुद का रजिस्ट्रेशन भी राजस्थान मेडिकल काउंसिल में करा लिया. एसओजी अब इस बात की जांच कर रही है कि उसके दस्तावेजों का सत्यापन कैसे हुआ और रजिस्ट्रेशन में किसी कर्मचारी की भूमिका थी या नहीं.
मेडिकल काउंसिल के कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के घेरे मेंइस मामले में राजस्थान मेडिकल काउंसिल के कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है. एसओजी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित फर्जी दस्तावेजों के आधार पर रजिस्ट्रेशन कैसे हुआ और संबंधित रिकॉर्ड की जांच किस स्तर पर की गई. जानकारी के अनुसार, 6 अक्टूबर 2024 को राजस्थान मेडिकल काउंसिल के रजिस्ट्रार ने आठ लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कराया था. इस FIR में शांतनु कुमार चारण, दीपक चौधरी, देवेन्द्र नेहरा, गीता कुमारी, पंकज यादव, महेश कुमार गुर्जर, सरीमूल मजूमदार और रामकिशोर महावर के नाम शामिल थे. पंकज यादव को एसओजी ने इसी मामले में गिरफ्तार किया है. वहीं, नानजीराम चौधरी के खिलाफ बाद में अलग से मामला दर्ज किया गया था. अब दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया जा चुका है और एसओजी उनसे गहन पूछताछ कर रही है.
अब जांच में इन सवालों के जवाब तलाश रही SOGइस पूरे मामले में कई अहम सवाल हैं. पंकज यादव के कथित फर्जी दस्तावेज कहां तैयार हुए? श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज के नाम पर बनी डिग्री और मार्कशीट का इस्तेमाल कर रजिस्ट्रेशन कैसे कराया गया? नानजीराम चौधरी की शैक्षणिक योग्यता और मेडिकल डिग्री से जुड़े दस्तावेजों की जांच किस तरह हुई? क्या रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में किसी कर्मचारी ने मदद की थी? एसओजी की जांच में इन सवालों के जवाब सामने आना बाकी है. फिलहाल दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर पूछताछ की जा रही है. मेडिकल काउंसिल के कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है.



