बुजुर्गों की डांट ने पूरी पीढ़ी बदल दी! कैसे 27 साल से पूरी तरह से नशा मुक्त है ये गांव, नशेड़ियों पर लगता जुर्माना

Agency:Local18
Last Updated:February 13, 2025, 17:09 IST
Tobacco free village: गुजरात के महेसाणा जिले का बादरपुर गांव 27 साल से नशा मुक्त है. यहां तंबाकू और अन्य नशों पर प्रतिबंध लगाया गया था, और अब यह गांव अपने बुजुर्गों की डांट से नशा मुक्त रहता है.
नशा मुक्त गांव
रिंकू ठाकोर/महेसाणा: महेसाणा जिले के वडनगर तालुका में स्थित बादरपुर गांव ने 27 साल पहले तंबाकू और अन्य नशों पर स्वेच्छा से प्रतिबंध लगा दिया था. आज भी इस गांव में किसी भी प्रकार का नशा नहीं होता. गांव में लगभग 5000 लोग रहते हैं, और इनकी ज्यादातर आबादी मोमिन समाज से है. यहां के लोग तंबाकू, सिगरेट, बीड़ी जैसी चीजों का सेवन नहीं करते, और इसके लिए उन्होंने किसी जुर्माने की बजाय अपने बुजुर्गों की डांट को अपनाया है, जो नशा करने वाले को सही रास्ते पर लाने का काम करती है.
नशे से हुई अकाल मृत्यु के बाद लिया था फैसलाबादरपुर गांव में नशे की शुरुआत काफी पहले हुई थी. गांव के पंचायत सदस्य साकीर अली वोहरा के अनुसार, 1997 से पहले गांव में तंबाकू और अन्य नशे का सेवन आम बात थी. इस दौरान तीन-चार युवाओं की अकाल मृत्यु हो गई थी, जिसके बाद गांव के लोग और तत्कालीन सरपंच गुलाम अली हैदर ने मिलकर तंबाकू मुक्त गांव बनाने का फैसला लिया. इस फैसले के तहत, गांव के हर दुकानदार ने अपने तंबाकू का स्टॉक पंचायत को सौंपा, जिसे पंचायत ने करीब दो लाख रुपये खर्च करके जलाया.
बुजुर्गों की डांट से बदल गई आदतेंसाकीर अली के अनुसार, गांव में नशा करने वाले लोग अब अपने ही गांव के नियमों के खिलाफ नहीं जाते. यहां किसी भी व्यक्ति को नशा करने पर कोई जुर्माना नहीं है, लेकिन बुजुर्गों की डांट से लोग डरते हैं और नशा छोड़ देते हैं. यह तरीका बाकी गांवों के लिए भी एक उदाहरण बन चुका है. गांव में नशा बंद करने के बाद से युवा नशे से पूरी तरह से दूर हो गए हैं और अब वे नशे के खिलाफ दूसरों को भी समझाते हैं.
बाहर से आने वालों के लिए भी हैं कड़े नियमबादरपुर गांव में नशा मुक्त रहने का यह नियम न केवल गांव के लोगों पर लागू होता है, बल्कि बाहर से आने वालों पर भी इस नियम का पालन करना होता है. गांव के बुजुर्ग हसनभाई बताते हैं कि जब इस नियम की शुरुआत हुई थी, तो गांव के लोग बहुत उत्साहित थे. आज 27 साल बाद भी गांव में कोई तंबाकू का सेवन या बिक्री नहीं करता. जो बाहर से आते हैं और तंबाकू खाने के आदि होते हैं, उन्हें बाहर जाकर तंबाकू खाना पड़ता है, लेकिन यहां भी जुर्माने का कोई सिस्टम नहीं है.
गांव की दुकानों में तंबाकू की कोई दुकान नहींबादरपुर गांव के दुकानदार मोहम्मदभाई, जो 15 साल से यहां दुकान चला रहे हैं, बताते हैं कि इस बदलाव को देखने का अवसर उन्हें मिला. उनके पिता भी इस गांव में दुकान चलाते थे जब यह नियम लागू हुआ था. अब इस गांव में 10-15 प्रोविजन स्टोर्स हैं, लेकिन इनमें से किसी भी दुकान में तंबाकू, सिगरेट या बीड़ी जैसी चीजें नहीं मिलतीं. यहां तक कि साधारण सुपारी भी नहीं बिकती. बावजूद इसके, दुकानदारों को उनके व्यवसाय में कोई नुकसान नहीं हुआ है, और वे इस निर्णय से खुश हैं क्योंकि यह गांव की एकता और स्वास्थ के लिए फायदेमंद साबित हो रहा है.
First Published :
February 13, 2025, 17:08 IST
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बुजुर्गों की डांट ने पूरी पीढ़ी बदल दी! कैसे 27 साल से नशा मुक्त है ये गांव


