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सर्दी में पेंटेड स्टॉर्क का डेरा, समेलिया धाम बना 600 से ज्यादा दुर्लभ पक्षियों का सुरक्षित आश्रय!

Last Updated:January 06, 2026, 18:51 IST

भीलवाड़ा में सर्दियों में चांवड़िया तालाब, गुरलां तालाब और मेजा बांध जैसे जलाशयों पर पक्षियों की चहचहाहट बढ़ जाती है. इस दौरान कई जलीय और पेड़ों पर बसेरे बनाने वाले पक्षी यहां आते हैं. खासकर समेलिया धाम के जंभेश्वर मंदिर के पास बने सरोवर में इस समय संकटग्रस्त प्रजाति पेंटेड स्टॉर्क की 600 से अधिक संख्या देखी गई है. ये झुंड में पेड़ों पर आराम करते और सुबह-शाम उड़ान भरते हैं, जिससे आसपास का इलाका जीवंत हो उठता है. शांत वातावरण, पर्याप्त भोजन और पेड़ों की उपलब्धता इसे पेंटेड स्टॉर्क के लिए अनुकूल ठिकाना बनाती है.bhilwara

भीलवाड़ा में सर्दियों के मौसम के साथ ही चांवड़िया तालाब, गुरलां तालाब और मेजा बांध जैसे जलाशयों पर पक्षियों की चहचहाहट बढ़ जाती है. हर साल ठंड शुरू होते ही यहां बड़ी संख्या में पक्षी भोजन और सुरक्षित आश्रय की तलाश में आते हैं. खास बात यह है कि इनमें कई ऐसे पक्षी भी शामिल हैं जो पूरी तरह जलीय नहीं होते, लेकिन पानी के आसपास मौजूद पेड़ों पर बसेरा बनाते हैं. इससे क्षेत्र का प्राकृतिक सौंदर्य और भी बढ़ जाता है और पक्षी प्रेमियों के लिए यह दृश्य बेहद आकर्षक हो जाता है.

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इसी कड़ी में मांडल क्षेत्र के समेलिया धाम स्थित जंभेश्वर मंदिर के पास बने सरोवर में इस समय एक खास पक्षी प्रजाति डेरा डाल रही है. यहां पेंटेड स्टॉर्क नामक लोकल बर्ड की करीब 600 से अधिक संख्या देखी गई है. ये पक्षी झुंड के रूप में सरोवर के आसपास लगे पेड़ों पर आराम करते नजर आते हैं. सुबह और शाम के समय इनका उड़ान भरना और भोजन की तलाश में निकलना बेहद मनमोहक दृश्य प्रस्तुत करता है, जिससे आसपास का इलाका जीवंत हो उठता है.

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पेंटेड स्टॉर्क को एंटी कैटेगरी यानी संकटग्रस्त प्रजातियों में शामिल किया गया है. वैश्विक स्तर पर इनकी संख्या में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है, जो पर्यावरण के लिए चिंता का विषय है. ऐसे में जंभेश्वर सरोवर का इन पक्षियों के लिए सुरक्षित ठिकाना बनना बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. शांत वातावरण, पर्याप्त भोजन और पेड़ों की उपलब्धता के कारण यह क्षेत्र पेंटेड स्टॉर्क के लिए अनुकूल साबित हो रहा है.

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समेलिया धाम, राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में स्थित, गुरु जम्भेश्वर भगवान का प्रसिद्ध और ऐतिहासिक मंदिर है. यह मंदिर मेजा बांध के पास समेलिया गांव में स्थित है और बिश्नोई समुदाय के लिए गहरी आस्था का केंद्र माना जाता है. मंदिर के पास स्थित जम्भ सरोवर और चारों ओर फैली हरियाली न केवल श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है, बल्कि पक्षियों के लिए भी सुरक्षित और शांत वातावरण प्रदान करती है, जिससे जैव विविधता को बढ़ावा मिलता है.

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करीब 500 साल पुराने इस मंदिर और सरोवर का ऐतिहासिक और प्राकृतिक महत्व पक्षियों के संरक्षण में भी अहम भूमिका निभा रहा है. कहा जाता है कि राणा सांगा के समय से यह क्षेत्र प्रकृति प्रेम का प्रतीक रहा है. आज पेंटेड स्टॉर्क जैसे दुर्लभ पक्षियों की मौजूदगी इस बात का प्रमाण है कि यदि प्राकृतिक स्थलों को संरक्षित रखा जाए, तो संकटग्रस्त प्रजातियों को भी सुरक्षित आश्रय मिल सकता है. यह इलाका पक्षी संरक्षण के लिहाज से एक मिसाल बनता जा रहा है.

First Published :

January 06, 2026, 18:51 IST

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भीलवाड़ा के समेलिया धाम बना पेंटेड स्टॉर्क पक्षियों का सुरक्षित आश्रय

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