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Sheikh Hasina Exclusive: पाकिस्तान से नजदीकी बढ़ा आग से खेल रहे मोहम्मद यूनुस, भड़काने के बावजूद भारत ने रखा धैर्य

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री और आवामी लीग प्रमुख शेख़ हसीना ने को दिए एक विशेष इंटरव्यू में अंतरिम सरकार, मोहम्मद यूनुस, पाकिस्तान की भूमिका और भारत–बांग्लादेश संबंधों को लेकर खुलकर बात की है. उन्होंने भारत को बांग्लादेश का भरोसेमंद मित्र बताया और विश्वास जताया कि अस्थायी राजनीतिक उथल-पुथल के बावजूद दोनों देशों के रिश्ते मज़बूत बने रहेंगे. पूरा इंटरव्यू पढ़िए —

सवाल: अगर किसी पॉलिटिकल पार्टी पर बैन लगा दिया जाए और उसके नेता को मौत की सज़ा दे दी जाए, तो उस पार्टी का भविष्य कैसे सुरक्षित रहेगा?

जवाब: “आवामी लीग बांग्लादेश के इतिहास और उसके स्वतंत्रता संग्राम से गहराई से जुड़ी हुई पार्टी है. हमने पहले भी हत्या के प्रयासों, सैन्य शासन और राजनीतिक रूप से खत्म करने की बार-बार की गई कोशिशों का सामना किया है. यह मौत की सज़ा एक ऐसी ‘कंगारू कोर्ट’ ने सुनाई है, जो एक बिना चुनी हुई अंतरिम सरकार के इशारे पर काम कर रही है. हमें उम्मीद और भरोसा है कि देर-सवेर बांग्लादेश में लोकतंत्र की वापसी होगी और उसके साथ ही हमारी पार्टी को भी उसका सही और सम्मानजनक स्थान मिलेगा. पार्टी पर लगाया गया मौजूदा प्रतिबंध, दरअसल अंतरिम सरकार की असुरक्षा और असली लोकतांत्रिक मुकाबले से उसके डर को उजागर करता है”.”

किसी पार्टी पर प्रतिबंध लगाने से उसके लाखों समर्थकों को खत्म नहीं किया जा सकता. आवामी लीग को जनता ने नौ बार चुना है, क्योंकि हमारी जड़ें देश के हर गाँव और हर मोहल्ले में हैं. हम कानूनी, कूटनीतिक और शांतिपूर्ण तरीकों से अपना संघर्ष जारी रखेंगे, ताकि बांग्लादेश को फिर से उसके लोगों को सौंपा जा सके.

सवाल: ISI की सक्रियता, पाक सेना प्रमुखों के साथ बैठकें, भारत के नॉर्थ-ईस्ट को ‘ग्रेटर बांग्लादेश’ दिखाना, सिलीगुड़ी कॉरिडोर पर टिप्पणियाँ – मोहम्मद यूनुस की पाकिस्तान से बढ़ती नज़दीकियां और भारत को उकसाना — इन सभी घटनाओं पर आपका क्या मत है?

जवाब: “अंतर्राष्ट्रीय संगठनों ने सर्वसम्मति से यूनुस के कामों की निंदा की है, उनकी सरकार के सदस्य विरोध में इस्तीफ़ा दे रहे हैं, और लाखों बांग्लादेशी उनके खेल को समझने लगे हैं. इसमें कोई हैरानी की बात नहीं है कि यूनुस पाकिस्तान को गले लगाने की जल्दी में हैं, वह एक ऐसे क्षेत्रीय खिलाड़ी के पास जा रहे हैं, जिसे वह ठीक से समझते भी नहीं हैं, और किसी भी तरह की अंतर्राष्ट्रीय मान्यता के लिए भीख माँग रहे हैं”.

“यूनुस के पास न तो कूटनीति की विशेषज्ञता है और न ही उसे चलाने का जनादेश, जो लंबे समय की साझेदारी और देश के रणनीतिक हितों के बारे में होती है. मैं भारत के धैर्य की सराहना करती हूँ, वह ऐसे नेता का इंतज़ार कर रहा है जो हमारे देश का प्रतिनिधित्व कर सके, न कि सिर्फ़ मुट्ठी भर अलोकप्रिय चरमपंथियों का”.

सवाल: 1971 में पाकिस्तानी सेना ने दो लाख से ज़्यादा बांग्लादेशी महिलाओं के साथ बलात्कार किया था. क्या आपको लगता है कि आज पाकिस्तान उसी तरह का दमनकारी माहौल या अस्थिरता दोबारा पैदा करने की कोशिश कर रहा है?

जवाब: “आज हम जो हिंसा देख रहे हैं — ‘अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया जाना, महिलाओं पर हमले और हमारे मुक्ति संग्राम के इतिहास को मिटाने की कोशिशें’ — ये सब 1971 की परेशान करने वाली यादों की गूंज हैं”.

“हमने युद्ध में इस विचारधारा के खिलाफ लड़ाई लड़ी, और हमने बांग्लादेश को एक मज़बूत, धर्मनिरपेक्ष और सुरक्षित देश बनाया – खासकर महिलाओं और अल्पसंख्यकों के लिए. पाकिस्तान के साथ स्थिर, रचनात्मक संबंध रखना हमारे देश के हित में है. लेकिन हमें मज़बूत नेतृत्व की भी ज़रूरत है: न सिर्फ़ अपने देश की रक्षा के लिए, बल्कि देश के भीतर रहने वालों की रक्षा के लिए भी”.

सवाल: आपके बाद भारत–बांग्लादेश के रिश्तों में जो दरार आई है, क्या इन संबंधों में फिर से सुधार संभव है?

जवाब: “मुझे इसमें कोई शक नहीं है, कि भारत के साथ हमारे रिश्ते यूनुस के इस बेवकूफी भरे दौर को झेल सकते हैं, जो कि कुछ समय के लिए ही है. भारत सिर्फ़ एक रणनीतिक पार्टनर नहीं है, बल्कि एक ऐसा मित्र है जिसके साथ हम संस्कृति, इतिहास और 4,000 किमी का बॉर्डर साझा करते हैं. एक बार जब बांग्लादेशी आज़ादी से वोट दे पाएंगे, तो वे एक ऐसे नेता को चुनेंगे जो भारत का दोस्त बनने के लायक हो, और मैं अपने पड़ोसी भारत के धैर्य की सराहना करती हूँ क्योंकि वह समझदार के आने का इंतज़ार कर रहा है”.

सवाल: बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने आधिकारिक तौर पर भारत से आपके प्रत्यर्पण का अनुरोध किया है; अगर भारत आपको ढाका वापस भेजने के लिए सहमत हो जाता है, तो क्या आप मुकदमे का सामना करने के लिए वापस जाएंगी, या आप इसे राजनीतिक हत्या की साज़िश मानकर इसका विरोध करेंगी?

जवाब: “यह न्यायिक चोला पहनकर की गई एक राजनीतिक हत्या है. तथाकथित इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल न तो इंटरनेशनल है और न ही निष्पक्ष, जैसा कि कई सम्मानित विदेशी न्यायविदों ने बताया है. इसका फ़ैसला मेरे राजनीतिक विरोधियों द्वारा गढ़ा गया है. यूनुस शासन में ढाका लौटना ज़ाहिर है मेरे लिए सुरक्षित नहीं होगा”.

“मैंने बार-बार अंतरिम सरकार को चुनौती दी है कि वह इन आरोपों को हेग स्थित “इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट (ICC) के सामने लाए. यूनुस इनकार करते हैं, क्योंकि वे जानते हैं कि ICC मुझे बरी कर देगा और उनकी सरकार के मानवाधिकारों के उल्लंघन के खराब रिकॉर्ड की जांच करेगा”.

सवाल: ढाका की एक कोर्ट ने आपको ‘मानवता के खिलाफ अपराध’ के मामले में मौत की सज़ा सुनाई है, लेकिन आप भारत में शरण लेकर रह रही हैं. क्या आपको लगता है कि अब आपकी ज़िंदगी और न्याय का रास्ता दोनों नई दिल्ली में लिए गए फैसलों पर निर्भर करते हैं?

जवाब: “मैं, मेरा स्वागत करने के लिए भारतीय लोगों की बहुत आभारी हूँ. मैं अपना घर नहीं छोड़ना चाहती थी, लेकिन वहाँ रहने से न सिर्फ़ मुझ पर बल्कि मुझे बचाने की कोशिश करने वालों पर भी हिंसा का खतरा था”.

“न्याय अंतर्राष्ट्रीय दबाव और बांग्लादेश में लोकतंत्र की बहाली से मिलेगा. ह्यूमन राइट्स वॉच, संयुक्त राष्ट्र उच्चायुक्त, एमनेस्टी इंटरनेशनल सहित अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने इन कार्यवाहियों की निंदा की है. न्याय की मेरी राह किसी एक देश के फ़ैसले पर नहीं, बल्कि बांग्लादेश में संवैधानिक शासन और क़ानून के राज की वापसी पर निर्भर करती है”.

सवाल: क्या आपको भरोसा है कि मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में होने वाला अगला चुनाव वास्तव में स्वतंत्र और निष्पक्ष होगा?

जवाब: “जब तक आवामी लीग पर लगाया गया प्रतिबंध बना रहेगा, तब तक कोई भी चुनाव न तो स्वतंत्र हो सकता है, न निष्पक्ष और न ही समावेशी. यूनुस ने लाखों नागरिकों को वोट देने के अधिकार से वंचित कर दिया है और देश को चुनने के अधिकार से वंचित किया है. हमारे बिना होने वाला कोई भी चुनाव अगली सरकार की वैधता को कमजोर करेगा”.

“इस प्रशासन ने हमारी पार्टी पर प्रतिबंध लगाया है, हज़ारों लोगों को झूठे मामलों में हिरासत में लिया है, पत्रकारों की आवाज़ दबाई है और न्यायपालिका की स्वतंत्रता को नष्ट किया है. इसलिए आपके सवाल का जवाब, मुझे उम्मीद है, पूरी तरह स्पष्ट है”.

सवाल: भविष्य में क्या आप आवामी लीग की राजनीतिक विरासत अपने बेटे सजीब वाज़ेद और बेटी साइमा वाज़ेद को सौंपेंगी? क्या आने वाले वर्षों में वे पार्टी का नेतृत्व संभालेंगे?

जवाब: “आवामी लीग का भविष्य उसके कार्यकर्ता और समर्थक तय करेंगे. हमारी पार्टी की जड़ें बांग्लादेश के हर कोने में हैं और हमारे पास लाखों समर्पित सदस्य हैं, जिन्होंने दशकों के संघर्ष के दौरान 1971 की भावना को जीवित रखा है”.

“मेरे परिवार ने बांग्लादेश की आज़ादी की कीमत अपने ख़ून से चुकाई है. लेकिन नेतृत्व विरासत में मिलने की चीज़ नहीं होती — वह जनता का भरोसा जीतकर हासिल किया जाता है. बांग्लादेश में जब लोकतंत्र की वापसी होगी, तब पार्टी अपने भविष्य की दिशा खुद तय करेगी. इस समय सबसे ज़रूरी यह है कि हम एकजुट, शांतिपूर्ण और अपने देश में वास्तविक लोकतंत्र की बहाली के लिए प्रतिबद्ध रहें”.

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