Rajasthan

Success Story: सपना पिता का, मेहनत बच्चों की; बस इस एक फैसले ने बना दिया 14 CA वाला परिवार

पाली. देश और दुनिया की बात की जाए तो मारवाड़ हमेशा से व्यापारियों के गढ़ के रूप में जाना जाता रहा है, मगर पाली में एक ऐसा परिवार है, जहां भले ही बिजनेस के लिए पैसे नहीं थे, लेकिन बच्चों की पढ़ाई को पहली प्राथमिकता दी गई. यही वजह है कि पाली का यह परिवार जहां एक नहीं, दो नहीं बल्कि 14 सीए (चार्टर्ड अकाउंटेंट) हैं. आज पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय है. यह परिवार कोई और नहीं बल्कि पाली का जिंदाणी परिवार है, जो करीब 95 साल पहले जैसलमेर से पाली आकर बसा था.

परिवार के पास व्यापार के लिए पूंजी नहीं थी, लेकिन बच्चों की शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया गया. परिणामस्वरूप वर्ष 1981 के बाद परिवार में लगातार सीए बनते गए और अब तक लगभग 14 सदस्य सीए बन चुके हैं. जब भी पाली में सीए की पढ़ाई या इस क्षेत्र से जुड़ी चर्चाएं होती हैं, तो इस परिवार का नाम सबसे पहले आता है.

95 साल पहले पाली आया था यह परिवार

पाली का यह जिंदाणी परिवार, जो जैसलमेर से करीब 95 साल पहले पाली आया था, ने व्यवसाय की जगह शिक्षा को प्राथमिकता दी. आर्थिक सीमाओं के बावजूद उन्होंने बच्चों के करियर को लेकर कोई समझौता नहीं किया. साल 1981 के बाद से परिवार में लगातार सीए बनते गए और आज उनकी संख्या 14 तक पहुंच चुकी है.

बस इस एक सोच ने बदल की परिवार की दशा और दिशा

परिवार के सदस्य सीए कुशल जिंदाणी बताते हैं कि वे आठ भाई-बहन थे. उनके पिता ललितचंद जिंदाणी पाली की उम्मेद मिल में सर्विस करते थे. वे हमेशा कहते थे कि मेरे पास इतनी पूंजी नहीं है कि तुम्हें व्यापार करवा सकूं या फैक्ट्री खोलकर दे सकूं, लेकिन मैं तुम्हें अच्छी पढ़ाई जरूर करवा सकता हूं. इसी सोच ने परिवार की दिशा ही बदल दी. सभी भाई-बहनों ने पढ़ाई को गंभीरता से लिया और शिक्षा को ही सफलता का रास्ता बनाया.

जैसलमेर से पाली तक की यात्रा

कुशल बताते हैं कि हम मूल रूप से जैसलमेर के रहने वाले हैं. हमारे दादा सौभाग्यमल जिंदाणी करीब 95 साल पहले जैसलमेर छोड़कर पाली आ गए थे. परिवार सोजतिया बास में रहता था. दादा उस समय सेठ बालिया के हेड मुनीम थे और उन्हें 80 चांदी के सिक्के प्रतिमाह वेतन के रूप में मिलते थे. पिता ललितचंद जिंदाणी उम्मेद मिल में मैनेजमेंट से जुड़ा पूरा कार्य देखते थे. सैलरी अधिक नहीं थी, लेकिन शिक्षा के प्रति समर्पण अडिग था. परिवार में 4 बहनें और 4 भाई थे और सभी को पिताजी ने शिक्षा पर ध्यान लगाने की प्रेरणा दी.

इस तरह शुरू हुआ सीए बनने का सिलसिला

कुशल जिंदाणी बताते हैं  कि हमारे परिवार में सबसे पहले वर्ष 1981 में बड़े भाई घीसूलाल जिंदाणी सीए बने. उनकी मेहनत और कार्यशैली ने हम सभी को प्रेरित किया. अगस्त 2023 में उनका निधन हो गया. उनके बाद परिवार में सीए बनने का सिलसिला लगातार जारी रहा. वर्तमान में सभी आठ भाई-बहनों के परिवारों और दामादों को मिलाकर कुल 14 सदस्य सीए हैं. कुशल बताते हैं कि बहनों में निर्मला (एमए), गुणबाला (बीए), चंद्रकला (बीए) और शशिकला (एमए) तक पढ़ी हैं, जबकि भाइयों में वे स्वयं और घीसूलाल सीए हैं. वहीं सम्पतराज और जयकुमार ने बी.कॉम तक पढ़ाई की है.

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