कैंसर को हराने वाली सुजा देवी की कहानी

Last Updated:January 07, 2026, 06:06 IST
Jodhpur News: जैतारण की सुजा देवी प्रजापत ने ओवरी कैंसर की फोर्थ स्टेज को हराकर एक नई मिसाल पेश की है. बीमारी के इलाज के चक्कर में सुजा देवी को अपने गहने और संपत्ति तक बेचनी पड़ी थी, लेकिन उन्हें पावटा सैटेलाइट अस्पताल में नया जीवन मिला. डॉ. अनिल और उनकी टीम ने जटिल सर्जरी और कीमोथेरेपी के जरिए उन्हें मौत के मुंह से बाहर निकाला. आज सुजा देवी पूरी तरह स्वस्थ हैं और हस्तशिल्प व्यवसाय के जरिए आत्मनिर्भर जीवन जी रही हैं. उनकी यह कहानी साबित करती है कि सही इलाज और दृढ़ इच्छाशक्ति से कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी को भी मात दी जा सकती है.
ख़बरें फटाफट
Jodhpur News: राजस्थान के जैतारण गांव की रहने वाली सुजा देवी प्रजापत की कहानी किसी चमत्कार से कम नहीं है. यह कहानी उन लाखों लोगों के लिए प्रेरणा है जो कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के सामने हार मान लेते हैं. सुजा देवी के जीवन में एक समय ऐसा आया था जब उन्हें ‘ओवेरियन कार्सिनोमा’ यानी ओवरी कैंसर की चौथी स्टेज (Fourth Stage) का पता चला. इस घातक बीमारी ने न केवल उनके स्वास्थ्य को तोड़ा, बल्कि उनके आर्थिक हालात भी पस्त कर दिए. इलाज की तलाश में सुजा देवी दर-दर भटकीं और लाखों रुपये खर्च किए. स्थिति यहाँ तक पहुँच गई कि उन्हें अपनी मेहनत की जमा पूंजी, घर के गहने और संपत्ति तक बेचनी पड़ी. लेकिन इन सबके बावजूद बीमारी पर काबू नहीं पाया जा सका और सुजा देवी को लगा कि अब उनके पास जीने की कोई उम्मीद नहीं बची है.
आर्थिक तंगी और मौत के डर के बीच सुजा देवी अंततः जोधपुर के पावटा सैटेलाइट अस्पताल पहुँचीं. यहाँ के डॉक्टरों ने उनके केस को एक चुनौती के रूप में लिया. अस्पताल के डॉ. अनिल ने बताया कि पेशेंट की स्थिति काफी गंभीर थी. मेडिकल टीम ने बिना समय गंवाए ‘लेप्रोस्कोपिक डायग्नोसिस’ के जरिए बीमारी की गहराई को समझा और फिर विधिवत तरीके से जटिल सर्जरी को अंजाम दिया. सर्जरी के बाद कीमोथेरेपी का लंबा दौर चला. इस दौरान डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ ने सुजा देवी को सिर्फ दवा ही नहीं दी, बल्कि वह हिम्मत और मानसिक संबल भी दिया जिसकी उन्हें उस वक्त सबसे ज्यादा जरूरत थी. डॉक्टरों की इसी मानवीय संवेदना और सही इलाज ने असंभव को संभव बना दिया.
कैंसर को हराकर बनीं आत्मनिर्भर
आज सुजा देवी न केवल पूरी तरह स्वस्थ हैं, बल्कि वे समाज के लिए आत्मनिर्भरता की एक नई मिसाल बन चुकी हैं. कैंसर को हराने के बाद वे फिर से अपने पुश्तैनी हस्तशिल्प व्यवसाय से जुड़ गई हैं. हाल ही में आयोजित ‘पश्चिमी राजस्थान हस्तशिल्प उत्सव’ में सुजा देवी ने अपनी स्टॉल लगाई, जहाँ उनकी कला के साथ-साथ उनके संघर्ष की कहानी ने हजारों लोगों को भावुक कर दिया. वे अब नियमित रूप से फॉलोअप के लिए अस्पताल जाती हैं और अन्य मरीजों को भी कैंसर से न डरने की सलाह देती हैं. सुजा देवी का कहना है कि उनके लिए डॉक्टर भगवान का रूप बनकर आए, जिन्होंने उनके बिके हुए गहनों के गम को जिंदगी की खुशी में बदल दिया.
इंसानियत और विज्ञान का संगम
यह कहानी साबित करती है कि यदि आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के साथ मानवीय संवेदनाएं और डॉक्टर का समर्पण जुड़ जाए, तो कैंसर की आखिरी स्टेज पर खड़ा मरीज भी वापस लौट सकता है. पावटा अस्पताल की पूरी मेडिकल टीम की तत्परता ने एक गरीब परिवार को उजड़ने से बचा लिया. सुजा देवी का स्वस्थ होकर आत्मनिर्भर बनना यह संदेश देता है कि कैंसर लाइलाज नहीं है, बशर्ते सही समय पर सही अस्पताल और सही सोच के साथ इलाज शुरू किया जाए. आज सुजा देवी की मुस्कान उन सभी के लिए एक जवाब है जो मानते हैं कि चमत्कार केवल कहानियों में होते हैं.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore is a multimedia journalist and digital content specialist with 8 years of experience in digital media, social media management, video production, editing, content writing, and graphic, A MAJMC gra…और पढ़ें
Location :
Jodhpur,Jodhpur,Rajasthan
First Published :
January 07, 2026, 06:06 IST
homerajasthan
मौत के मुंह से वापसी: जैतारण की सुजा देवी ने फोर्थ स्टेज ओवरी कैंसर को दी मात



