Sanwaliya Seth Rath Yatra: चांदी के रथ पर सवार होकर निकले सांवलिया सेठ, जयकारों से गूंजा मेवाड़

Last Updated:September 22, 2026, 20:30 IST
Sanwaliya Seth Rath Yatra: देव झूलनी ग्यारस पर मेवाड़ में आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला. श्री सांवलिया सेठ मंदिर से भगवान की भव्य भाव सवारी निकली, जिसमें सांवलिया सेठ चांदी के रथ पर सवार होकर सरोवर तक पहुंचे. जयकारों, गुलाल और भव्य झांकियों के बीच हजारों श्रद्धालु सवारी में शामिल हुए. मंदिर क्षेत्र में दो दिवसीय मेले के चलते माहौल पूरी तरह भक्तिमय नजर आया.
उदयपुर. मेवाड़ में देव झूलनी ग्यारस यानी जलझूलनी एकादशी का पर्व खास धार्मिक परंपराओं के साथ मनाया जा रहा है. इस मौके पर मेवाड़ के प्रसिद्ध श्री सांवलिया सेठ मंदिर से भगवान की भाव सवारी निकाली गई. चांदी के रथ पर सवार होकर भगवान श्री सांवलिया सेठ भक्तों के बीच पहुंचे. इस खास सवारी के साक्षी बनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचे. श्री सांवलिया सेठ के प्रति हजारों श्रद्धालुओं की आस्था जुड़ी हुई है. देव झूलनी ग्यारस पर होने वाली यह भाव सवारी हर साल भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र रहती है. सवारी के साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालु चलते नजर आए, रास्तेभर भगवान के जयकारों से माहौल भक्तिमय हो गया.
मेवाड़ में देव झूलनी ग्यारस पर राम रेवाड़ी निकालने की परंपरा वर्षों पुरानी है, इसी परंपरा के तहत श्री सांवलिया सेठ मंदिर से भी भगवान की भाव सवारी निकाली गई. भगवान श्री सांवलिया सेठ चांदी के रथ पर सवार होकर सरोवर तक पहुंचे, जहां उन्हें स्नान कराया गया. सवारी के दौरान रास्तेभर अलग-अलग भव्य झांकियां भी साथ चलती रही, भगवान के दर्शन के लिए श्रद्धालु जगह-जगह खड़े रहे. चांदी के रथ में सवार सांवलिया सेठ की एक झलक पाने के लिए भक्तों में खास उत्साह दिखाई दिया.
गुलाल के रंग में रंगे भक्त
भाव सवारी के दौरान पूरा माहौल भक्ति और उत्साह से भर गया. श्रद्धालुओं ने भगवान के जयकारे लगाए और गुलाल उड़ाकर खुशी जताई. रंगों के बीच भक्त नाचते-गाते हुए भगवान के साथ चलते नजर आए, सवारी के रास्ते में बड़ी संख्या में लोगों ने भगवान के दर्शन किए. देव झूलनी ग्यारस पर निकलने वाली यह भाव सवारी सांवलिया सेठ की धार्मिक परंपरा का खास हिस्सा है. यह वह अवसर होता है, जब भगवान मंदिर से बाहर निकलकर भक्तों को दर्शन देते हैं. इसी वजह से हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस सवारी का हिस्सा बनने और भगवान के दर्शन करने पहुंचते हैं. इस अवसर पर मंदिर क्षेत्र में दो दिवसीय मेले का भी आयोजन किया जा रहा है. मेले और भाव सवारी के चलते पूरा क्षेत्र श्रद्धालुओं से गुलजार नजर आ रहा है. सांवलिया सेठ की भाव सवारी मेवाड़ की वर्षों पुरानी परंपरा, लोक आस्था और भक्ति का खास रंग दिखाती है.
About the Authorमोनाली पाल
नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…
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Udaipur,Rajasthan
First Published :
September 22, 2026, 20:30 IST



